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भट्ठों को नहीं मिला एनजीटी का आदेश
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बकेवर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने आदेश के बाद भी अभी ईंट भट्ठे काम कर रहे हैं। जिले के तकरीबन 23 ईंट-भट्ठों को बंद करने के का आदेश दिया है। हालांकि, ईंट-भट्ठा संचालकों का कहना है उन्हें भी नोटिस नहीं मिला।
एनजीटी ने प्रदूषण के चलते जिले के तकरीबन 23 ईंट-भट्ठों को बंद करने के लिए सूचीबद्ध किया है। जिसमें बकेवर क्षेत्र के दो भट्ठे भी शामिल हैं। लखना के पास स्थित एक ईंट-भट्ठे और हाईवे के किनारे बकेवर में स्थित दूसरा ईंट-भट्ठा है।
दोनों अभी चालू है। लखना के पास स्थित ईंट भट्ठे पर कच्ची ईंट अभी पकने के लिए नहीं लगाई गई थी। बरसात से पहले की पक्की हुई तकरीबन 10 से 12 लाख ईंट बिक्री के लिए रखी हुई हैं। जिसकी बिक्री जारी थी। ईंट पथाई वाले श्रमिक ईंट की पथाई का काम कर रहे थे।
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भट्ठा संचालक समिति के सदस्य सनत कुमार ने बताया कि अभी कोई नोटिस उन्हें नहीं मिला है। उनका भट्ठा सन् 1946 से लगातार चल रहा है। इस क्षेत्र में सबसे पुराना भट्ठा उनका है।
अखबारों से ही सूचना में मिली है। जनपद में सबसे अधिक जीएसटी भट्ठे ही अदा करते हैं जो करीब 15 लाख रुपये बनती है। कई लाख रुपये एडवांस के रूप में श्रमिकों को दे दिया है।
सिक्सलेन हाईवे के किनारे कोठी शेरपुर के सामने स्थित ईंट-भट्ठा पर ईंट पक रही थी। बिकने के लिए कुछ िदन बाद ईंट निकाली जाएगी, जबकि कई लाख पकी हुई ईंट भट्ठे पर रखी थी। श्रमिक ईंट की पथाई की जगह पर नई ईंट बनाने के लिए काम कर रहे थे।
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एनजीटी ने प्रदूषण के चलते जिले के तकरीबन 23 ईंट-भट्ठों को बंद करने के लिए सूचीबद्ध किया है। जिसमें बकेवर क्षेत्र के दो भट्ठे भी शामिल हैं। लखना के पास स्थित एक ईंट-भट्ठे और हाईवे के किनारे बकेवर में स्थित दूसरा ईंट-भट्ठा है।
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दोनों अभी चालू है। लखना के पास स्थित ईंट भट्ठे पर कच्ची ईंट अभी पकने के लिए नहीं लगाई गई थी। बरसात से पहले की पक्की हुई तकरीबन 10 से 12 लाख ईंट बिक्री के लिए रखी हुई हैं। जिसकी बिक्री जारी थी। ईंट पथाई वाले श्रमिक ईंट की पथाई का काम कर रहे थे।
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भट्ठा संचालक समिति के सदस्य सनत कुमार ने बताया कि अभी कोई नोटिस उन्हें नहीं मिला है। उनका भट्ठा सन् 1946 से लगातार चल रहा है। इस क्षेत्र में सबसे पुराना भट्ठा उनका है।
अखबारों से ही सूचना में मिली है। जनपद में सबसे अधिक जीएसटी भट्ठे ही अदा करते हैं जो करीब 15 लाख रुपये बनती है। कई लाख रुपये एडवांस के रूप में श्रमिकों को दे दिया है।
सिक्सलेन हाईवे के किनारे कोठी शेरपुर के सामने स्थित ईंट-भट्ठा पर ईंट पक रही थी। बिकने के लिए कुछ िदन बाद ईंट निकाली जाएगी, जबकि कई लाख पकी हुई ईंट भट्ठे पर रखी थी। श्रमिक ईंट की पथाई की जगह पर नई ईंट बनाने के लिए काम कर रहे थे।