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मुआवजा मिला, पुनर्वास और नौकरी की दरकार

Sat, 07 Feb 2015 11:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Sat, 07 Feb 2015 11:06 PM IST
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Received compensation , rehabilitation and employment needs

डीएम नितिन बंसल ने शनिवार को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन को लेकर किसानों की आपत्तियां सुनीं। किसानों ने सैफई के बराबर मुआवजा या फिर अधिग्रहण की प्रथम अधिसूचना प्रकाशन के समय प्रचलित सर्किल रेट का चार गुना प्रतिकर समेत पुनर्वास व प्रति परिवार नौकरी दिए जाने की मांग की।

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किसानों की ओर दी गई लिखित आपत्तियों में कहा गया कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा 11 के अनुसार प्रतिकर का आंकलन नए कानून के तहत ही होना है। इसी संदर्भ में प्रमुख सचिव राजस्व उत्तर प्रदेश ने गत 14 मार्च को आदेश संख्या 45 संलग्न किया था।
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इसमें निर्देशित किया गया है कि पुराने कानून की धारा 4 के  प्रकाशन के बाद नए कानून के लागू होने तक यदि अभिनिर्णय नहीं हुआ है तो प्रतिकर का निर्धारण नए कानून के तहत ही होगा। अर्थात इस एक्सप्रेस-वे में धारा 4 के प्रकाशन के वक्त प्रचलित सर्किल रेट का चार गुना प्रतिकर देय होगा।
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किसानों ने कहा कि वह एक्सप्रेस-वे के विरोधी नहीं हैं। वह तो सिर्फ विकल्प में उचित मुआवजा, पुनर्वास और नौकरी चाहते हैं। किसानों ने डीएम से मांग की कि बैनामा दे चुके किसानों को भी पुनर्वास का लाभ दिलाया जाए। खड़ी फसलों का नुकसान न किया जाए।


इस पर डीएम ने कार्यवाही का आश्वासन दिया। इस दौरान एडीएम ज्ञानेंद्र सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट ईश्वर चंद्र के अलावा किसान नेता मुकुट सिंह, नाथूराम यादव, लज्जाराम पाल, मुलायम सिंह, इंद्रनाथ सिंह, सरमन सिंह, रामौतार शाक्य, भारत सिंह, उदयवीर सिंह आदि किसान मौजूद रहे।

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