{"_id":"6202b28ed050013865732cd4","slug":"political-etawah-news-knp679586510","type":"story","status":"publish","title_hn":"बागियों ने बिछाए सपा की राह में रोड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बागियों ने बिछाए सपा की राह में रोड़े
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटावा। मैनपुरी-इटावा और आसपास के जिलों को सपा का गढ़ माना जाता है। इन जिलों में सपा के न सिर्फ यादव बल्कि अन्य जातियों के लोग भी इसके वोटर रहे हैं। इसी वजह से सपा इस क्षेत्र में लगातार अच्छा प्रदर्शन करती आई है। इस बार विधानसभा चुनाव में सपा के बागी नेताओं ने सपा की राहें कठिन कर दी हैं।
जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं। इसमें जसवंतनगर से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव को सपा से प्रत्याशी घोषित किया गया था। स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा छोड़ने के बाद शिवपाल सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले मनीष पतरे ने भी भाजपा छोड़ सपा का दामन थाम लिया था। मनीष के भाजपा छोड़ने के बाद लग रहा था कि सपा की राहें आसान हो गईं हैं, लेकिन इटावा सदर और भरथना सीट पर टिकट को लेकर काफी जद्दोजहद चल रही थी। इटावा सदर से प्रसपा के महामंत्री रघुराज सिंह शाक्य, पिछला विधानसभा चुनाव लड़े कुलदीप गुप्ता संटू, हरिकिशोर तिवारी और शिवप्रताप राजपूत टिकट के दावेदार माने जा रहे थे। भरथना में बसपा से आए राघवेंद्र कुमार सिंह को सपा ने प्रत्याशी बनाया, जबकि इसी सीट पर 2017 में चुनाव लड़ने वाले कमलेश कठेरिया भी दावेदार थे। कमलेश ने पिछले चुनाव में भाजपा की विजयी उम्मीदवार सावित्री कठेरिया को कड़ी टक्कर दी थी।
इटावा सदर में सपा ने पूर्व सांसद राम सिंह शाक्य के बेटे सर्वेश शाक्य को टिकट दिया है। सर्वेश शाक्य को टिकट मिलने के बाद बगावत के सुर मुखर हो गए। सबसे पहले बगावत का झंडा पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कुलदीप गुप्ता संटू ने बुलंद किया। उन्होंने सपा छोड़ दी और बसपा के हाथी पर सवार हो गए। बसपा ने उन्हें अगले दिन ही इटावा सदर से प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसके बाद भाजपा ने जातीय छत्रपों को समेटने का पैंतरा खेलना शुरू किया। एक के बाद एक सपा के कई नेता भगवाधारी हो गए। शिवप्रताप राजपूत, कृष्णमुरारी गुप्ता और सबसे अहम इटावा से दो बार सांसद और एक बार विधायक रहे रघुराज सिंह शाक्य भी भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस के नेता एडवोकेट प्रेमशंकर शर्मा ने भी भाजपा का दामन थाम लिया।
विज्ञापन
जिले में जातीय गणित काफी उलझ गया है। यहां लोधी और शाक्य वोट काफी निर्णायक माना जाता है। इनमें रघुराज शाक्य और शिवप्रताप राजपूत की ठीक-ठाक पैठ मानी जाती है। भाजपा ने इन नेताओं को अपने खेमे में करके एक मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने का संदेश दिया है। हालांकि अभी मतदान में दो हफ्ते का समय है। ऐसी स्थिति में अभी सपा की रणनीति पर लोगों की नजरें लगीं हुईं हैं।
विज्ञापन
जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं। इसमें जसवंतनगर से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव को सपा से प्रत्याशी घोषित किया गया था। स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा छोड़ने के बाद शिवपाल सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले मनीष पतरे ने भी भाजपा छोड़ सपा का दामन थाम लिया था। मनीष के भाजपा छोड़ने के बाद लग रहा था कि सपा की राहें आसान हो गईं हैं, लेकिन इटावा सदर और भरथना सीट पर टिकट को लेकर काफी जद्दोजहद चल रही थी। इटावा सदर से प्रसपा के महामंत्री रघुराज सिंह शाक्य, पिछला विधानसभा चुनाव लड़े कुलदीप गुप्ता संटू, हरिकिशोर तिवारी और शिवप्रताप राजपूत टिकट के दावेदार माने जा रहे थे। भरथना में बसपा से आए राघवेंद्र कुमार सिंह को सपा ने प्रत्याशी बनाया, जबकि इसी सीट पर 2017 में चुनाव लड़ने वाले कमलेश कठेरिया भी दावेदार थे। कमलेश ने पिछले चुनाव में भाजपा की विजयी उम्मीदवार सावित्री कठेरिया को कड़ी टक्कर दी थी।
विज्ञापन
इटावा सदर में सपा ने पूर्व सांसद राम सिंह शाक्य के बेटे सर्वेश शाक्य को टिकट दिया है। सर्वेश शाक्य को टिकट मिलने के बाद बगावत के सुर मुखर हो गए। सबसे पहले बगावत का झंडा पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कुलदीप गुप्ता संटू ने बुलंद किया। उन्होंने सपा छोड़ दी और बसपा के हाथी पर सवार हो गए। बसपा ने उन्हें अगले दिन ही इटावा सदर से प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसके बाद भाजपा ने जातीय छत्रपों को समेटने का पैंतरा खेलना शुरू किया। एक के बाद एक सपा के कई नेता भगवाधारी हो गए। शिवप्रताप राजपूत, कृष्णमुरारी गुप्ता और सबसे अहम इटावा से दो बार सांसद और एक बार विधायक रहे रघुराज सिंह शाक्य भी भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस के नेता एडवोकेट प्रेमशंकर शर्मा ने भी भाजपा का दामन थाम लिया।
विज्ञापन
जिले में जातीय गणित काफी उलझ गया है। यहां लोधी और शाक्य वोट काफी निर्णायक माना जाता है। इनमें रघुराज शाक्य और शिवप्रताप राजपूत की ठीक-ठाक पैठ मानी जाती है। भाजपा ने इन नेताओं को अपने खेमे में करके एक मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने का संदेश दिया है। हालांकि अभी मतदान में दो हफ्ते का समय है। ऐसी स्थिति में अभी सपा की रणनीति पर लोगों की नजरें लगीं हुईं हैं।