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संपर्क क्रांति में यात्री की मौत

Fri, 14 Apr 2017 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इटावा
अमर उजाला ब्यूरो/इटावा Updated Fri, 14 Apr 2017 11:21 PM IST
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Passenger death in sampark kraanti
ट्रेन में मरे यात्री के शव को एंबुलेंस से ले जाते उसके परिजन - फोटो : अमर उजाला

इटावा। नई दिल्ली से बिहार जा रही संपर्क क्रांति में गुरुवार की शाम को यात्रा कर रहे एक यात्री की तबीयत बिगड़ गई। टूंडला स्टेशन से पहले टीटीई ने कंट्रोलर को सूचना दी। इसके बाद भी स्टेशन पर ट्रेन नहीं रोकी गई। इस पर टीटीई ने इटावा स्टेशन के कंट्रोलर को सूचना दी। ट्रेन के इटावा स्टेशन पर रुकने के बाद डॉक्टर ने देखकर बताया कि यात्री की मौत हो चुकी है। इसके बाद जीआरपी ने शव को ट्रेन से उतारा। इसके बाद उसके मोबाइल से घरवालों को सूचना दी गई। सुबह परिजनों के पहुंचने पर जीआरपी ने शव उनको सौंप दिया।

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नई दिल्ली से बिहार जाने के लिए हशमत अली पुत्र मोहम्मद जब्बार (20) ट्रेन में सवार हुआ था। वह कालापेगा, थाना भेलधी जिला छपरा, बिहार का निवासी था। अलीगढ़ स्टेशन के आसपास हशमत की अचानक तबियत बिगड़ गई। इस पर उसकी बर्थ के पास बैठे यात्रियों ने टीटीई आर के यादव को जानकारी दी। टीटीई ने शाम करीब 5: 45 मिनट पर टूंडला कंट्रोलर से ट्रेन रोककर यात्री का इलाज करवाने की बात कही। इसके बाद भी ट्रेन टूंडला स्टेशन पर नहीं रोकी गई। इटावा में ट्रेन के स्टेशन पर रुकते ही डॉक्टर उसकी बोगी पर पहुंच गए। वहां पर डॉक्टर ने हशमत की नब्ज देखकर बताया कि उसकी मौत हो चुकी है। इस पर जीआरपी एसआई दीपक कुमार व रोहन सिंह ने ट्रेन से शव उतार लिया। यात्री के पास से मिले मोबाइल से उसके परिजनों को सूचना दी गई। शुक्रवार को थाने पहुंचे परिजनों को पंचनामा भरकर शव सौंप दिया गया। परिजन एंबुलेंस से शव कसड़क मार्ग से घर ले गए।
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वक्त पर इलाज होता तो बच जाती जान
हरियाणा के गुरुग्राम में चाचा के साथ रहता था
इटावा। संपर्क क्रांति में यात्री के बीमार होने के बाद भी टूंडला में ट्रेन रोककर उसका इलाज नहीं कराया गया। इससे उसकी मौत हो गई। इस पर  यात्रियों में नाराजगी भी जताई। टीटीई ने भी कहा कि अगर उसकी बात पर टूंडला में ट्रेन रोक ली जाती तो यात्री की जान बच सकती थी। रेलवे की इस लापरवाही पर उसके परिजनों ने भी गुस्से का इजहार किया। परिजनों ने मामले की जांच रेलवे के उच्चाधिकारियों से कराने की मांग भी की।
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जीआरपी थाने में हशमत के चाचा हशमुद्दीन व चाची चांदतारा ने बताया कि वह उनके साथ ही गुरुग्राम में रहता था। वह पढ़ाई के साथ साथ प्राइवेट कंपनी में सिलाई का काम भी करता था। पिछले एक सप्ताह से उसे बुखार आ रहा था। यही कारण था कि उसके पिता ने उसे घर बुलाया था। हशमत गुरुवार को अपने दोस्त सूरज के साथ स्टेशन पहुंचा। उसने उसे ट्रेन में सवार कर दिया। सूरज ने घर वापस पहुंचकर उन्हें यह बताया था कि वह हशमत को ठीकठाक ट्रेन में बैठा आया है। इसके बाद रात को उन्हें घर से आए फोन पर यह जानकारी मिली की हशमत के साथ यह घटना हो गई है। दूसरी ओर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रेन के इटावा स्टेशन पर रुकने बाद डॉ जीपी पाठक ने देखने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस पर अन्य यात्रियों ने नाराजगी व्यक्त की थी।

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