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खेतों में जल रही पराली, फैल रहा प्रदूषण
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बकेवर क्षेत्र मडैया व नगला सावत खां खेत में पराली जलाते किसान
- फोटो : ETAWAH
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इटावा। शासन और प्रशासन के तमाम दावों के बाद भी खेतों में पराली जलाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। तमाम गांवों में खेतों पर पराली नहीं जलाई जा रही है। अमर उजाला की टीम ने शनिवार को कई गांवों में खेतों पर पराली जलते हुए देखी। उठ रहे धुएं से प्रदूषण फैल रहा है, लेकिन प्रशासनिक अफसर एक्शन में नजर नहीं आ रहे हैं।
अमर उजाला टीम को सैफई ब्लॉक के महौला गांव में खेतों पर पराली जलती दिखाई दी। जिस खेत पर पराली जल रही थी, वहां किसान खेत पर काम भी कर रहे थे। महौला गांव में सेंट्रल जेल बनाई गई है, वहां पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का अक्सर आना-जाना रहता है, लेकिन किसी को खेतों पर पराली जलती नहीं नजर आई।
लवेदी संवाद के मुताबिक लखना कस्बा व उसके आस-पास नगला सावत खां गांव में खेतों पर पराली जलाई गई। इससे काफी देर तक आस-पास धुआं छाया रहा। सैफई संवाद के मुताबिक तहसील क्षेत्र से गुजरने वाली कर्री छिमारा रोड पर कई जगह किसान पराली जलाते दिखाई दिए। सैफई हवाई पट्टी रोड पर भी खेतों पर पराली जलती नजर आई। इससे प्रदूषण फैल रहा है और उपजाऊ जमीन की उपज खत्म हो रही है।
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जसवंतनगर संवाद के अनुसार क्षेत्र में दिन हो या रात। गांवों में किसान पराली जलाने के बाज नहीं आ रहे हैं। सिरहॉल गांव में स्टेडियम के सामने की तरफ कई खेतों पर पराली जलाई जा रही थी। क्षेत्र के अन्य गांवों में भी पराली जलाई जा रही है।
जिले में पराली जलाए जाने के मामलों को रोकने के लिए डीएम श्रुति सिंह तमाम प्रयास कर रहीं हैं। वह खुद कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ गांवों में जाकर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बतातीं हैं। किसानों को पराली जलाने की बजाय गोशालाओं देने के लिए जागरूक भी कर रही हैं। साथ ही एक ट्राली पराली देने पर दो हजार रुपये दिए जाने की बात भी कही। साथ ही पराली जलाने वाले किसानों को सम्मान निधि न मिलने का भी फरमान है। स्कीम व चेतावनी के बाद भी तमाम किसान अपने खेतों पर पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
बोले, जिम्मेदार अधिकारी
पराली जलाने वाले किसानों को चिह्नित करने के लिए सचल दल गठित किए गए हैं। वे क्षेत्र में घूमकर चिह्नित करने का काम कर रहे हैं। दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई के साथ ही उनकी किसान सम्मान निधि पर भी रोक लगाई जाएगी।
- विजय शंकर त्रिपाठी, एसडीएम भरथना
जो भी किसान पराली जला रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जाएगी। राजस्व विभाग की टीम प्रतिदिन क्षेत्र में भ्रमण कर पराली जलाने वालों किसानों का ब्योरा जुटा रही है। जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई होगी।
- ज्योत्सना बंधु, एसडीएम सैफई
कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी गांव-गांव गोष्ठी कर किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में भी बता रहे हैं। कृषि विभाग की तरफ से डीकंपोजर को फ्री में किसानों को दिया जा रहा, ताकि वह पराली को खेतों पर नष्ट न कर उसका खाद के रूप में प्रयोग कर सकें। जमीन की गुणवत्ता बढ़ा सकें। कृषि विभाग के इन सभी प्रयासों के बाद भी किसान खेतों पर पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
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अमर उजाला टीम को सैफई ब्लॉक के महौला गांव में खेतों पर पराली जलती दिखाई दी। जिस खेत पर पराली जल रही थी, वहां किसान खेत पर काम भी कर रहे थे। महौला गांव में सेंट्रल जेल बनाई गई है, वहां पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का अक्सर आना-जाना रहता है, लेकिन किसी को खेतों पर पराली जलती नहीं नजर आई।
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लवेदी संवाद के मुताबिक लखना कस्बा व उसके आस-पास नगला सावत खां गांव में खेतों पर पराली जलाई गई। इससे काफी देर तक आस-पास धुआं छाया रहा। सैफई संवाद के मुताबिक तहसील क्षेत्र से गुजरने वाली कर्री छिमारा रोड पर कई जगह किसान पराली जलाते दिखाई दिए। सैफई हवाई पट्टी रोड पर भी खेतों पर पराली जलती नजर आई। इससे प्रदूषण फैल रहा है और उपजाऊ जमीन की उपज खत्म हो रही है।
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जसवंतनगर संवाद के अनुसार क्षेत्र में दिन हो या रात। गांवों में किसान पराली जलाने के बाज नहीं आ रहे हैं। सिरहॉल गांव में स्टेडियम के सामने की तरफ कई खेतों पर पराली जलाई जा रही थी। क्षेत्र के अन्य गांवों में भी पराली जलाई जा रही है।
जिले में पराली जलाए जाने के मामलों को रोकने के लिए डीएम श्रुति सिंह तमाम प्रयास कर रहीं हैं। वह खुद कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ गांवों में जाकर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बतातीं हैं। किसानों को पराली जलाने की बजाय गोशालाओं देने के लिए जागरूक भी कर रही हैं। साथ ही एक ट्राली पराली देने पर दो हजार रुपये दिए जाने की बात भी कही। साथ ही पराली जलाने वाले किसानों को सम्मान निधि न मिलने का भी फरमान है। स्कीम व चेतावनी के बाद भी तमाम किसान अपने खेतों पर पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
बोले, जिम्मेदार अधिकारी
पराली जलाने वाले किसानों को चिह्नित करने के लिए सचल दल गठित किए गए हैं। वे क्षेत्र में घूमकर चिह्नित करने का काम कर रहे हैं। दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई के साथ ही उनकी किसान सम्मान निधि पर भी रोक लगाई जाएगी।
- विजय शंकर त्रिपाठी, एसडीएम भरथना
जो भी किसान पराली जला रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जाएगी। राजस्व विभाग की टीम प्रतिदिन क्षेत्र में भ्रमण कर पराली जलाने वालों किसानों का ब्योरा जुटा रही है। जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई होगी।
- ज्योत्सना बंधु, एसडीएम सैफई
कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी गांव-गांव गोष्ठी कर किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में भी बता रहे हैं। कृषि विभाग की तरफ से डीकंपोजर को फ्री में किसानों को दिया जा रहा, ताकि वह पराली को खेतों पर नष्ट न कर उसका खाद के रूप में प्रयोग कर सकें। जमीन की गुणवत्ता बढ़ा सकें। कृषि विभाग के इन सभी प्रयासों के बाद भी किसान खेतों पर पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

जसवंत नगर के ग्राम सिरहॉल के समीप धान की पराली खेतों में जलती हुई।- फोटो : ETAWAH