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Etawah News: खरीफ फसलों पर बरसी संजीवनी, हाल की बोआई संकट में

Tue, 04 Aug 2026 11:14 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:14 PM IST
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Lifeline for Kharif crops; recent sowing in jeopardy.
इटावा/चकरनगर। जिले में सोमवार रात से शुरू हुई बारिश मंगलवार को दिनभर रुक-रुककर जारी रहने से मौसम सुहावना बना रहा। लगातार बारिश ने धान सहित पहले से बोई गई खरीफ फसलों के लिए संजीवनी का काम किया है। हालांकि, हाल ही में बोआई करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई स्थानों पर खेतों में जलभराव से बीजों के सड़ने और अंकुरण प्रभावित होने की आशंका है। चकरनगर, सहसों, लखना, भरथना, बसरेहर, जसवंतनगर, ताखा और बकेवर सहित कई ग्रामीण इलाकों में अच्छी बारिश हुई। किसानों के अनुसार, धान के लिए यह वर्षा बेहद लाभदायक है। बाजरा, अरहर, तिल और मूंग जैसी खरीफ फसलों को भी पर्याप्त नमी मिली है, जिससे उनकी पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है। लंबे समय से वर्षा का इंतजार कर रहे किसानों ने राहत की सांस ली है।
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हाल ही में बोआई करने वाले किसानों के खेतों में पानी भरने से बीज सड़ने का खतरा है। यदि अगले एक-दो दिनों में पानी नहीं निकला तो उन्हें दोबारा बोआई करनी पड़ सकती है। इससे बीज, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र कुमार ने जलभराव वाले खेतों में पानी की निकासी को प्राथमिकता देने को कहा है। उन्होंने किसानों को मौसम साफ होने पर खेतों का निरीक्षण कर ही दोबारा बोआई का निर्णय लेने की सलाह दी।
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बकेवर में सोमवार रात से हो रही बारिश से धान किसानों के चेहरे खिल गए हैं। किसानों ने धान की रोपाई का कार्य तेज कर दिया है। क्षेत्र में धान की रोपाई का काम 90 फीसदी तक पूरा हो चुका है। महेवा ब्लॉक में भी 80 से 90 फीसदी रोपाई हो चुकी है।
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शेष 10 से 20 फीसदी रोपाई अगले चार से छह दिन में पूरी होने की उम्मीद है। बारिश के साथ ही मंगलवार को किसान खेतों में धान की रोपाई में जुटे दिखाई दिए। सहायक विकास अधिकारी कृषि हर्ष कुमार ने बताया कि इस बारिश से किसानों को धान के लिए काफी फायदा होगा।

वहीं, हाल ही में डाले गए बाजरे के बीजों को इस बारिश से नुकसान की आशंका है। पिछले कुछ दिनों से बारिश न होने के कारण किसान बाजरे की बुआई कर रहे थे। जिन खेतों में एक-दो दिन पहले बाजरा बोया गया था, उनमें पानी भर गया है। इससे बाजरे के बीज सड़ने की आशंका है। किसानों को दोबारा बाजरा बोना पड़ सकता है। सहायक विकास अधिकारी कृषि हर्ष कुमार ने बताया कि एक-दो दिन पुरानी बोई गई बाजरा फसल को कुछ नुकसान संभव है। (संवाद)
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