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चौंकाने वाले हो सकते हैं चुनावी नतीजे
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इटावा। तीनों विधानसभा क्षेत्रों में 60.92 प्रतिशत मत पड़े हैं। इटावा और जसवंतनगर में मतदान प्रतिशत बढ़ा है। भरथना सीट पर पिछले विधानसभा चुनावों के मुकाबले कम वोट पड़े हैं। माना जा रहा है कि इस बार चुनावी नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो जसवंतनगर में 63.53, इटावा में 57.75 और भरथना में 58.97 फीसदी मतदान हुआ था। जिले के मतदान का औसत 60.08 प्रतिशत रहा था। अब 2022 के विधानसभा चुनाव पर गौर करें तो पूरे जिले के औसत में केवल .84 प्रतिशत की वृद्घि वोटिंग में हुई है। जसवंतनगर और इटावा में तो मतदाताओं का उत्साह दिखा परंतु भरथना में अपेक्षाकृत उत्साह कम दिखा। इस चुनाव में जसवंतनगर में 64.63, इटावा में 60.10 और भरथना में 58.04 प्रतिशत मतदान हुआ।
वर्ष 2017 के मुकाबले इस चुनाव में इटावा विधानसभा क्षेत्र के मतदान प्रतिशत में 2.35 बढ़ोत्तरी हुई है। यहां भाजपा से सरिता भदौरिया, सपा से सर्वेश शाक्य, बसपा से कुलदीप गुप्ता संटू और कांग्रेस से राशिद खान मुख्य उम्मीदवार थे। त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी इस सीट पर बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत बहुत मायने रखता है। इसको लेकर सभी राजनीतिक दल अपना-अपना गणित लगा रहे हैं।
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जसवंतनगर में इस बार 1.1 प्रतिशत अधिक वोट पड़े। यहां सपा के शिवपाल सिंह यादव, भाजपा के विवेक शाक्य और बसपा के बीपी सिंह के बीच मुकाबला हुआ। हालांकि यह सीट सपा के लिए अभेद्य है। फिर भी बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत किसका वोट बैंक बढ़ाएगा यह आगे देखने और समझने का विषय होगा।
भरथना सुरक्षित सीट पर आशा के विपरीत मतदान प्रतिशत आंशिक रूप से घटा। पिछले चुनाव के मुकाबले भरथना में .93 प्रतिशत वोट कम पड़ा। इससे प्रत्याशियों में बैचेनी बढ़ी है। यहां भाजपा से सिद्घार्थ शंकर, सपा से राघवेंद्र गौतम, बसपा से कमलेश अंबेडकर और कांग्रेस से स्नेहलता दोहरे मैदान में थी। मतदाता की उदासीनता का खामियाजा किसको भुगतना पड़ेगा। यह तो आने वाले समय में ही पता चल सकेगा।
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वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो जसवंतनगर में 63.53, इटावा में 57.75 और भरथना में 58.97 फीसदी मतदान हुआ था। जिले के मतदान का औसत 60.08 प्रतिशत रहा था। अब 2022 के विधानसभा चुनाव पर गौर करें तो पूरे जिले के औसत में केवल .84 प्रतिशत की वृद्घि वोटिंग में हुई है। जसवंतनगर और इटावा में तो मतदाताओं का उत्साह दिखा परंतु भरथना में अपेक्षाकृत उत्साह कम दिखा। इस चुनाव में जसवंतनगर में 64.63, इटावा में 60.10 और भरथना में 58.04 प्रतिशत मतदान हुआ।
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वर्ष 2017 के मुकाबले इस चुनाव में इटावा विधानसभा क्षेत्र के मतदान प्रतिशत में 2.35 बढ़ोत्तरी हुई है। यहां भाजपा से सरिता भदौरिया, सपा से सर्वेश शाक्य, बसपा से कुलदीप गुप्ता संटू और कांग्रेस से राशिद खान मुख्य उम्मीदवार थे। त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी इस सीट पर बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत बहुत मायने रखता है। इसको लेकर सभी राजनीतिक दल अपना-अपना गणित लगा रहे हैं।
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जसवंतनगर में इस बार 1.1 प्रतिशत अधिक वोट पड़े। यहां सपा के शिवपाल सिंह यादव, भाजपा के विवेक शाक्य और बसपा के बीपी सिंह के बीच मुकाबला हुआ। हालांकि यह सीट सपा के लिए अभेद्य है। फिर भी बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत किसका वोट बैंक बढ़ाएगा यह आगे देखने और समझने का विषय होगा।
भरथना सुरक्षित सीट पर आशा के विपरीत मतदान प्रतिशत आंशिक रूप से घटा। पिछले चुनाव के मुकाबले भरथना में .93 प्रतिशत वोट कम पड़ा। इससे प्रत्याशियों में बैचेनी बढ़ी है। यहां भाजपा से सिद्घार्थ शंकर, सपा से राघवेंद्र गौतम, बसपा से कमलेश अंबेडकर और कांग्रेस से स्नेहलता दोहरे मैदान में थी। मतदाता की उदासीनता का खामियाजा किसको भुगतना पड़ेगा। यह तो आने वाले समय में ही पता चल सकेगा।