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Etawah News: चंबल पुल खोलने के लिए 14 को होगी अफसरों की बैठक
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इटावा। लगभग 50 साल पुराना चंबल पुल डेढ़ साल से भारी वाहनों के लिए बंद है। इटावा और एमपी के भिंड जिला प्रशासन से ट्रांसपोर्टर पुल को खोलने की लगातार मांग कर रहे हैं। 14 फरवरी को इसे लेकर दोनों जिलों के अफसरों और लोक निर्माण राज्य खंड के अधिकारियों के बीच बैठक होगी। माना जा रहा है कि ट्रांसपोर्टरों को राहत मिल सकती है।
शहर से लगभग 13 किलोमीटर दूर चंबल नदी पर बना पुल जिले को मध्यप्रदेश से जोड़ता है। यह इटावा के साथ ही आसपास के जिलों के लोगों को भी भिंड, ग्वालियर जाने और वहां से आने वाले लोगों के लिए काफी मददगार है। करीब 50 साल पुराना पुल डेढ़ साल पहले जर्जर घोषित करके बंद कर दिया गया। लेकिन भारी वाहनों को आवागमन बंद रखा गया।
उस समय भारी और हल्के दोनों तरह के वाहनों पर रोक लगाकर इसकी मरम्मत तो कराई गई थी, लेकिन इस पुल पर भारी वाहनों के चलने से खतरे को देखते हुए उन्हें अनुमति नहीं दी गई थी।
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सदर विधायक सरिता भदौरिया की मांग पर इसके बराबर से एलीवेटिड पुल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। करीब सात माह पहले इसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। 216 करोड़ रुपये से इस पुल को बनाया जाना है, लेकिन वाइल्ड लाइफ विभाग की ओर से एनओसी न दिए जाने की वजह से पुल का काम शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में भारी वाहन संचालक परेशान हैं। वहीं, इस रूट पर चलने वाली रोडवेज की 30 और निजी 10 बसें भी नहीं गुजर रहीं। इससे यात्रियों के साथ ट्रांसपोर्टर भी परेशान हैं। भिंड और इटावा के ट्रांसपोर्टर के शर्तों पर कई बार पुल शुरू करने की मांग कर चुके हैं। इसे लेकर पिछले दिनों कई बार बैठक हो चुकी है, लेकिन उसमें कोई हल नहीं निकला था। अब 14 फरवरी को भिंड और इटावा जिला प्रशासन व लोक निर्माण राज्य खंड के अधिकारियों के बीच बैठक होनी है। नए पुल में देरी के चलते माना जा रहा है कि पुराने पुल को शर्तों के साथ भारी वाहनों के लिए शुरू किया जा सकता है।
दोनों तरफ खड़ी होती हैं बसें, पुल पैदल पार करते यात्री
पुल बंद होने के बाद से पुल के दोनों तरफ बसें खड़ी होती हैं। लोग इटावा से उदी तक बस से जाते हैं। इसके बाद करीब 800 मीटर का पुल 10 से 20 रुपये ऑटो वाले को देकर पार करते हैं। फिर भिंड की तरफ जाकर दूसरी बस में सवार होते हैं। जिन ट्रांसपोर्टरों के पास एक से अधिक बस हैं, वह दोनों तरफ एक-एक बस लगा देते हैं।
विधायक ने सदन में भी उठाया है मुद्दा
सदर विधायक सरिता भदौरिया लगातार नया पुल बनवाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने गुरुवार को विधानसभा में भी वाइल्ड लाइफ की ओर से एनओसी न दिए जाने का मुद्दा उठाया था। कहा था कि एनओसी जल्दी दिलाकर पुल का काम शुरू कराया जाए।
नया एलीवेटिड पुल बनने के लिए शासन से हरी झंडी दे दी गई है। इसके लिए बजट भी स्वीकृत कर दिया गया है, लेकिन सात माह से वाइल्ड लाइफ की एनओसी नहीं मिल पा रही है। इसलिए निर्माण प्रक्रिया रुकी हुई है।
- मुकेश ठाकुर, अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग राज्य मार्ग खंड।
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शहर से लगभग 13 किलोमीटर दूर चंबल नदी पर बना पुल जिले को मध्यप्रदेश से जोड़ता है। यह इटावा के साथ ही आसपास के जिलों के लोगों को भी भिंड, ग्वालियर जाने और वहां से आने वाले लोगों के लिए काफी मददगार है। करीब 50 साल पुराना पुल डेढ़ साल पहले जर्जर घोषित करके बंद कर दिया गया। लेकिन भारी वाहनों को आवागमन बंद रखा गया।
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उस समय भारी और हल्के दोनों तरह के वाहनों पर रोक लगाकर इसकी मरम्मत तो कराई गई थी, लेकिन इस पुल पर भारी वाहनों के चलने से खतरे को देखते हुए उन्हें अनुमति नहीं दी गई थी।
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सदर विधायक सरिता भदौरिया की मांग पर इसके बराबर से एलीवेटिड पुल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। करीब सात माह पहले इसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। 216 करोड़ रुपये से इस पुल को बनाया जाना है, लेकिन वाइल्ड लाइफ विभाग की ओर से एनओसी न दिए जाने की वजह से पुल का काम शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में भारी वाहन संचालक परेशान हैं। वहीं, इस रूट पर चलने वाली रोडवेज की 30 और निजी 10 बसें भी नहीं गुजर रहीं। इससे यात्रियों के साथ ट्रांसपोर्टर भी परेशान हैं। भिंड और इटावा के ट्रांसपोर्टर के शर्तों पर कई बार पुल शुरू करने की मांग कर चुके हैं। इसे लेकर पिछले दिनों कई बार बैठक हो चुकी है, लेकिन उसमें कोई हल नहीं निकला था। अब 14 फरवरी को भिंड और इटावा जिला प्रशासन व लोक निर्माण राज्य खंड के अधिकारियों के बीच बैठक होनी है। नए पुल में देरी के चलते माना जा रहा है कि पुराने पुल को शर्तों के साथ भारी वाहनों के लिए शुरू किया जा सकता है।
दोनों तरफ खड़ी होती हैं बसें, पुल पैदल पार करते यात्री
पुल बंद होने के बाद से पुल के दोनों तरफ बसें खड़ी होती हैं। लोग इटावा से उदी तक बस से जाते हैं। इसके बाद करीब 800 मीटर का पुल 10 से 20 रुपये ऑटो वाले को देकर पार करते हैं। फिर भिंड की तरफ जाकर दूसरी बस में सवार होते हैं। जिन ट्रांसपोर्टरों के पास एक से अधिक बस हैं, वह दोनों तरफ एक-एक बस लगा देते हैं।
विधायक ने सदन में भी उठाया है मुद्दा
सदर विधायक सरिता भदौरिया लगातार नया पुल बनवाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने गुरुवार को विधानसभा में भी वाइल्ड लाइफ की ओर से एनओसी न दिए जाने का मुद्दा उठाया था। कहा था कि एनओसी जल्दी दिलाकर पुल का काम शुरू कराया जाए।
नया एलीवेटिड पुल बनने के लिए शासन से हरी झंडी दे दी गई है। इसके लिए बजट भी स्वीकृत कर दिया गया है, लेकिन सात माह से वाइल्ड लाइफ की एनओसी नहीं मिल पा रही है। इसलिए निर्माण प्रक्रिया रुकी हुई है।
- मुकेश ठाकुर, अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग राज्य मार्ग खंड।