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छात्रवृत्ति गबन के जांचकर्ता ही निकले आरोपी
Sat, 02 Feb 2019 11:18 PM IST
gaurav gaurav
इटावा
इटावा
Published by: gaurav gaurav
Updated Sat, 02 Feb 2019 11:18 PM IST
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आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 14.61 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति घोटाला मामले में गबन के जांचकर्ता ही आरोपी निकले। मामले की जांच तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी इंद्रा सिंह व बीएसए मो अल्ताफ कर रहे थे। मामले में 64 स्कूलों के प्रबंधक, प्रधानाचार्यों समेत इन दोनों को भी ईओडब्ल्यू ने आरोपी बनाया है।
इंद्रासिंह ने तो अपनी जांच के आधार पर 11 उन विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी, जो अस्तित्व में ही नहीं थे। पूरे मामले में कुल 83 विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। इनमें 18 मामले सिविल लाइन थाने में दर्ज कराए गए हैं।
वर्ष 2008-09 में कक्षा एक से 10 तक के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा, अल्पसंख्यक व सामान्य वर्ग के छात्र छात्राओं की स्कूलों में फर्जी संख्या दिखाकर छात्रवृत्ति हड़पने की बात सामने आई थी। जब यह मामला तत्कालीन डीएम जीएस प्रियदर्शी के संज्ञान में आया, तो उन्होंने कुल 116 विद्यालयों की जांच कराई।
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जांच का यह जिम्मा तत्कालीन जिला सेवायोजन अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, बीएसए, डीआईओएस, जिला समाज कल्याण अधिकारी को सौंपा गया था। जिला समाज कल्याण अधिकारी इंद्रा सिंह ने वर्ष 2009-10 के छात्रों का भौतिक सत्यापन करने के लिए 25 विद्यालयों की स्थलीय जांच की।
इनमें से 11 विद्यालय अस्तित्व में ही नहीं पाए गए थे। बाकी जांच कर्ताओं ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी। डीएम ने पूरा प्रकरण शासन को भेज दिया था। शासन से 6 मई 2010 को मामले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई। इसमें छात्रवृत्ति गबन का मामला सही पाया गया। इस मामले में सात विद्यालयों के खिलाफ एक अन्य रिपोर्ट वर्तमान समाज कल्याण अधिकारी शिशुपाल सिंह ने विभागीय डायरेक्टर के निर्देशानुसार गत नवंबर महीने में दर्ज कराई है। यह रिपोर्ट भी ईओडब्ल्यू से प्राप्त जांच के बाद हुई है।
इस तरह छात्रवृत्ति गबन के शुरुआती दायरे में आए कुल 116 स्कूलों में से ईओडब्लयू ने 64, तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी इंद्रासिंह ने 11 और वर्तमान जिला समाज कल्याण अधिकारी शिशुपाल सिंह ने सात विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। अब तक कुल 83 एफआईआर दर्ज हुई हैं।
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इंद्रासिंह ने तो अपनी जांच के आधार पर 11 उन विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी, जो अस्तित्व में ही नहीं थे। पूरे मामले में कुल 83 विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। इनमें 18 मामले सिविल लाइन थाने में दर्ज कराए गए हैं।
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वर्ष 2008-09 में कक्षा एक से 10 तक के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा, अल्पसंख्यक व सामान्य वर्ग के छात्र छात्राओं की स्कूलों में फर्जी संख्या दिखाकर छात्रवृत्ति हड़पने की बात सामने आई थी। जब यह मामला तत्कालीन डीएम जीएस प्रियदर्शी के संज्ञान में आया, तो उन्होंने कुल 116 विद्यालयों की जांच कराई।
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जांच का यह जिम्मा तत्कालीन जिला सेवायोजन अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, बीएसए, डीआईओएस, जिला समाज कल्याण अधिकारी को सौंपा गया था। जिला समाज कल्याण अधिकारी इंद्रा सिंह ने वर्ष 2009-10 के छात्रों का भौतिक सत्यापन करने के लिए 25 विद्यालयों की स्थलीय जांच की।
इनमें से 11 विद्यालय अस्तित्व में ही नहीं पाए गए थे। बाकी जांच कर्ताओं ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी। डीएम ने पूरा प्रकरण शासन को भेज दिया था। शासन से 6 मई 2010 को मामले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई। इसमें छात्रवृत्ति गबन का मामला सही पाया गया। इस मामले में सात विद्यालयों के खिलाफ एक अन्य रिपोर्ट वर्तमान समाज कल्याण अधिकारी शिशुपाल सिंह ने विभागीय डायरेक्टर के निर्देशानुसार गत नवंबर महीने में दर्ज कराई है। यह रिपोर्ट भी ईओडब्ल्यू से प्राप्त जांच के बाद हुई है।
इस तरह छात्रवृत्ति गबन के शुरुआती दायरे में आए कुल 116 स्कूलों में से ईओडब्लयू ने 64, तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी इंद्रासिंह ने 11 और वर्तमान जिला समाज कल्याण अधिकारी शिशुपाल सिंह ने सात विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। अब तक कुल 83 एफआईआर दर्ज हुई हैं।