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ह्यदय रोगियों को छह महीनों से सैफई में नहीं मिल रहा इलाज
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सैफई। विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से सैफई मेडिकल कॉलेज का कार्डियोलॉजी विभाग हृदय रोगियों के लिए बेमकसद साबित हो रहा है। ओपीडी में दूरदराज से आने वाले हृदय के गंभीर मरीजों को सैफई से तत्काल रेफरल लेटर थमा दिया जाता है। चिकित्सकीय जांचों के लिए विभाग में रखी महंगी मशीनें धूल फांक रही हैं। यह स्थिति करीब छह माह से है।
मेडिकल कॉलेज में हृदय रोगियों को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिलती थीं। हृदय रोगियों के लिए बेहद महंगी साबित होने वाली एंजियोग्राफी और पेस मेकर जैसी सुविधाएं भी कम खर्च में उपलब्ध हो जाती थीं। इससे यहां मरीजों की अच्छी खासी भीड़ रहती थी। मार्च 2021 में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर
सर्राफ को निलंबित कर दिया। उनके निलंबन के बाद वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। तब से विभागीय चिकित्सा सुविधाएं भी प्रभावित हो गई हैं। वर्तमान में एक सामान्य ईको कॉर्डियोग्राम (ईसीजी) जांच भी सैफई में नहीं हो पा रही है। इसका प्रमुख कारण किसी कार्डियोलॉजिस्ट का न होना है।
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जानकारों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में बाहरी लोगों का पूरा नेटवर्क है। इनके तार कानपुर, आगरा जैसे महानगरों के नर्सिंगहोम व निजी क्लीनिकों से जुड़े हैं। कार्डियोलॉजी के जो भी मरीज सैफई आते हैं, उन्हेें इन्हीं नर्सिंगहोम में रेफर करा दिया जाता है।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष उदयभान सिंह यादव ने कहा कि कार्डियोलॉजी विभाग छह महीनों से बंद है। यह चिंता का विषय है। जिस विवि के कुलाधिपति स्वयं मुख्यमंत्री हों और उसके हालात ऐसे हैं तो सूबे के अन्य अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराएंगे।
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मेडिकल कॉलेज में हृदय रोगियों को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिलती थीं। हृदय रोगियों के लिए बेहद महंगी साबित होने वाली एंजियोग्राफी और पेस मेकर जैसी सुविधाएं भी कम खर्च में उपलब्ध हो जाती थीं। इससे यहां मरीजों की अच्छी खासी भीड़ रहती थी। मार्च 2021 में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर
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सर्राफ को निलंबित कर दिया। उनके निलंबन के बाद वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। तब से विभागीय चिकित्सा सुविधाएं भी प्रभावित हो गई हैं। वर्तमान में एक सामान्य ईको कॉर्डियोग्राम (ईसीजी) जांच भी सैफई में नहीं हो पा रही है। इसका प्रमुख कारण किसी कार्डियोलॉजिस्ट का न होना है।
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जानकारों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में बाहरी लोगों का पूरा नेटवर्क है। इनके तार कानपुर, आगरा जैसे महानगरों के नर्सिंगहोम व निजी क्लीनिकों से जुड़े हैं। कार्डियोलॉजी के जो भी मरीज सैफई आते हैं, उन्हेें इन्हीं नर्सिंगहोम में रेफर करा दिया जाता है।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष उदयभान सिंह यादव ने कहा कि कार्डियोलॉजी विभाग छह महीनों से बंद है। यह चिंता का विषय है। जिस विवि के कुलाधिपति स्वयं मुख्यमंत्री हों और उसके हालात ऐसे हैं तो सूबे के अन्य अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराएंगे।