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कई गांवों में आबादी से ज्यादा निकले ओबीसी

Fri, 24 Jul 2015 11:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Fri, 24 Jul 2015 11:14 PM IST
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OBC took over several villages population

जिले में कई ऐसे गांव हैं, जहां रैपिड सर्वे में आबादी से ज्यादा ओबीसी की संख्या पाई गई है। यह तथ्य सामने आने पर उप जिलाधिकारियों को रैपिड सर्वे के परीक्षण का काम सौंपा गया है।

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इसी वजह से अभी तक जिले में रैपिड सर्वे का फाइनल प्रकाशन अटका पड़ा है। इन बेमेल आंकड़ों से राष्ट्रीय जनगणना 2011 और रैपिड सर्वे की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में है।
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किसी भी जगह की आबादी में हर वर्ग की संख्या शामिल होती है। ऐसा नहीं हो सकता कि आबादी कम हो और किसी वर्ग की संख्या उससे अधिक हो लेकिन हाल ही हुए रैपिड सर्वे के आंकड़ों का जब मिलान राष्ट्रीय जनगणना से मिलान किया गया तो ऐसा ही माजरा सामने आया। जिले की कई गांव ऐसे पाए गए।
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जहां राष्ट्रीय जनगणना के मुताबिक उसकी आबादी तो कम है लेकिन रैपिड सर्वे में ओबीसी की संख्या अधिक दर्शाई गई है। यह बेमेल आंकड़े जब डीएम की नजरों से गुजरे तो उन्होंने रैपिड सर्वे के ओबीसी आंकड़ों का परीक्षण करने के लिए सभी संबंधित एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी है।

इसी वजह से अभी तक रैपिड सर्वे के तहत ओबीसी आंकड़ों का फाइनल प्रकाशन नहीं हुआ है। यह प्रकाशन डीएम के हस्ताक्षर के बाद होना है।

मालूम हो कि रैपिड सर्वे के आंकड़ों को फाइनल प्रकाशन गत 18 जुलाई को किया जाना प्रस्तावित रहा है लेकिन आबादी और ओबीसी की संख्या में बेमेल अंतर मिलने आदि अन्य कारणों से यह कार्य कंपलीट नहीं हो पाया। जाहिर है कि या तो राष्ट्रीय जनगणना के आबादी आंकड़े गलत हैं या फिर रैपिड सर्वे में खामी रही है।

इस संबंध में डीपीआरओ एमएल यादव ने बताया कि आबादी से अधिक ओबीसी संख्या मिलने पर डीएम के निर्देशानुसार एसडीएम को परीक्षण कार्य सौंपा जा चुका है। शनिवार तक यह कार्य पूर्ण हो जाएगा। उसके बाद फाइनल प्रकाशन कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन बेमेल आंकड़ों में दोनों स्तर पर गल्तियां हो सकती हैं।


संभव है कि राष्ट्रीय जनगणना के समय किसी गांव का कोई मजरा छूट गया हो। जिससे उसकी आबादी कम दर्शाई गई। ऐसा भी हो सकता है कि आबादी सही हो और रैपिड सर्वे में त्रुटि रही हो। इसी का परीक्षण एसडीएम कर रहे हैं।

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