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राजेंद्र प्रसाद और नसीर खां ने बढ़ाया जिले का गौरव, सम्मानित करेंगे राष्ट्रपति
ब्यूरो/ अमर उजाला, इटावा
Updated Tue, 01 Sep 2015 11:57 PM IST
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पांच सितंबर शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जसवंतनगर स्थित हिंदू
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विद्यालय इंटर कालेज के प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद यादव और बढ़पुरा
स्थित जूनियर हाईस्कूल हरिदासपुरा के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक नसीर खां
को सम्मानित करेंगे। राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने की सूचना मिलते ही
बधाई देने वालों का तांता लग गया।
राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने वाले जसवंतनगर क्षेत्र के नगला बिचू के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद की पहचान एक अनुशासन प्रिय शिक्षक के रूप में है। पिछले 19 साल से विभिन्न कालेजों में प्रधानाचार्य पद पर रहे राजेंद्र प्रसाद यादव का जोर शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने और नकल विहीन परीक्षा कराने पर रहा।
जिले में स्काउट मास्टर के तौर पर चर्चित नसीर खां शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त करेंगे। हमेशा समय पर स्कूल आने और अपने दायित्व का निर्वहन करने वाले नसीर खां प्राइमरी शिक्षा की बदहाली से चिंतित हैं। वह मानते हैं कि यदि जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बच्चे यदि परिषदीय स्कूलों में पढ़ने आने लगें तो शिक्षा व्यवस्था में काफी सुधार संभव है।
वह बताते हैं कि आज शिक्षक के ऊपर शिक्षा से इतर कई कार्य थोप दिए जाते हैं। शैक्षिक गुणवत्ता की दिशा में यह एक बड़ी बाधा है। इसके साथ ही ऐसे कई शिक्षक हैं जो समय पर स्कूल नहीं पहुंचते। नसीर खां बेसिक शिक्षा विभाग में 3 फरवरी 1981 को उर्दू शिक्षक के तौर पर भर्ती हुए थे।
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राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने वाले जसवंतनगर क्षेत्र के नगला बिचू के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद की पहचान एक अनुशासन प्रिय शिक्षक के रूप में है। पिछले 19 साल से विभिन्न कालेजों में प्रधानाचार्य पद पर रहे राजेंद्र प्रसाद यादव का जोर शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने और नकल विहीन परीक्षा कराने पर रहा।
जिले में स्काउट मास्टर के तौर पर चर्चित नसीर खां शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त करेंगे। हमेशा समय पर स्कूल आने और अपने दायित्व का निर्वहन करने वाले नसीर खां प्राइमरी शिक्षा की बदहाली से चिंतित हैं। वह मानते हैं कि यदि जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बच्चे यदि परिषदीय स्कूलों में पढ़ने आने लगें तो शिक्षा व्यवस्था में काफी सुधार संभव है।
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वह बताते हैं कि आज शिक्षक के ऊपर शिक्षा से इतर कई कार्य थोप दिए जाते हैं। शैक्षिक गुणवत्ता की दिशा में यह एक बड़ी बाधा है। इसके साथ ही ऐसे कई शिक्षक हैं जो समय पर स्कूल नहीं पहुंचते। नसीर खां बेसिक शिक्षा विभाग में 3 फरवरी 1981 को उर्दू शिक्षक के तौर पर भर्ती हुए थे।
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