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प्राकृतवास समाप्त होने से दुर्लभ हो रहे सारस
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Tue, 09 Feb 2016 11:33 PM IST
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सारस संरक्षण समिति के तत्वावधान में सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर एवं सामाजिक वानिकी प्रभाग इटावा की ओर से ताखा ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमथरी एवं समथर में सारसों एवं तालाबों के संरक्षण के प्रति बच्चों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रधानाचार्य रामनाथ ने कहा कि सारस हमारे बीच नदी तालाब व झीलों के आसपास पाया जाने वाला सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी है और विश्व में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में पाया जाता है। अपने प्राकृतिक वास के समाप्त होने के कारण यह दुर्लभ होता जा रहा है।
ग्रामीण परिवेश में रहने वाले बच्चे इनके संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं । कार्यक्रम समन्वयक भूपेंद्र भदौरिया ने फिल्म सारस का आखिरी आशियाना के माध्यम से सारस के साथ साथ अन्य पक्षियों के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि इस समय सारसों के स्वयंवर रचाने का समय चल रहा है इसलिए तालाबों में बड़ी संख्या में सारस देखे जा सकते हैं।
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प्रधानाचार्य रफीक मोहम्मद ने कहा कि लोग मछली मारने के लालच में तालाबों का पानी निकाल कर तालाबों को सुखा देते हैं, ऐसी स्थिति में वन्यजीवों के लिए पानी नहीं रहता। स्कॉन पदाधिकारी संजीव सिंह चौहान ने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व सारस हमारे यहॉ बहुतायात में पाए जाते थे ।
लेकिन हमारी थोड़ी सी लापरवाही ने उन्हें समाप्ति के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया, अभी भी समय है यदि हम सब मिलकर प्रयास करें तो सारसों को उनके प्राकृतवास में बचा पाएंगे। इस मौके पर ब्रजेश यादव, अनिल कुमार दुबे, अजय कश्यप, रीता शर्मा, सीमा, विकास यादव, अजय कुमार मिश्रा, अभिनेंद्र सिंह व विनय कुमार आदि मौजूद रहे।
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जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रधानाचार्य रामनाथ ने कहा कि सारस हमारे बीच नदी तालाब व झीलों के आसपास पाया जाने वाला सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी है और विश्व में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में पाया जाता है। अपने प्राकृतिक वास के समाप्त होने के कारण यह दुर्लभ होता जा रहा है।
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ग्रामीण परिवेश में रहने वाले बच्चे इनके संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं । कार्यक्रम समन्वयक भूपेंद्र भदौरिया ने फिल्म सारस का आखिरी आशियाना के माध्यम से सारस के साथ साथ अन्य पक्षियों के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि इस समय सारसों के स्वयंवर रचाने का समय चल रहा है इसलिए तालाबों में बड़ी संख्या में सारस देखे जा सकते हैं।
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प्रधानाचार्य रफीक मोहम्मद ने कहा कि लोग मछली मारने के लालच में तालाबों का पानी निकाल कर तालाबों को सुखा देते हैं, ऐसी स्थिति में वन्यजीवों के लिए पानी नहीं रहता। स्कॉन पदाधिकारी संजीव सिंह चौहान ने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व सारस हमारे यहॉ बहुतायात में पाए जाते थे ।
लेकिन हमारी थोड़ी सी लापरवाही ने उन्हें समाप्ति के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया, अभी भी समय है यदि हम सब मिलकर प्रयास करें तो सारसों को उनके प्राकृतवास में बचा पाएंगे। इस मौके पर ब्रजेश यादव, अनिल कुमार दुबे, अजय कश्यप, रीता शर्मा, सीमा, विकास यादव, अजय कुमार मिश्रा, अभिनेंद्र सिंह व विनय कुमार आदि मौजूद रहे।