{"_id":"5749f3774f1c1b2f07692091","slug":"lord-becomes-happy-by-faith","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रद्धा और विश्वास से प्रसन्न होते शिव ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रद्धा और विश्वास से प्रसन्न होते शिव
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Sun, 29 May 2016 01:07 AM IST
विज्ञापन
शहर के घटिया मिश्रान मोहल्ले में शिवपुराण कथा सुनाते महंत राधेश्याम व्यास।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करनपुरा-घटिया मिश्रान स्थित श्रीधाम में चल रही शिव महापुराण ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन शनिवार को शिवकथा मर्मज्ञ, संत प्रवर महंत राधेश्याम व्यासजी महाराज ने कहा कि शिव की महिमा अपरंपार है, वे आशुतोष हैं। यानी सहजदाता और तत्काल प्रसन्न होने वाले देवों के देव महादेव हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि शिव को सोमवार व प्रदोष तिथि प्रिय है। साधना, उपासना या पूजा के लिए श्रद्धा व विश्वास परम आवश्यक है, क्योंकि श्रद्धा ही साक्षात प्रधान प्रकृति स्वरूपा गौरी है और विश्वास ही महादेव। ‘ऊं नम: शिवाय’ यह पंचाक्षर मंत्रोच्चार व जलाभिषेक साधारण विधान से लेकर रुद्राभिषेक व रुद्राष्टाध्यायी पाठ तक का विस्तृत विधान है। व्यासजी ने शिवलिंग के रहस्य को उद्घाटित करते हुए बताया कि मुख्यत: पांच प्रकार के शिवलिंग वर्णित हैं, स्वयंभू लिंग, जो भूमि खनन में स्वत: प्रकट हों। विन्दु लिंग वह है जो पूजन के लिए भूमि या कागज पर अंकित किया जाए। अचल प्रतिष्ठित लिंग वह है जिसकी विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा हुई हो।
विज्ञापन
जबकि चर-लिंग वह है जिसे कहीं भी ले जाया जा सके। लिंग का पंचम भेद ‘गुरु लिंग’’है, जिसे दीक्षा देने वाले सद्गुरु के रूप में माना जाता है। ‘स्त्रियों को शिव पूजा का अधिकार नहीं है’ जैसी भ्रांति को मिथ्या सिद्ध करते हुए व्यासजी ने कहा कि पार्वती, सीता, सावित्री, अहिल्या, मन्दोदरी आदि शिवोपासिका महिलाओं के नाम पौराणिक आख्यानों में मिलते हैं। उन्होंने बताया कि नारी के रजस्वला होने की स्थिति में चार दिन तक स्त्रियों द्वारा पूजा वर्जित है। व्यासजी महाराज ने निर्गुण शिव और सगुण शंकर को अभेद बुद्धि से देखने पर जोर देते हुए कहा- ‘अगुनहिं सगुनहिं नहिं कछु भेदा।’ व्यास जी ने उपस्थित श्रद्धालु शिव भक्तों को कालातीत ‘महामृत्युंजय मंत्र’ के महत्व व प्रभाव भी बताया। आयोजक बल्देव बिहारी मिश्र एवं मगन बिहारी मिश्र सहित सभी श्रद्धालु भक्तों ने तन्मय होकर कथा श्रवण किया।
विज्ञापन