{"_id":"6331f2a9eb3c8759931bbd5c","slug":"lion-safari-on-paraytan-manchitra-but-panchnad-is-waiting-etawah-news-knp72029094","type":"story","status":"publish","title_hn":"लॉयन सफारी तो चमकी पर पर्यटन की बाकी योजनाएं नहीं पकड़ सकीं रफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लॉयन सफारी तो चमकी पर पर्यटन की बाकी योजनाएं नहीं पकड़ सकीं रफ्तार
विज्ञापन
इटावा। करीब सात साल पहले शहर में लॉयन सफारी शुरू होने के बाद जिले को पर्यटन के मानचित्र पर पहचान तो मिली लेकिन पचनद संगम इससे अछूता है।
2012 में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लायन सफारी बनवाने के बाद जिले को देश के पर्यटन मानचित्र में स्थान मिला है। प्रदेश का ये पहला सफारी पार्क है। यहां 17 एशियाई बब्बर शेर और शेरनियां होने के साथ ही एक शावक भी है। यहां विदेशी पर्यटक भी घूमने आते हैं। प्रतिदिन औसतन करीब 400 पर्यटक आते हैं। त्योहारी सीजन में ये संख्या डेढ़ हजार तक पहुंच जाती है।
अब यहां एक बब्बर शेर और आठ भालू लाने की तैयारी है। उपनिदेशक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पर्यटकों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। वहीं पचनद संगम को पर्यटन स्थल बनाने के लिए प्रयास तो हुए लेकिन ये आगे नहीं बढ़े। इसी तरह, चकरनगर कस्बे के राजा निरंजन सिंह और भरे स्टेट के राजा रूप सिंह के किले को पर्यटन स्थल बनाने की भी मांग उठी, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।
आयुर्वेद सैंड बाथ के लिए जगह चिह्नित नहीं
पर्यटन विभाग और आयुर्वेद विभाग के संयुक्त प्रयास से चंबल किनारे रेत में सैंड बाथ शुरू करने की योजना है। इसके लिए दो माह पहले चंबल की रेत में ट्रायल भी किया जा चुका है। सैंड बाथ कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. कमल कुशवाहा ने बताया कि मुख्यालय से पत्राचार चल रहा है। जमीन की तलाश की जा रही है। उम्मीद है जनवरी तक इस बाथ का लोगों का लाभ मिलने लगेगा। उन्होंने बताया कि इससे कई बीमारियों का उपचार भी होता है। चंबल फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. शाह आलम ने बताया कि पचनद संगम को यदि पर्यटन के रूप में विकसित किया जाए तो लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
2012 में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लायन सफारी बनवाने के बाद जिले को देश के पर्यटन मानचित्र में स्थान मिला है। प्रदेश का ये पहला सफारी पार्क है। यहां 17 एशियाई बब्बर शेर और शेरनियां होने के साथ ही एक शावक भी है। यहां विदेशी पर्यटक भी घूमने आते हैं। प्रतिदिन औसतन करीब 400 पर्यटक आते हैं। त्योहारी सीजन में ये संख्या डेढ़ हजार तक पहुंच जाती है।
अब यहां एक बब्बर शेर और आठ भालू लाने की तैयारी है। उपनिदेशक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पर्यटकों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। वहीं पचनद संगम को पर्यटन स्थल बनाने के लिए प्रयास तो हुए लेकिन ये आगे नहीं बढ़े। इसी तरह, चकरनगर कस्बे के राजा निरंजन सिंह और भरे स्टेट के राजा रूप सिंह के किले को पर्यटन स्थल बनाने की भी मांग उठी, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।
विज्ञापन
आयुर्वेद सैंड बाथ के लिए जगह चिह्नित नहीं
पर्यटन विभाग और आयुर्वेद विभाग के संयुक्त प्रयास से चंबल किनारे रेत में सैंड बाथ शुरू करने की योजना है। इसके लिए दो माह पहले चंबल की रेत में ट्रायल भी किया जा चुका है। सैंड बाथ कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. कमल कुशवाहा ने बताया कि मुख्यालय से पत्राचार चल रहा है। जमीन की तलाश की जा रही है। उम्मीद है जनवरी तक इस बाथ का लोगों का लाभ मिलने लगेगा। उन्होंने बताया कि इससे कई बीमारियों का उपचार भी होता है। चंबल फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. शाह आलम ने बताया कि पचनद संगम को यदि पर्यटन के रूप में विकसित किया जाए तो लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
विज्ञापन