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प्रधानों ने मांगे वित्तीय अधिकार
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महेवा। राष्ट्रीय ग्राम पंचायत संगठन के जिलाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह सेंगर ने ग्राम प्रधानों की समस्याओं को जिलाधिकारी से मिलकर शीघ्र ही समाधान कराने की बात कहते हुए विकास कार्यों को संपन्न कराने के लिए वित्तीय अधिकार देने की मांग की है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि जनपद के आठों ब्लॉकों के कई प्रधान सचिवों की कार्यशैली से परेशान हैं। वहीं सचिव गांवों में समय भी नहीं दे रहे, जिससे परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
वहीं, जनपद के कुछ सचिव प्रधानों से 20 से 50 प्रतिशत तक कमीशन मांग रहे हैं। इन सभी समस्याओं को जिलाधिकारी के समक्ष उठाया जाएगा। समाधान न होने पर आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
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जिला उपाध्यक्ष सोमहरी अवस्थी ने कहा कि सबसे अधिक कमीशन खोरी तो गृह ब्लॉक महेवा में ही व्याप्त है। बड़े अफसरों को अवगत कराने के बावजूद भी कोई हल नहीं निकला, तो वह त्यागपत्र देने को तैयार हैं।
बम्होरा के प्रधान हरगोविंद पाल ने प्रधानों का मानदेय कम से कम 15 हजार करने की शासन से मांग की। पांच लाख तक के कार्य प्रधान और सचिव को कराने की अनुमति हो और दस लाख तक के कार्य ब्लॉक स्तर से और इसके ऊपर के कार्य जिला स्तर से पारित हों।
प्रधान उझियानी देवेंद्र दोहरे ने कहा कि कुछ नाम मात्र के सचिव ऐसे हैं जो हठधर्मी कर रहे हैं। प्रधानों का कम से कम दो लाख रुपये वार्षिक विवेकाधीन कोष होना चाहिए, जिसे वह अकाल मौत, अग्निकांड, दिव्यांग आदि की सेवा में प्रयोग कर सकें।
इस मौके पर लालमणि दुबे, अमित भदौरिया, सुरजन सिंह पाल, नंदू पाल, अमित मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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जिलाध्यक्ष ने कहा कि जनपद के आठों ब्लॉकों के कई प्रधान सचिवों की कार्यशैली से परेशान हैं। वहीं सचिव गांवों में समय भी नहीं दे रहे, जिससे परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
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वहीं, जनपद के कुछ सचिव प्रधानों से 20 से 50 प्रतिशत तक कमीशन मांग रहे हैं। इन सभी समस्याओं को जिलाधिकारी के समक्ष उठाया जाएगा। समाधान न होने पर आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
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जिला उपाध्यक्ष सोमहरी अवस्थी ने कहा कि सबसे अधिक कमीशन खोरी तो गृह ब्लॉक महेवा में ही व्याप्त है। बड़े अफसरों को अवगत कराने के बावजूद भी कोई हल नहीं निकला, तो वह त्यागपत्र देने को तैयार हैं।
बम्होरा के प्रधान हरगोविंद पाल ने प्रधानों का मानदेय कम से कम 15 हजार करने की शासन से मांग की। पांच लाख तक के कार्य प्रधान और सचिव को कराने की अनुमति हो और दस लाख तक के कार्य ब्लॉक स्तर से और इसके ऊपर के कार्य जिला स्तर से पारित हों।
प्रधान उझियानी देवेंद्र दोहरे ने कहा कि कुछ नाम मात्र के सचिव ऐसे हैं जो हठधर्मी कर रहे हैं। प्रधानों का कम से कम दो लाख रुपये वार्षिक विवेकाधीन कोष होना चाहिए, जिसे वह अकाल मौत, अग्निकांड, दिव्यांग आदि की सेवा में प्रयोग कर सकें।
इस मौके पर लालमणि दुबे, अमित भदौरिया, सुरजन सिंह पाल, नंदू पाल, अमित मिश्रा आदि मौजूद रहे।