आय-जाति के नौ हजार आवेदन अटके
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इटावा। लेखपालों की हड़ताल अब लोगों के लिए जी का जंजाल बनती जा रही है। सरकार मांगें मानने का तैयार नहीं है तो लेखपाल भी अड़े हैं। 23 अगस्त से शुरू हुई हड़ताल से राजस्व विभाग का काम ठप है। सबसे अधिक परेशानी छात्र-छात्राओं को हो रही है। जिनके लगभग नौ हजार आय-जाति के प्रमाण पत्र अटके हैं। यही हाल खसरा प्रमाण पत्र का है। खतौनी का कार्य कुछ तहसीलों में चल रहा है तो कुछ में ठप है। जमीन के मामलों से जुड़ी कई रिपोर्टें अधूरी पड़ी हैं। यूपी सरकार ने लेखपालों की हड़ताल को अवैध घोषित कर रखा है लेकिन लेखपालों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा और न ही प्रशासनिक स्तर पर उनके खिलाफ कोई कदम उठाए गए।
एक तरफ जिले भर के लेखपाल कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ परेशान लोग कचहरी और तहसीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। लेखपालों की हड़ताल से छात्र-छात्राओं के छात्रवृत्ति के आवेदन अटक गए हैं। पहले ये आवेदन 31 अगस्त तक जमा होने थे लेकिन 23 अगस्त से लेखपालों ने हड़ताल शुरू कर दी तो आय-जाति प्रमाण पत्र समय से जारी नहीं हो सके। इस पर छात्रवृत्ति फार्म जमा करने की तिथि बढ़ाकर 15 सितंबर कर दी गई। लेकिन लेखपालों की हड़ताल अब तक समाप्त नहीं हुई है। 30 अगस्त को लखनऊ में धरना-प्रदर्शन करने के बाद लेखपालों ने एक सितंबर से हड़ताल फिर शुरू कर दी।
जो 23 सितंबर तक चलेगी। ऐसे में छात्र-छात्राएं काफी परेशान हैं। तहसीलों में आय-जाति प्रमाण पत्र के आवेदनों के अंबार लग गए हैं। सदर तहसील में ही आय के 3942 और जाति 2865 आवेदनों पर लेखपालों की रिपोर्ट लगना बाकी है। इसी तरह भरथना आदि तहसीलों में भी हजारों आवेदन अधर में अटके हैं। इसके अलावा किसान भी हलाकान हैं। फसल की पैदावार से जुड़ा प्रमाण पत्र खसरा देने का काम ठप पड़ा है। यह खसरा लेखपाल ही देते हैं। हालांकि पारिवारिक विवरण से जुड़ी खतौनी जरूर अधिकांश तहसीलों से की दी जा रही है। सैफई तहसील में खतौनी का काम भी ठप है।
सदर तहसील में रजिस्ट्रार कानूनगो वीरेंद्र सिंह यादव इस मामले में सजग दिखे। यहां काउंटर पर संविदा कर्मी खतौनी देते मिले। गुरुवार को करीब पौने दो सौ कंप्यूटराइज्ड खतौनियां निकाली गईं।