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‘संस्कारहीनता से बिगड़ा समाज’

Sun, 05 Jul 2015 11:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Sun, 05 Jul 2015 11:12 PM IST
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'Rite impaired social inferiority'

‘संस्कारहीनता से समाज बहुत बिगड़ चुका है। एक सुलक्षिणी मां ही सुलक्षिणी संतान को जन्म देकर संस्कारवान समाज का निर्माण कर सकती है।’

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यह बात श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ में केंद्रीय समाज सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य बाबू दर्शन सिंह यादव ने कही। उन्होंने महिलाओं को नारी शक्ति और उसकी आदर्श महिमा का ध्यान दिलाते हुए कहा कि जब कौशल्या जैसी मां होती है तो राम जैसी आदर्श संतान जन्म लेती है।
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कयाधू राक्षसराज की पत्नी थी, लेकिन उसने भी प्रहलाद जैसा भक्तशिरोमणि पैदा किया और भी अनेक उदाहरण हैं कि जो आदर्श माताएं थी, उनके पुत्र-पुत्री भी महान संतति के रूप में पूजे गए।
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बाबूजी ने रामचरित मानस की चौपाइयों को उद्धत करते हुए कहा कि राजा दशरथ और राजा जनकजी के परिवारों के आचरण से यदि आज का समाज सीख लेता तो न भाई-भाई और न सास-बहुओं के बीच झगडे़ होते।

आज कितने परिवार ऐसे हैं, जो पुत्र के विवाह के बाद वधू लरकिनी पर घर आई-राखहु नयन पलक की नाई का व्यवहार करते हो और कितने ऐसे हैं जिनकी माताएं सुनयना की तरह सीता बेटी की विदाई करते वक्त यह सीख देती हो कि सासु-ससुर गुरु सेवा करिहू -पति रुख लखि आयसु अनुसरिहू।’

बाबूजी ने कहा कि यदि आज परिवारों में ऐसी आदर्श परंपरा होती तो भारत अपने गौरवशाली अतीत की तरह उन्नत तथा संस्कार संपन्न दिखाई देता। बुजुर्गों की उपेक्षा होने से परिवारों में कोई टोकने वाला नहीं रहा, लिहाजा परिवार टूटते जा रहे हैं।

उन्होंने नारी शक्ति का आह्वान किया कि वे अपनी संतान का इतनी अच्छी तरह पालन-पोषण करें, जिससे वे समाज के आदर्श नागरिक बन सकें क्योंकि जैसी मां होती है, संतान भी वैसी ही बनती है।


इससे पूर्व उन्होंने वैदपुरा के पास नगला बुधू में नीम के पौधे लगाए। इस मौके पर विनोद यादव ने बताया कि भागवत के भंडारे के बाद ग्राम में पचास से भी ज्यादा स्थानों पर खुडुआ बनाकर पौधरोपण किया जाएगा।

इस ‘वृक्षारोपण पर्व’ में भारी संख्या में पर्यावरण प्रेमी ग्रामीण भाग लेंगे, जिनमें जगदीश फौजी,  संजीव, राजेश यादव उर्फ मंत्री, राधेश्याम पूर्व प्रधान, राजीव यादव आदि प्रमुख हैं। भागवत के व्यास के रूप में श्री श्री 1008 स्वामी बलरामदास महाराज ने भक्तों को कथा सुनाई। 

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