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विविधता में एकता की मिसाल है हिंदी

Sun, 19 Dec 2021 12:21 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 12:21 AM IST
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manoj sinha
इटावा। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि हिंदी विविधता में एकता की मिसाल है। जैसे देश की नदियां आकर समुद्र में समाहित होती हैं ठीक उसी प्रकार विभिन्न प्रांतों में बोली जाने वाली भाषाओं का संगम हिंदी भाषा में होता है। हिंदी हमारी संस्कृति की पहचान है। उन्होंने नई शिक्षा नीति में शिक्षण का माध्यम स्थानीय भाषाओं को बनाने की नीति लागू करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी अपनी भाषा में शिक्षा ग्रहण कर सकेगी। दक्षिण भारतीयों को हिंदी और उत्तर भारतीयों को तमिल, तेलगु, कन्नड़, डोंगरी, जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में अध्ययन करने पर उन्होंने जोर दिया।
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उपराज्यपाल शनिवार को इस्लामियां इंटर कालेज में आयोजित हिंदी सेवा निधि के सम्मान समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 43 फीसदी लोग हिंदी बोलते हैं। जबकि 8 फीसदी बंगाली, 6.86 फीसदी मराठी, 6.7 फीसदी तेलगु और 5.7 फीसदी लोग तमिल बोलते हैं। इसके अलावा गुजराती, डोंगरी, उर्दू बोलने वाले भी है। इन सब भाषाओं के लिए हिंदी को संपर्क की भाषा बनाने की पहल होनी चाहिए। इसके लिए हमें एक दूसरे की भाषाओं को सीखने की जरूरत है। आज वे जम्मू कश्मीर में संवैधानिक पद पर हैं। इसलिए वे भी वहां की डोगरी भाषा सीख रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा ही नहीं। हमारे देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीयता की पहचान है। अलग-अलग राज्यों में भाषाएं भले ही दूसरी हों पर उनकी भावना तो एक जैसी ही होती है। भक्तिकाल में चाहे तमिल में साहित्य लिखा गया हो अथवा हिंदी में भावना तो भक्ति प्रधान ही रही है।
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उन्होंने कहा कि कवि और साहित्यकार साहित्य सृजन से भावी पीढ़ी का हित करें। आज हिंदी भाषा में शब्दों की कमी को दूर करने की आवश्यकता है। एक भाषा के साहित्य को दूसरी भाषा में अनुवाद करने का काम आगे बढ़ाने की जरूरत है। अनुवाद दो भाषाओं के बीच पुल का काम करता है। इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना होगा। सबकी सहमति और सबके सहयोग से हिंदी भाषा आगे बढ़ी है। विज्ञान, विधि, चिकित्सा के क्षेत्र में हिंदी ने अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। हिंदी के साथ सभी भाषाओं का समंवय स्थापित करने की आवश्यकता है।
प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि निज भाषा उन्नत कैसे हो उच्चस्तर पर कैसे पहुंचे इसके लिए समाज को विचार करना होगा। वर्तमान परिस्थितियां भाषाओं की सीमाएं लांघ चुकी है। इटावा आकर उन्हें लघु भारत के दर्शन हुए। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से साहित्य मनीषी आए हैं। कवियों ने हमेशा देश के शौर्य को जागृत कर समाज में मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है। तमंचा, बंदूक से भी ज्यादा गंभीर प्रहार करने की क्षमता भाषा में होती है। हिंदी भाषा संस्कार और विदेशी भाषा प्रदर्शन है। हिंदी को मजबूत करें।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश हजारों फैसले हिंदी में दे रहे हैं। न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्ता ने इस परिपाटी की शुरूआत की थी। आज उसका अनुसरण हो रहा है। हिंदी में सभी भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करने की क्षमता है।
इस मौके पर हिंदी सेवा निधि के महासचिव प्रदीप कुमार गुप्ता ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। समारोह में जम्मू कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल, एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह, जिला जज उमेश शर्मा, डीएम श्रुति सिंह, एसएसपी जयनारायण सिंह, सांसद देवेंद्र सिंह भोले, विधायक सरिता भदौरिया, पूर्व चेयरमैन फुरकान अहमद, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विजय शुक्ला, शासकीय अधिवक्ता शिवकुमार शुक्ला भी मौजूद रहे।
इटावा। कार्यक्रम में पहुंचे फिल्म अभिनेता पद्मश्री मनोज नवनीत जोशी ने कहा कि ओटीटी(मनोरंजन के अलग-अलग एप) से फिल्मों को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि अन्य मनोरंजन माध्यमों की तरह ही ओटीटी भी अपना दर्शक वर्ग बना लेगा। समारोह में उन्हें कुमुदभूषण कला संस्कृति सम्मान प्रदान किया गया।
अभिनेता मनोज जोशी ने कहा कि कोरोना सिर्फ बॉलीवुड नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चुनौती है। हालांकि भारत सरकार ने इस मामले को बहुत अच्छी तरह से संभाला। कहा कि कोरोना संकट से जिस तरह से बाकी सेक्टर धीरे-धीरे उबर रहे हैं, उसी तरह से बॉलीवुड भी उबर जाएगा। उन्होंने कहा कि फरवरी आते-आते बॉलीवुड अपने पुराने ढर्रे पर लौट आएगा। ओटीटी प्लेटफार्म के बारे में मनोज जोशी ने कहा कि पहले नाटकों का दौर था, फिर फिल्मों का दौर आया फिर टीवी का और अब ओटीटी का। मनोरंजन के सभी माध्यम समाज में अभी भी मौजूद हैं। किसी से किसी को खतरा नहीं है।

उन्होंने कहा कि वीकेंड में परिवार के साथ फिल्म देखने की जो लोगों की आदत है वह कभी नहीं बदलेगी। इसलिए ओटीटी से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि ओटीटी पर जो वीभत्स और अश्लीलता के आरोप लगते हैं वह भी धीरे-धीरे ठीक हो जाएंगे। कहा कि सभी ओटीटी प्लेटफार्म ऐसे नहीं हैं कई अच्छे कंटेंट लेकर आ रहे हैं और इसमें भी लोगों को रोजगार मिल रहा है।
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