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भाई की हत्या में उम्र कैद
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Tue, 26 Jan 2016 12:15 AM IST
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पिता के साथ मिलकर बड़े भाई की हत्या में छोटे भाई को कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ में पंद्रह हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जबकि इस मामले में दूसरे अभियुक्त पिता की सुनवाई के दौरान मौत होने पर उनकी फाइल बंद कर दी गई थी। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश जफीर अहमद की कोर्ट ने दिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता दयाशंकर शुक्ला ने बताया कि वादी पुत्तूलाल ने अपने ही गांव के फेरन सिंह पुत्र बच्चनलाल व करू उर्फ छबिनाथ पुत्र निवासी सहसारपुर के विरुद्ध सैफई थाने में 25 जून 2010 को तहरीर दी थी।
इसमें कहा गया था कि उसके गांव के फेरन सिंह के अपने बड़े लड़के जयराम उर्फ विलायती से काफी दिनों से संबंध खराब थे। आए दिन लड़ाई झगड़ा होता था। एक दूसरे को जैसे मरने मारने को आमादा रहते थे। 21 जून 2010 से विलायती कहीं लापता हो गया।
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जबकि उसी दिन से फेरन सिंह व उनका दूसरा बेटा करू लगातार अपने मक्के खेत में पानी लगा रहे हैं। रोज खेत को भर रहे हैं किसी को खेत के पास नहीं जाने दे रहे हैं। उनके खेत से बदबू आ रही है।
इस पर पुत्तूलाल ने दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। यह मामला अपर सत्र न्यायाधीश जफीर अहमद की अदालत में चल रहा था। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने करू उर्फ छबिनाथ को उम्रकैद व 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि दूसरे अभियुक्त फेरन सिंह की सुनवाई के दौरान मौत होने पर 8 जनवरी-14 को उनकी फाइल बंद कर दी गई थी।
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जिला शासकीय अधिवक्ता दयाशंकर शुक्ला ने बताया कि वादी पुत्तूलाल ने अपने ही गांव के फेरन सिंह पुत्र बच्चनलाल व करू उर्फ छबिनाथ पुत्र निवासी सहसारपुर के विरुद्ध सैफई थाने में 25 जून 2010 को तहरीर दी थी।
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इसमें कहा गया था कि उसके गांव के फेरन सिंह के अपने बड़े लड़के जयराम उर्फ विलायती से काफी दिनों से संबंध खराब थे। आए दिन लड़ाई झगड़ा होता था। एक दूसरे को जैसे मरने मारने को आमादा रहते थे। 21 जून 2010 से विलायती कहीं लापता हो गया।
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जबकि उसी दिन से फेरन सिंह व उनका दूसरा बेटा करू लगातार अपने मक्के खेत में पानी लगा रहे हैं। रोज खेत को भर रहे हैं किसी को खेत के पास नहीं जाने दे रहे हैं। उनके खेत से बदबू आ रही है।
इस पर पुत्तूलाल ने दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। यह मामला अपर सत्र न्यायाधीश जफीर अहमद की अदालत में चल रहा था। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने करू उर्फ छबिनाथ को उम्रकैद व 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि दूसरे अभियुक्त फेरन सिंह की सुनवाई के दौरान मौत होने पर 8 जनवरी-14 को उनकी फाइल बंद कर दी गई थी।