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Etawah News: डॉल्फिन की अठखेलियां, घड़ियालों का संसार... बीहड़ में होंगे दीदार
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चकरनगर। चंबल के बीहड़ों में अब कुदरत का अनोखा संसार दिखेगा। सहसों स्थित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में डॉल्फिन संरक्षण और पर्यावरण-पर्यटन विकसित किया जा रहा है। नवंबर में डॉल्फिन सफारी शुरू करने की योजना है।
इसके लिए रविवार को नदी में दो मोटर नाव पहुंच गईं। पर्यटकों की सुविधा के लिए अगले माह जलपान गृह भी खुलेगा। इससे चंबल घाटी को पर्यटन का नया केंद्र बनने और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। चंबल नदी का प्राकृतिक वातावरण घड़ियाल, डॉल्फिन, कछुओं और विभिन्न पक्षियों के लिए अनुकूल है। तत्कालीन डीएफओ आगरा आरुषि मिश्रा ने जून 2023 में डॉल्फिन सफारी का प्रस्ताव भेजा था। शासन ने इसे स्वीकार कर लिया है।
परियोजना के तहत नदी के 20 किलोमीटर हिस्से को डॉल्फिन संरक्षण और पर्यटकों के भ्रमण के लिए विकसित किया जाएगा। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए मोटर नावों के साथ जीवन रक्षक जैकेट की व्यवस्था होगी। डॉल्फिन की गतिविधियों को करीब से देखने के लिए निगरानी मीनारों पर दूरबीन और स्पॉट स्कोप लगाए जाएंगे। इससे पर्यटकों को नदी के प्राकृतिक जीवन को समझने का अवसर मिलेगा।
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टिकट काउंटर से पार्किंग तक की होगी व्यवस्था
सफारी क्षेत्र में पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्रवेश द्वार के पास टिकट बुकिंग काउंटर, पार्किंग और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। इसके अलावा सूचना पट्ट और होर्डिंग के माध्यम से डॉल्फिन तथा अन्य जलीय जीवों के बारे में जानकारी दी जाएगी। पर्यटकों को वन्यजीवों के बारे में समझाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती का भी प्रस्ताव है। फिलहाल मोटरबोट पहुंच गई हैं और अगले माह कैंटीन खोलने की तैयारी की जा रही है।
नवंबर से चंबल में दिखेंगे विदेशी मेहमान
अक्तूबर-नवंबर से साइबेरिया, चीन, मंगोलिया और मध्य एशिया के ठंडे क्षेत्रों से प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू होता है। ये पक्षी सर्दियों के दौरान यहां प्रवास करते हैं और मौसम गर्म होने पर अपने मूल क्षेत्रों की ओर लौट जाते हैं। ऐसे में नवंबर में डॉल्फिन सफारी शुरू करने की तैयारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डॉल्फिन, घड़ियाल और प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
डकैतों के इतिहास से आगे बढ़ेगी चंबल की पहचान
1979 में स्थापित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य राजस्थान और मध्य प्रदेश तक फैला है। यहां घड़ियालों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक प्रजनन के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। चंबल की जैव विविधता और नदी का प्राकृतिक परिवेश इसे वन्यजीव पर्यटन के लिहाज से खास बनाते हैं। डॉल्फिन सफारी विकसित होने से चंबल घाटी की पहचान केवल बीहड़ों और डकैतों के इतिहास तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर सकती है।
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आंकड़ों की बात
क्रसं गणना वर्ष घडियाल मगरमच्छ डॉल्फिन
1 2021-22 692 155 57
2 2022-23 747 194 130
3 2023-24 828 264 187
4 2024-25 1019 390 195
5 2025-26 979 250 148
6 2025-26 1089 398 191
वर्जन
