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बकरी बाजार न लगने से पालक व व्यापारी हैं परेशान
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फोटो संख्या 46 जसवंतनगर में मार्च माह से पहले लगे बकरी के बाजार की फोटो
- फोटो : ETAWHA
उत्तर भारत में जसवंतनगर के रामलीला मैदान में लगने वाला सबसे बड़ा बकरी बाजार मार्च माह से कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के कारण बंद है।
बाजार के फिलहाल लगने की भी संभावना नजर नहीं आ रही है। बकरी बाजार संचालन का कहना है कि बाजार लगाने के लिए कोई परमिशन नहीं मिल रही है। हालांकि बंद रखने का भी कोई आदेश नहीं है।
इस बार बकरीद का त्योहार एक अगस्त को मनेगा, लेकिन खरीद फरोख्त नहीं हो पा रही है। इसके चलते बकरी पालक व व्यापारी परेशान हैं। यह बकरी बाजार राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बकरी बाजारों में शुमार है।
बकरी बाजार के मुख्य संचालक राजीव गुप्ता ने बताया कि हर बुधवार को लगने वाला बकरी बाजार साढ़े चार महीने से बंद है। यह बाजार 50 वर्ष पुराना होने के कारण देशभर में प्रसिद्ध हैं।
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यहां से मुंबई, बंगाल, आसनसोल, झरिया, कोलकाता, राजस्थान, गुजरात, झारखंड, ग्वालियर, भिंड, मोरेना, औरैया, फिरोजाबाद, कन्नौज आदि के व्यापारी बकरीद से एक महीना पहले से ही खरीद फरोख्त करने लगते थे। लेकिन इस बार व्यापारियों के रोज फोन आ रहे, किंतु कोरोना वायरस के चलते बाजार शुरू नहीं किया गया।
यहां से मुंबई, कोलकाता आदि बंदरगाहों पर बकरों को निर्यात करने वाले व्यापारी अरविंद नेतू ने बताया कि कोरोना की वजह से बकरी पालन व्यवसाय की कमर टूट गई है। हम जैसे लोगों और बकरी पालकों के सामने दो जून रोटी के भी लाले पड़ गए हैं।
बहुतेरे पालक अपने गांवों में ही औने पौने दामों में बिक्री कर रहे हैं और उन्हें वाजिब कीमत नहीं मिलने की सूचना है।
पिछले वर्षों में यहां पर बंगाल और मुंबई के व्यापारी भी आते थे जो बकरों का अरब देशों को बकरीद से पूर्व सप्लाई करते हैं। इस वजह 50 हजार और उससे ज्यादा कीमत भी बकरों की लगी थी।
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बाजार के फिलहाल लगने की भी संभावना नजर नहीं आ रही है। बकरी बाजार संचालन का कहना है कि बाजार लगाने के लिए कोई परमिशन नहीं मिल रही है। हालांकि बंद रखने का भी कोई आदेश नहीं है।
इस बार बकरीद का त्योहार एक अगस्त को मनेगा, लेकिन खरीद फरोख्त नहीं हो पा रही है। इसके चलते बकरी पालक व व्यापारी परेशान हैं। यह बकरी बाजार राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बकरी बाजारों में शुमार है।
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बकरी बाजार के मुख्य संचालक राजीव गुप्ता ने बताया कि हर बुधवार को लगने वाला बकरी बाजार साढ़े चार महीने से बंद है। यह बाजार 50 वर्ष पुराना होने के कारण देशभर में प्रसिद्ध हैं।
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यहां से मुंबई, बंगाल, आसनसोल, झरिया, कोलकाता, राजस्थान, गुजरात, झारखंड, ग्वालियर, भिंड, मोरेना, औरैया, फिरोजाबाद, कन्नौज आदि के व्यापारी बकरीद से एक महीना पहले से ही खरीद फरोख्त करने लगते थे। लेकिन इस बार व्यापारियों के रोज फोन आ रहे, किंतु कोरोना वायरस के चलते बाजार शुरू नहीं किया गया।
यहां से मुंबई, कोलकाता आदि बंदरगाहों पर बकरों को निर्यात करने वाले व्यापारी अरविंद नेतू ने बताया कि कोरोना की वजह से बकरी पालन व्यवसाय की कमर टूट गई है। हम जैसे लोगों और बकरी पालकों के सामने दो जून रोटी के भी लाले पड़ गए हैं।
बहुतेरे पालक अपने गांवों में ही औने पौने दामों में बिक्री कर रहे हैं और उन्हें वाजिब कीमत नहीं मिलने की सूचना है।
पिछले वर्षों में यहां पर बंगाल और मुंबई के व्यापारी भी आते थे जो बकरों का अरब देशों को बकरीद से पूर्व सप्लाई करते हैं। इस वजह 50 हजार और उससे ज्यादा कीमत भी बकरों की लगी थी।