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Etawah News: सीढि़ृृढ़िया जर्जर होने से रास्ता बंद, पटरियां करते पार

Fri, 10 Nov 2023 12:25 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा Updated Fri, 10 Nov 2023 12:25 AM IST
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Road closed due to stairs being dilapidated, crossing on tracks
इटावा। रेलवे जंक्शन पर जर्जर सीढि़यों की मरम्मत न हो पाने से रास्ता यात्रियों के बंद पड़ा हैं। ऐसे में यात्रियों को मुख्य द्वार से तीन सौ मीटर दूर बनी लिफ्ट या रैंप से होकर जाना पड़ रहा है। वहीं, दोनों से ही अन्य प्लेटफार्मों में लगने वाली देरी से बचने के लिए यात्री पटरियां पार करके जान जोखिम में डाल रहे हैं। दिवाली पर यात्रियों की संख्या बढ़ने से हादसों की आशंका बनी हुई है।
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इटावा स्टेशन से रोजाना 42 जोड़ी यानी 84 ट्रेनें आती और जाती हैं। सामान्य दिनों में 16 हजार यात्री सफर करते हैं। त्योहारी सीजन पर खासकर दीपावली जैसे पर्व पर यह संख्या और ज्यादा बढ़ जाती है। यात्रियों की संख्या अधिक होने की वजह से रेलवे की ओर से बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष रूप से मुख्य द्वार से लगभग ढाई सौ मीटर दूर रैंप का निर्माण कराया गया है। वहीं इसके बाद करीब दो साल पहले लिफ्ट भी लगवाई गई। इन दोनों चीजों के बनने से यात्रियों को राहत मिल सकी थी।
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हालांकि, अधिकांश यात्री रैंप पर लंबी दूरी से घूमकर जाने और लिफ्ट का इंतजार करने से बचने के लिए सीढि़यों का उपयोग करते थे। क्योंकि सीढि़यां सीधे मुख्य द्वार पर उतरती हैं। तीन माह पहले आठ नवंबर को सीढि़यों का प्लास्टर उखड़ने की वजह से उन्हें बंद कर दिया गया था। इससे लोगों को परेशानी होने लगी थी। रेलवे प्रशासन ने जल्द ही इसकी मरम्मत कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन तीन माह बाद भी इनकी मरम्मत न हो पाने से सीढि़यों वाला पुल नहीं खुल सका है। ऐसे में लोग प्रतिदिन ट्रेनें पकड़ने की जल्दबाजी में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
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यात्रियों का दर्द

अकालगंज निवासी मोहम्मद राशिद ने बताया कि वह व्यवसायी हैं। हर सप्ताह वह कानपुर या दिल्ली बाजार करने के लिए जाते हैं। स्टेशन पर सीढि़यां बंद होने की वजह से समय से काफी पहले निकलना पड़ता है। रैंप से प्लेटफार्म संख्या दो और तीन तक पहुंचने में लगभग एक किलोमीटर का चक्कर पड़ जाता है। सीढि़यों की मरम्मत कराई जाए। पक्का तालाब बजरिया निवासी संजीव पोरवाल ने बताया कि उनका फोेटोग्राफी का व्यवसाय है। काम के सिलसिले में उन्हें आसपास के कई जिलों में जाना पड़ता है। ट्रेन से जाने के लिए अब काफी देर पहले घर से निकलना पड़ता है। कई बार तो रैंप से जाने की वजह से ट्रेन आंखों के सामने छूट तक गई। सीढि़यों की मरम्मत हो तो काफी राहत मिलेगी।




वर्जन


पुरानी सीढि़यों की मरम्मत में क्यों देरी हो रही है। इस संबंध में स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।

- अमित सिंह, पीआरओ, प्रयागराज मंडल
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