डॉल्फिन सफारी के लिए प्रोजेक्ट भेजा गया था। उसी के तहत मोटरबोट आई हैं। नवंबर में इसकी ओपनिंग हो सके, इसके लिए अभी से तैयारी की जा रही है। डॉल्फिन सफारी बड़ा प्रोजेक्ट है, इसे विकसित करने में समय लगेगा। सफारी बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।-कोटेश त्यागी, रेंजर, राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, चकरनगर
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इसके लिए रविवार को नदी में दो मोटर नाव पहुंच गईं। पर्यटकों की सुविधा के लिए अगले माह जलपान गृह भी खुलेगा। इससे चंबल घाटी को पर्यटन का नया केंद्र बनने और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। चंबल नदी का प्राकृतिक वातावरण घड़ियाल, डॉल्फिन, कछुओं और विभिन्न पक्षियों के लिए अनुकूल है। तत्कालीन डीएफओ आगरा आरुषि मिश्रा ने जून 2023 में डॉल्फिन सफारी का प्रस्ताव भेजा था। शासन ने इसे स्वीकार कर लिया है।
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परियोजना के तहत नदी के 20 किलोमीटर हिस्से को डॉल्फिन संरक्षण और पर्यटकों के भ्रमण के लिए विकसित किया जाएगा। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए मोटर नावों के साथ जीवन रक्षक जैकेट की व्यवस्था होगी। डॉल्फिन की गतिविधियों को करीब से देखने के लिए निगरानी मीनारों पर दूरबीन और स्पॉट स्कोप लगाए जाएंगे। इससे पर्यटकों को नदी के प्राकृतिक जीवन को समझने का अवसर मिलेगा।
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टिकट काउंटर से पार्किंग तक की होगी व्यवस्था
सफारी क्षेत्र में पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्रवेश द्वार के पास टिकट बुकिंग काउंटर, पार्किंग और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। इसके अलावा सूचना पट्ट और होर्डिंग के माध्यम से डॉल्फिन तथा अन्य जलीय जीवों के बारे में जानकारी दी जाएगी। पर्यटकों को वन्यजीवों के बारे में समझाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती का भी प्रस्ताव है। फिलहाल मोटरबोट पहुंच गई हैं और अगले माह कैंटीन खोलने की तैयारी की जा रही है।
नवंबर से चंबल में दिखेंगे विदेशी मेहमान
अक्तूबर-नवंबर से साइबेरिया, चीन, मंगोलिया और मध्य एशिया के ठंडे क्षेत्रों से प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू होता है। ये पक्षी सर्दियों के दौरान यहां प्रवास करते हैं और मौसम गर्म होने पर अपने मूल क्षेत्रों की ओर लौट जाते हैं। ऐसे में नवंबर में डॉल्फिन सफारी शुरू करने की तैयारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डॉल्फिन, घड़ियाल और प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
डकैतों के इतिहास से आगे बढ़ेगी चंबल की पहचान
1979 में स्थापित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य राजस्थान और मध्य प्रदेश तक फैला है। यहां घड़ियालों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक प्रजनन के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। चंबल की जैव विविधता और नदी का प्राकृतिक परिवेश इसे वन्यजीव पर्यटन के लिहाज से खास बनाते हैं। डॉल्फिन सफारी विकसित होने से चंबल घाटी की पहचान केवल बीहड़ों और डकैतों के इतिहास तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर सकती है।
आंकड़ों की बात
क्रसं गणना वर्ष घडियाल मगरमच्छ डॉल्फिन
1 2021-22 692 155 57
2 2022-23 747 194 130
3 2023-24 828 264 187
4 2024-25 1019 390 195
5 2025-26 979 250 148
6 2025-26 1089 398 191
वर्जन
डॉल्फिन सफारी के लिए प्रोजेक्ट भेजा गया था। उसी के तहत मोटरबोट आई हैं। नवंबर में इसकी ओपनिंग हो सके, इसके लिए अभी से तैयारी की जा रही है। डॉल्फिन सफारी बड़ा प्रोजेक्ट है, इसे विकसित करने में समय लगेगा। सफारी बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।-कोटेश त्यागी, रेंजर, राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, चकरनगर