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अब आसान नहीं होगा सरकारी धन से जेबें भरना
अमर उजाला ब्यूरो इटावा।
Updated Mon, 18 Jan 2016 11:50 PM IST
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विकास के नाम पर कागजी योजनाआें के जरिए जेबें भरना प्रधानों व सचिव के लिए आसान नहीं होगा। यह व्यवस्था ई-पंचायत के तहत लागू की जा रही है। जो खासतौर पर केंद्र सरकार से 14वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त धनराशि के खर्च पर लागू होगी। जिले में इसकी तैयारी होने लगी है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए चुनिंदा चार लोगों को फरवरी महीने में सरकार मास्टर ट्रेनर के तौर पर प्रशिक्षण देगी। इसके साथ ही विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा।
ग्राम प्रधानों व सचिवों पर धन के गबन के आरोप लगते रहे हैं। विगत वर्षों में कुछ एक मामलों में एफआईआर भी दर्ज हुई हैं। ग्रामीण विकास के नाम पर खजाने तो खाली होते रहे, लेकिन गांवों के हालात जस के तस रहे हैं।
यही वजह है कि सरकारों को लोहिया या फिर अंबेडकर के नाम से स्पेशल योजनाएं चलानी पड़ीं। अधिकांश ग्राम पंचायतें सही मायने में अपने दायित्व का निर्वहन करने में पीछे रही हैं। अब ग्रामीण विकास में भी केंद्र सरकार तकनीक का सहारा ले रही है। जिससे कागजी योजनाएं फलीभूत न हो सकें।
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हाल ही में गठित ग्राम पंचायतें अप्रैल माह तक हर हालत में कंप्यूटरीकृत होनी हैं। पंचायतीराज विभाग के निर्देश पर इस दिशा में काम शुरू हो रहा है। यह काम जिला पंचायतराज की ई-पंचायत की शाखा को दिया गया है।
ई-पंचायत विभाग की मानें तो अब तक प्रिया सॉफ्टवेयर पर ही पंचायत निधि का ब्योरा रहता था। अब दो सॉफ्टवेयर और तैयार किए गए हैं। कार्ययोजना बनाने के लिए प्लान प्लस सॉफ्टवेयर का प्रयोग होगा। इसके बाद उस पर काम करने के लिए एक्शन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा। तब फिर काम की पूर्ति का प्रिया सॉफ्टवेयर में पूरा आर्थिक ब्योरा दिया जाएगा।
प्लान प्लस सॉफ्टवेयर में बगैर कार्ययोजना बनाए केंद्र से मिलने वाले 14वें वित्त आयोग की रकम खर्च नहीं की जा सकेगी। इसके बाद कार्ययोजना पर जो प्रोगेस होगी। उसे एक्शन सॉफ्टवेयर पर कार्ययोजना की वर्क आईडी बनाकर अपलोड किया जाएगा। तभी उस कार्ययोजना के तहत धन की निकासी संभव होगी।
इसके बाद यह पूरा ब्योरा प्रिया सॉफ्टवेयर पर लोड होगा। जिससे डीएम आदि जिले के वरिष्ठ अधिकारी कंप्यूटर पर जायजा ले सकेंगे। यानि अधिकारियों को विकास योजनाओं पर खर्च की जाने वाली एक एक रकम की जानकारी रहेगी। वह चाहेंगे तो उसका भौतिक सत्यापन कर सकेंगे।
यहीं नहीं ई-पंचायत डीपीएम उपेंद्र नारायण, ग्राम विकास अधिकारी विशाल श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत जमादार सिंह व प्रमोद कुमार गुप्ता को मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित किया गया है। इन्हें फरवरी के महीने में पंचायतीराज निदेशालय लखनऊ में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह मास्टर ट्रेनर ही ग्राम पंचायत विकास योजना समिति के सदस्यों व खंड स्तरीय अधिकारियों को व्यवस्थागत जानकारी प्रदान करेंगे। जिले की कुल 471 ग्राम पंचायतों को क्लस्टर में समायोजित किया जाएगा। एक क्लस्टर में करीब 10 पंचायतें रखी जाएंगी। हरेक क्लस्टर का अधिकारी होगा। उसी के सुपरविजन में वार्षिक व पंचवर्षीय कार्ययोजनाएं बनाई जाएंगी।
