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मध्यप्रदेश के किसानों ने रोका क्वारी नदी का पानी, दर्जनों गांवों में संकट
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फोटो संख्या 05 सूखी पड़ी क्वारी नदी
- फोटो : ETAWHA
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सीमा से सटे मध्यप्रदेश के बैराड़ भीलपुर गांव के किसानों ने इस साल भी सिंचाई के लिए क्वारी नदी का पानी रोक दिया है। इसकी वजह से इस नदी से सटे बीहड़ के कई गांवों के पशुपालकों को पानी मिलना बंद हो गया है।
सिंचाई का साधन न होने से पड़ोसी राज्य के किसान हर साल नदी का पानी रोकते हैं जिसे लेकर अक्सर विवाद खड़ा होता है। इटावा प्रशासन इस समस्या को दूर करने के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है।
यहां सिंचाई का ठोस साधन न होने से रबी की फसलों की बुआई के साथ ही एमपी के शिवपुरी, बैराड़, भीलपुर से निकलने वाली क्वारी नदी विवाद का कारण बन जाती है।
भिंड के फूंफ, उमरी, पाड़री समेत कई गांवों के किसान सिंचाई के लिए नदी के पानी पर निर्भर होते हैं। वह हर साल बालू भरी बोरियों का बांध बनाकर नदी का पानी रोक देते हैं। पानी बढ़ने पर उनके खेतों की सिंचाई हो जाती है। लेकिन इससे इटावा के बीहड़ी इलाके के किसानों के सामने समस्या खड़ी हो जाती है।
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इस बार भी महीने भर पहले एमपी के किसानों ने पानी रोक दिया। इसकी वजह से पंचनद तक क्वारी नदी की जलधारा सूख गई। इस नदी के किनारे बसे बीहड़ के दर्जनों गांवों के पशुपालक जानवरों के पेयजल के लिए इसी नदी पर निर्भर हैं।
लिहाजा इन गांवों के पशुपालकों के सामने संकट खड़ा हो गया। यहां के किसानों का कहना है कि एसडीएम से शिकायत करके नदी का पानी खुलवाने की गुजारिश की गई, लेकिन प्रशासन ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। प्रशासनिक मदद नहीं मिली तो एमपी के किसान गर्मी तक पानी नहीं खोलेंगे। इससे आगे और बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
बीहड़ी क्षेत्र के गांव सिंडौस, जागरा, बिडौरी, ललूपुरा, चौरेला, लालघाटा, अजीत की गाढ़िया, जाहरपुरा, प्रतापपुरा, कुर्छा कुंवरपुरा, खोडन, सकतपुरा समेत दर्जनों गांवों के लिए क्वारी नदी ही सहारा है। यहां के किसान नदी के पानी से खेती-बाड़ी करने के साथ जानवरों के पेयजल के लिए नदी पर निर्भर हैं।
हर साल यह समस्या खड़ी होती है। पानी खुलवाने के लिए कई बार भिंड के किसानों से बातचीत करने का प्रयास किया गया। लेकिन वह अपनी सीमा में पहुंचने पर समस्या सुलझाने की बजाय विवाद करने पर आमादा हो जाते हैं।
- भानु प्रताप सिंह राजावत, ग्रामीण
क्वारी नदी के आसपास की जमीन असिंचित है। यहां बारिश का या नदी का पानी ही किसानों का सहारा है। नदी का पानी रोकने से थोड़ी बहुत पैदा होने वाली सरसों की फसल बर्बाद हो रही है।
- जीत बहादुर सिंह राजावत, किसान
मवेशियों के लिए पानी की समस्या खड़ी हो गई है। नदी के गड्ढों में भरे पानी से जानवरों का पानी पिला रहे हैं। आशंका सता रही है कि गर्मी में शायद पूरे बीहड़ में पानी नहीं मिलेगा।
- समर सिंह, किसान
कोट..
