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‘श्रीकृष्ण ने लोगों के विश्वास को दृढ़ता प्रदान की’
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Tue, 05 Apr 2016 01:12 AM IST
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श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
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फ्रेंड्स कालोनी स्थित कैलाशधाम में हो रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक पं. अशोक जी महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ गोवर्धन पूजन का वर्णन किया। इस प्रसंग में बताया कि श्रीकृष्ण ने स्वयं गिरिराज के रूप में प्रकट होकर अपने लोगों के विश्वास को दृढ़ता प्रदान की।
उन्होंने कहा कि गिरिराज की महिमा अपरंपार है, जो गो-वर्धन यानी गौ संरक्षण, पालन और संवर्धन का संदेश देती है। कहा कि योगेश्वर कृष्ण ने इंद्र पूजा जैसी रूढ़िवादी परंपरा को तिलांजलि देकर गोवर्धन पूजन की ओर ब्रजवासियों को प्रेरित किया।
गोवर्धन पूजन से तिलमिलाए देवराज इंद्र ने ब्रजमंडल में प्रलयंकारी जलवृष्टि कर दी, एक सप्ताह तक अतिवृष्टि होती रही, भगवान कृष्ण ने गिरिराज को अपने बाए हाथ की कनिष्ठिका उंगली पर धारणकर ब्रजवासियों की रक्षा की।
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अन्तत: देवराज इंद्र को ईश्वरीय सत्ता के समक्ष नत मस्तक होना पड़ा और लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण की स्तुति की। कथावाचक ने कहा कि यह प्रसंग श्रीकृष्ण की प्रकृतिवादी लीला है।
कथा के अंत में मुख्य यजमान गिरिजा किशोर पांडेय ने सपत्नीक आरती कर प्रसाद वितरण किया। श्रीमद्भागवत कथा पांच अप्रैल तक होगी, छह अप्रैल को पूर्णाहुति के साथ भंडारा होगा।
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उन्होंने कहा कि गिरिराज की महिमा अपरंपार है, जो गो-वर्धन यानी गौ संरक्षण, पालन और संवर्धन का संदेश देती है। कहा कि योगेश्वर कृष्ण ने इंद्र पूजा जैसी रूढ़िवादी परंपरा को तिलांजलि देकर गोवर्धन पूजन की ओर ब्रजवासियों को प्रेरित किया।
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गोवर्धन पूजन से तिलमिलाए देवराज इंद्र ने ब्रजमंडल में प्रलयंकारी जलवृष्टि कर दी, एक सप्ताह तक अतिवृष्टि होती रही, भगवान कृष्ण ने गिरिराज को अपने बाए हाथ की कनिष्ठिका उंगली पर धारणकर ब्रजवासियों की रक्षा की।
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अन्तत: देवराज इंद्र को ईश्वरीय सत्ता के समक्ष नत मस्तक होना पड़ा और लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण की स्तुति की। कथावाचक ने कहा कि यह प्रसंग श्रीकृष्ण की प्रकृतिवादी लीला है।
कथा के अंत में मुख्य यजमान गिरिजा किशोर पांडेय ने सपत्नीक आरती कर प्रसाद वितरण किया। श्रीमद्भागवत कथा पांच अप्रैल तक होगी, छह अप्रैल को पूर्णाहुति के साथ भंडारा होगा।