ग्राम निधि प्रथम बैंक खाते में केंद्रीय 14वें वित्त व राज्य वित्त आयोग, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन आदि की धनराशि भेजी जाएगी। सॉफ्टवेयर में फीडिंग के साथ रकम खर्च होगी।
ग्राम प्रधानों व सचिवों पर धन के गबन के आरोप लगते रहे हैं। विगत वर्षों में कुछ एक मामलों में एफआईआर भी दर्ज हुई हैं। ग्रामीण विकास के नाम पर खजाने तो खाली होते रहे, लेकिन गांवों के हालात जस के तस रहे हैं।
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यही वजह है कि सरकारों को लोहिया या फिर अंबेडकर के नाम से स्पेशल योजनाएं चलानी पड़ीं। अधिकांश ग्राम पंचायतें सही मायने में अपने दायित्व का निर्वहन करने में पीछे रही हैं। अब ग्रामीण विकास में भी केंद्र सरकार तकनीक का सहारा ले रही है। जिससे कागजी योजनाएं फलीभूत न हो सकें।
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हाल ही में गठित ग्राम पंचायतें अप्रैल माह तक हर हालत में कंप्यूटरीकृत होनी हैं। पंचायतीराज विभाग के निर्देश पर इस दिशा में काम शुरू हो रहा है। यह काम जिला पंचायतराज की ई-पंचायत की शाखा को दिया गया है।
ई-पंचायत विभाग की मानें तो अब तक प्रिया सॉफ्टवेयर पर ही पंचायत निधि का ब्योरा रहता था। अब दो सॉफ्टवेयर और तैयार किए गए हैं। कार्ययोजना बनाने के लिए प्लान प्लस सॉफ्टवेयर का प्रयोग होगा। इसके बाद उस पर काम करने के लिए एक्शन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा। तब फिर काम की पूर्ति का प्रिया सॉफ्टवेयर में पूरा आर्थिक ब्योरा दिया जाएगा।
प्लान प्लस सॉफ्टवेयर में बगैर कार्ययोजना बनाए केंद्र से मिलने वाले 14वें वित्त आयोग की रकम खर्च नहीं की जा सकेगी। इसके बाद कार्ययोजना पर जो प्रोगेस होगी। उसे एक्शन सॉफ्टवेयर पर कार्ययोजना की वर्क आईडी बनाकर अपलोड किया जाएगा। तभी उस कार्ययोजना के तहत धन की निकासी संभव होगी।
इसके बाद यह पूरा ब्योरा प्रिया सॉफ्टवेयर पर लोड होगा। जिससे डीएम आदि जिले के वरिष्ठ अधिकारी कंप्यूटर पर जायजा ले सकेंगे। यानि अधिकारियों को विकास योजनाओं पर खर्च की जाने वाली एक एक रकम की जानकारी रहेगी। वह चाहेंगे तो उसका भौतिक सत्यापन कर सकेंगे।
यहीं नहीं ई-पंचायत डीपीएम उपेंद्र नारायण, ग्राम विकास अधिकारी विशाल श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत जमादार सिंह व प्रमोद कुमार गुप्ता को मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित किया गया है। इन्हें फरवरी के महीने में पंचायतीराज निदेशालय लखनऊ में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह मास्टर ट्रेनर ही ग्राम पंचायत विकास योजना समिति के सदस्यों व खंड स्तरीय अधिकारियों को व्यवस्थागत जानकारी प्रदान करेंगे। जिले की कुल 471 ग्राम पंचायतों को क्लस्टर में समायोजित किया जाएगा। एक क्लस्टर में करीब 10 पंचायतें रखी जाएंगी। हरेक क्लस्टर का अधिकारी होगा। उसी के सुपरविजन में वार्षिक व पंचवर्षीय कार्ययोजनाएं बनाई जाएंगी।
ग्राम निधि प्रथम बैंक खाते में केंद्रीय 14वें वित्त व राज्य वित्त आयोग, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन आदि की धनराशि भेजी जाएगी। सॉफ्टवेयर में फीडिंग के साथ रकम खर्च होगी।