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मिडिल क्लास गर्भवती को नहीं भा रही ‘हौसला’
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Mon, 15 Aug 2016 12:07 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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इटावा। मध्यम वर्गीय परिवार की गर्भवतियों को हौसला पोषण योजना रास नहीं आ रही है। इस बात की तस्दीक सरकारी आंकड़े कर रहे हैं। योजना का शुरू हुए एक महीना बीत चुका है लेकिन अभी भी 62.44 प्रतिशत गर्भवती इस योजना से दूर हैं।
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गर्भवती महिलाओं को भोजन की पर्याप्त खुराक मिले और उन्हें समय पर जरूरी टीके लग जाएं, इसके लिए 15 जुलाई को हौसला पोषण योजना की शुरुआत हुई। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के सभी 1456 आंगनबाड़ी केंद्र पर गर्म भोजन की व्यवस्था कराई।
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इसके लिए प्रति गर्भवती पर सरकार 18 रुपये खर्च कर रही है। प्रधानों को भी योजना से जोड़ा गया है। ताकि पंचायत क्षेत्र की हर गर्भवती योजना का लाभ उठा सके। लेकिन यह कवायद पूरी तरह सफल नहीं हो रही।
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एक तिहाई गर्भवती महिलाओं ने ही केंद्रों का रुख किया है। जिले में 15502 गर्भवती महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत हैं। जिनमें से अभी तक 5823 ने ही योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्र पर जाकर भोजन किया है।
मध्यम वर्गीय परिवार की गर्भवती को आंगनबाड़ी कें द्र पर जाकर भोजन करने में एतराज है। इसे प्रतिष्ठा से जोड़ कर देखा जा रहा है। यहीं वजह है कि केंद्र पर जाने वाली महिलाओं की अपेक्षा न जाने वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
डीडीओ/प्रभारी डीपीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि अभी शत-प्रतिशत पंजीकृत गर्भवती महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्र पर नहीं पहुंच रहीं हैं। अगस्त महीने की रिपोर्ट से साफ है। खासकर मध्यम वर्गीय परिवार की गर्भवती महिलाएं अभी योजना से दूर हैं। इसके पीछे जो भी कारण हैं। उन्हें दूर करने के लिए गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग की जाएगी।