भिंड प्रशासन से करेंगे बात
जानवरों के लिए पानी की समस्या दूर करने के लिए मध्य प्रदेश के भिंड जिला प्रशासन से बात की जाएगी और नदी के पानी को खुलवाया जाएगा। सेंक्चुअरी के इस इलाके में तमाम तरह के जंगली जानवर भारी संख्या में विचरण करते हैं। उन्हें पानी की आवश्यकता है।
- हरि किशोर शुक्ला, वन क्षेत्राधिकारी सेंक्चुअरी
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सिंचाई का साधन न होने से पड़ोसी राज्य के किसान हर साल नदी का पानी रोकते हैं जिसे लेकर अक्सर विवाद खड़ा होता है। इटावा प्रशासन इस समस्या को दूर करने के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है।
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यहां सिंचाई का ठोस साधन न होने से रबी की फसलों की बुआई के साथ ही एमपी के शिवपुरी, बैराड़, भीलपुर से निकलने वाली क्वारी नदी विवाद का कारण बन जाती है।
भिंड के फूंफ, उमरी, पाड़री समेत कई गांवों के किसान सिंचाई के लिए नदी के पानी पर निर्भर होते हैं। वह हर साल बालू भरी बोरियों का बांध बनाकर नदी का पानी रोक देते हैं। पानी बढ़ने पर उनके खेतों की सिंचाई हो जाती है। लेकिन इससे इटावा के बीहड़ी इलाके के किसानों के सामने समस्या खड़ी हो जाती है।
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इस बार भी महीने भर पहले एमपी के किसानों ने पानी रोक दिया। इसकी वजह से पंचनद तक क्वारी नदी की जलधारा सूख गई। इस नदी के किनारे बसे बीहड़ के दर्जनों गांवों के पशुपालक जानवरों के पेयजल के लिए इसी नदी पर निर्भर हैं।
लिहाजा इन गांवों के पशुपालकों के सामने संकट खड़ा हो गया। यहां के किसानों का कहना है कि एसडीएम से शिकायत करके नदी का पानी खुलवाने की गुजारिश की गई, लेकिन प्रशासन ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। प्रशासनिक मदद नहीं मिली तो एमपी के किसान गर्मी तक पानी नहीं खोलेंगे। इससे आगे और बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
बीहड़ी क्षेत्र के गांव सिंडौस, जागरा, बिडौरी, ललूपुरा, चौरेला, लालघाटा, अजीत की गाढ़िया, जाहरपुरा, प्रतापपुरा, कुर्छा कुंवरपुरा, खोडन, सकतपुरा समेत दर्जनों गांवों के लिए क्वारी नदी ही सहारा है। यहां के किसान नदी के पानी से खेती-बाड़ी करने के साथ जानवरों के पेयजल के लिए नदी पर निर्भर हैं।
हर साल यह समस्या खड़ी होती है। पानी खुलवाने के लिए कई बार भिंड के किसानों से बातचीत करने का प्रयास किया गया। लेकिन वह अपनी सीमा में पहुंचने पर समस्या सुलझाने की बजाय विवाद करने पर आमादा हो जाते हैं।
- भानु प्रताप सिंह राजावत, ग्रामीण
क्वारी नदी के आसपास की जमीन असिंचित है। यहां बारिश का या नदी का पानी ही किसानों का सहारा है। नदी का पानी रोकने से थोड़ी बहुत पैदा होने वाली सरसों की फसल बर्बाद हो रही है।
- जीत बहादुर सिंह राजावत, किसान
मवेशियों के लिए पानी की समस्या खड़ी हो गई है। नदी के गड्ढों में भरे पानी से जानवरों का पानी पिला रहे हैं। आशंका सता रही है कि गर्मी में शायद पूरे बीहड़ में पानी नहीं मिलेगा।
- समर सिंह, किसान
कोट..
भिंड प्रशासन से करेंगे बात
जानवरों के लिए पानी की समस्या दूर करने के लिए मध्य प्रदेश के भिंड जिला प्रशासन से बात की जाएगी और नदी के पानी को खुलवाया जाएगा। सेंक्चुअरी के इस इलाके में तमाम तरह के जंगली जानवर भारी संख्या में विचरण करते हैं। उन्हें पानी की आवश्यकता है।
- हरि किशोर शुक्ला, वन क्षेत्राधिकारी सेंक्चुअरी