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प्वाइंट्स न होने से गलियों की बिगड़ रही सूरत

Fri, 13 May 2016 12:19 AM IST
अमर उजाला, इटावा
अमर उजाला, इटावा Updated Fri, 13 May 2016 12:19 AM IST
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Points are not deteriorating lanes Appearance
पेयजल कनेक्शन से खराब हुई गली - फोटो : अमर उजाला
सवा अरब रुपये की पेयजल योजना में बरती गई अदूरदर्शिता अब परेशानी का सबब बन रही है। इसकी सप्लाई लाइन में डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट्स नहीं बनाए गए हैं। अब जब लोग धड़ाधड़ कनेक्शन ले रहे हैं तो बनी बनाई गलियों की सूरत बिगड़ रही है। इस पेयजल योजना में डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट्स प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन एस्टीमेट में इन्हें शामिल नहीं किया गया। इसका खामियाजा अब सामने दिख रहा है।
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शहर की पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 123 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए थे। इतनी बड़ी धनराशि पानी की व्यवस्था के लिए खर्च की गई, जिसमें पानी की टंकियों से लेकर नए ट्यूबवैल स्थापित कराए गए। लाइनपार क्षेत्र समेत शहर के अंदर 250 किमी लंबी पाइप लाइन भी बिछाई गई है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट्स नहीं बनाए गए।
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कार्यदाई संस्था जलनिगम की निर्माण इकाई ने इन डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट्स को लेकर गंभीरता नहीं बरती, जबकि योजना के प्रस्ताव में डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट्स शामिल किए गए थे, जिसमें कहा गया था कि हर 50 मीटर के दायरे में सप्लाई लाइन पर एक साथ 10-15 प्वाइंट्स बनाए जाएंगे, जिससे लोगों को कनेक्शन लेने के लिए गली या सड़क खोदने की जरूरत नहीं रहती, लेकिन बाद में योजना के एस्टीमेट से डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट्स को हटा दिया गया।
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अब जबकि योजना कंपलीट होने की स्थिति में है। ज्यादातर सप्लाई लाइन में टेस्टिंग के तौर पर सुबह-शाम पानी छोड़ा जाने लगा है। इसे देखकर लोग इस नई सप्लाई लाइन से धड़ाधड़ कनेक्शन ले रहे हैं, जो गलियां हाल ही में इंटरलॉकिंग ईंट से तैयार हुई थी। इन कनेक्शनों के चलते उनकी हालत बिगड़ने लगी है।


 
इस संबंध में कार्यदाई संस्था के एक्सईएन एमपी सिंह का कहना रहा कि डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट्स बनाने को लेकर योजना के शुरुआत में ही तत्कालीन अधिकारियों ने निर्णय लिया होगा। चूंकि पेयजल योजना के एस्टीमेट में डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट्स बनाना शामिल नहीं है। इसलिए यह प्वाइंट्स अब तभी बनाए जा सकते हैं। जब इसके लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध हो।
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