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कुपोषण से बचने के लिए पौष्टिक भोजन जरूरी
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इटावा। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर सही तरीके से बच्चों की देखभाल, गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है।
प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) सूरज सिंह का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घरों में जाकर जाकर पौष्टिक आहार के संदर्भ में जानकारी दे रही हैं। साथ ही बच्चों की काउंसलिंग भी कर रही है।
जिले के सराय शेख आंगनबाड़ी केंद्र में छह माह पूरे कर चुकीं आयत (बच्चे) का अन्नप्राशन मुख्य सेविका अंजू राठौर ने कराया। इस दौरान बच्चों की सही देखभाल और उनके खाने में खीर, हलवा, दलिया, सब्जी, फल, दाल आदि का प्रयोग किस प्रकार करें, इस बारे में जानकारी दी गई।
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आयत की मां सीमा ने बताया आंगनबाड़ी कार्यकर्ता साधना ने पोषण और टीकाकरण के बारे में जानकारी दी। बताया नौ से 11 माह तक के बच्चे को दिन में तीन से चार बार और 12 माह से दो वर्ष वाले बच्चे को घर का पका पूरा खाना देना चाहिए।
मुख्य सेविका अंजू राठौर ने बताया आंगनबाड़ी केंद्रों पर समय-समय पर बच्चों की मॉनीटरिंग होती है। नगरीय क्षेत्र में सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 786 बच्चे कम वजन और 266 बच्चे अति कम वजन और 259 मध्यम कुपोषित (मैम) श्रेणी, 110 बच्चे गंभीर कुपोषित (सैम) श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं।
इनकी देखभाल के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर जाकर जानकारी दे रही हैं। सितंबर में तीन अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया है।
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प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) सूरज सिंह का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घरों में जाकर जाकर पौष्टिक आहार के संदर्भ में जानकारी दे रही हैं। साथ ही बच्चों की काउंसलिंग भी कर रही है।
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जिले के सराय शेख आंगनबाड़ी केंद्र में छह माह पूरे कर चुकीं आयत (बच्चे) का अन्नप्राशन मुख्य सेविका अंजू राठौर ने कराया। इस दौरान बच्चों की सही देखभाल और उनके खाने में खीर, हलवा, दलिया, सब्जी, फल, दाल आदि का प्रयोग किस प्रकार करें, इस बारे में जानकारी दी गई।
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आयत की मां सीमा ने बताया आंगनबाड़ी कार्यकर्ता साधना ने पोषण और टीकाकरण के बारे में जानकारी दी। बताया नौ से 11 माह तक के बच्चे को दिन में तीन से चार बार और 12 माह से दो वर्ष वाले बच्चे को घर का पका पूरा खाना देना चाहिए।
मुख्य सेविका अंजू राठौर ने बताया आंगनबाड़ी केंद्रों पर समय-समय पर बच्चों की मॉनीटरिंग होती है। नगरीय क्षेत्र में सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 786 बच्चे कम वजन और 266 बच्चे अति कम वजन और 259 मध्यम कुपोषित (मैम) श्रेणी, 110 बच्चे गंभीर कुपोषित (सैम) श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं।
इनकी देखभाल के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर जाकर जानकारी दे रही हैं। सितंबर में तीन अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया है।