{"_id":"6cc7bb59889ba7fd4fe6cf68dc04f959","slug":"private-hospitals-will-be-probe-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्राइवेट अस्पतालों की होगी जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्राइवेट अस्पतालों की होगी जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Sat, 17 Jan 2015 12:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नार्मल डिलीवरी की संभावना के बाद भी भय दिखाकर भोले भाले लोगाें को लूटने वाले नर्सिंगहोम संचालकों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को नर्सिंगहोम में चल रही गतिविधियों का पता लगाने के लिए आदेशित कर दिया है।
विज्ञापन
यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी संज्ञान में आती है तो नर्सिंगहोम का लाइसेंस तक निरस्त किया जाएगा। सरकार से वेतन लेकर नर्सिंगहोम के लिए काम करने वाले कर्मचारियों को भी जांच में शामिल किया जाएगा। यदि कोई आशाबहू नर्सिंग होम के लिए काम करती पकड़ी गई तो पद से हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
विज्ञापन
जिले भर के नर्सिंगहोम में सीजर के नाम कमाई का खेल चल रहा है। सरकारी अस्पतालों में नार्मल डिलीवर में थोड़ी सी परेशानी आते ही नर्सिंगहोम के एजेंट सक्रिय हो जाते हैं। गर्भवती और उसके साथ आने वाले परिजनों को बेहतर सुविधाएं मिलने का सपना दिखाकर नर्सिंगहोम की ओर धकेल दिया जाता है।
विज्ञापन
नर्सिंग होम में सीजर केस करके मोटी कमाई की जाती है। बीते 9 माह में सरकारी अस्पतालों में 119 सीजर केस जबकि 20,176 नार्मल डिलीवरी हुईं। जबकि इसी अंतराल में अलग-अलग नर्सिंगहोम में 1318 सीजर तथा 1360 नार्मल प्रसव हुए। स्वास्थ्य विभाग से मिले ये आंकड़े नर्सिंग होम संचालकों की मनमानी को दर्शाने के लिए पर्याप्त हैं।
अमर उजाला ने इस पूरे मामले की पड़ताल करते 15 और 16 जनवरी को खबरें प्रकाशित कीं। खबरें प्रकाशित होने के बाद डीएम ने इस पूरे मामले को संज्ञान में लिया। उन्होंने सीएमओ डॉ. उदयवीर सिंह को जांच के निर्देश दिए हैं। सीजर के नाम पर चल रहे धंधे की तह में जाने के लिए सभी बिंदुओं पर जांच की जाएगी।
जांच में नर्सिंगहोम में चल रही गतिविधियों को जांचा जाएगा। देखा जाएगा कि कोई नर्सिंगहोम लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करते हुए तो संचालित नहीं किया जा रहा है। जिन महिलाओं के सीजर किए जा रहे हैं उनकी केस हिस्ट्री भी देखी जाएगी। संबंधित महिला से भी जानकारी ली जा सकती है।
यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित नर्सिंग होम का लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है। सरकारी अस्पतालों में काम करने वाली नर्सों या गांव की आशाबहुआें की भूमिका पर संदेह हुआ तो उन्हें भी जांच में शामिल करने के लिए कहा गया है।
यदि किसी सरकारी नर्स या डॉक्टर से नर्सिंगहोम के संबंध उजागर होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। आशाबहू की तो छुट्टी तक कर देने के लिए कहा गया है। सरकारी अस्पताल में भर्ती होने के बाद यदि कोई प्रसूता नर्सिंगहोम में जाती है तो संबंधित डॉक्टर से जवाब तलब किया जा सकता है।
कुल मिलाकर जिला प्रशासन ने नार्मल की संभावना के बाद भी सीजर कर देने वाले नर्सिंगहोम की गतिविधियों को गंभीरता से लिया है। यदि स्वास्थ्य विभाग ने ईमानदारी से जांच की तो प्राइवेट अस्पतालों की कलई खुल जाएगी। इससे गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
वास्तव में यदि ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर मामला है। स्वास्थ्य विभाग को नर्सिंगहोम में चल रही गतिविधियों की संपूर्ण जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है तो नर्सिंगहोम का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों, आशा बहुआें या एंबुलेंस चालकों की गतिविधियों को भी जांच में शामिल करने के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को छोड़ा नही जाएगा।- डॉ. नितिन बंसल, जिलाधिकारी इटावा
डीएम साहब की ओर से नर्सिंगहोम की जांच करने के लिए निर्देशित किया गया है। सरकारी अस्पताल में काम करने वाले स्टाफ, आशा बहुओं पर नजर रखी जाएगी। ऐसा एक भी प्रकरण सामने आता है तो कार्रवाई होगी। सरकारी में कम नर्सिंग होम में ज्यादा सीजर होने के पीछे के कारणों को जानने का प्रयास किया जा रहा है।- डॉ. उदयवीर सिंह, सीएमओ, इटावा