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बदलते मौसम में बढ़े मरीज, एक दिन में 12 सौ ओपीडी
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Sat, 20 May 2017 11:45 PM IST
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मरीजों की कतार।
- फोटो : अमर उजाला
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पिछले एक सप्ताह में कई बार मौसम बदलने से शहर में मरीजों की बाढ़ आ गई है। मौसम के इस उलटफे र में कोई डायरिया का शिकार हो रहा है तो कोई जुकाम-बुखार और वायरल फीवर का। जिला अस्पताल में ही प्रतिदिन हजार से 15 सौ तक मरीज ओपीडी के लिए पहुंच रहे हैं। जबकि दूसरी ओर प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीजों की भरमार है। ऐसे में जिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है।
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गत सोमवार को शहर का तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वहीं मंगलवार को तापमान गिर कर 42 डिग्री हो गया। शुक्रवार को अचानक मौसम फिर बिगड़ा और बारिश के बाद पारा तीन डिग्री और गिरकर 39 डिग्री हो गया। शनिवार को मौसम ने फिर करवट ली और अधिकतम तापमान बढ़कर 41 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम 29 डिग्री हो गया। मौसम में रोज हो रहे बदलाव से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। डायरिया और जुकाम बुखार ने लोगों के शरीर को तोड़ दिया है। वहीं लोग वायरल फीवर का शिकार भी हो रहे हैं। जिला अस्पताल में सुबह से ही मरीजों क ी कतारें लग जाती हैं। जहां सामान्य तौर से अस्पताल में प्रतिदिन आठ सौ से नौ सौ मरीजों की ओपीडी होती थी वहीं एक सप्ताह से ये आंकड़ा हजार को पार कर गया है।
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साफ पानी का प्रयोग करें
इटावा। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा. बीके साहू का कहना है कि मौसमी बीमारियों से बचने के सबसे ज्यादा जरूरी है स्वच्छ पानी सेवन करना। ज्यादातर बीमारियाें के वायरस पानी के माध्यम से ही शरीर में प्रवेश करते हैं। पानी को उबालकर पीने से बीमारियों से बचा जा सकता है। बाहर की बर्फ का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसे तैयार करने में सफाई का ध्यान नहीं दिया जाता और इससे व्यक्ति जल्द ही बीमार हो जाता है। इसके अलावा सर्दी गर्मी से बचाव रखना चाहिए। तेज धूप से तुरंत एसी कूलर के सामने नहीं जाना चाहिए और न धूप से आकर तुरंत ही ठंडा पानी पीना चाहिए। बासी भोजन से परहेज रखें। दिन में कम से कम 4 से 5 लीटर तक पानी पीना चाहिए।
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अस्पताल में सिर्फ दो फिजीशियन, सांस लेने की फुर्सत नहीं
इटावा। जिला अस्पताल में जहां एक ओर मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, वहीं दूसरी ओर फिजीशियन सिर्फ दो डॉ बीके साहू और संतोष कुमार हैं। इनमें भी डा. संतोष चेस्ट फिजीशियान हैं। यही कारण है कि इन दोनों ही डाक्टरों को सुबह ड्यूटी शुरू होने से पूरी होने तक सांस लेने की भी फुर्सत नहीं मिलती है। अस्पताल में भर्ती होेने वाले 30 से 40 मरीजों को वार्ड में देखने में ही सुबह का ज्यादातर समय निकल जाता है। इसके बाद जब ओपीडी शुरू होती है तो भीड़ अधिक होने से मरीजों को डाक्टर से इलाज लेने के लिए घंटों कतार में खडे़ होकर इंतजार करना पड़ता है।
एक सप्ताह में अस्पताल की ओपीडी का आंकड़ा
दिन ओपीडी में मरीजों की संख्या
19 मई 1107
18 मई 1126
17 मई 1245
16 मई 1159
15 मई 1452
14 मई रविवार
13 मई 816
12 मई 1176