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इटावाः अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भटकते हैं मरीज
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जिला पुरुष अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर बैठे मरीज। संवाद
- फोटो : ETAWAH
इटावा। जिले की आठ सीएचसी में सिर्फ एक में अल्ट्रासाउंड मशीन है। वह भी कई सालों से खराब पड़ी है। जिला पुरुष अस्पताल में एक रेडियोलॉजिस्ट की पोस्टमार्टम तो कभी वीआईपी ड्यूटी लगाए जाने से लोगों को बिना अल्ट्रासाउंड कराए लौटना होता है। मरीजों को मजबूरी में बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने पड़ते हैं।
जिले में जसवंतनगर, भरथना, सरसईनावर, राजपुर (चकरनगर), महेवा, बसरेहर, उदी और सैफई समेत आठ सामुदायिक केंद्र हैं। इनमें से सैफई में ही अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन वह सालों से खराब पड़ी है। रेडियोलॉजिस्ट का पद भी रिक्त है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती और पेट मर्ज से जुड़े मरीजों को सैफई आयुर्विज्ञान विवि और जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। संयुक्त जिला पुरुष और महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड मशीन है। पुरुष अस्पताल में शायद ही कभी सप्ताह में पूरे छह दिन अल्ट्रासाउंड हो पाता हो। एक मात्र रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पारितोष शुक्ला की कभी वीआईपी ड्यूटी तो कभी पोस्टमार्टम ड्यूटी लगा दी जाती है। ऐसे में यहां हर रोज आने वाले 50-60 मरीजों को आए दिन भटकना पड़ता है।
शनिवार को डॉ. पारितोष की कोर्ट में गवाही की वजह से अल्ट्रासाउंड की सेवाएं प्रभावित रही थीं। मरीजों को सोमवार को अल्ट्रासाउंड कराने की बात कहकर लौटा दिया गया था। सोमवार को भी सुबह पहुंचे मरीजों को अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटकता मिला। सीएमएस डॉ. एमएम आर्या ने बताया डॉ. पारितोष शुक्ला ने रविवार की रात इमरजेंसी विभाग में ड्यूटी की थी, ऐसे में वह सुबह नहीं आ सके। महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर महिलाओं की लाइन लगी थी। यहां पर रेडियोलॉजिस्ट की बजाए सोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रभात कुमार गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करते हैं। रोजाना 45 से 50 अल्ट्रासाउंड होते हैं।
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जिले में जसवंतनगर, भरथना, सरसईनावर, राजपुर (चकरनगर), महेवा, बसरेहर, उदी और सैफई समेत आठ सामुदायिक केंद्र हैं। इनमें से सैफई में ही अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन वह सालों से खराब पड़ी है। रेडियोलॉजिस्ट का पद भी रिक्त है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती और पेट मर्ज से जुड़े मरीजों को सैफई आयुर्विज्ञान विवि और जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। संयुक्त जिला पुरुष और महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड मशीन है। पुरुष अस्पताल में शायद ही कभी सप्ताह में पूरे छह दिन अल्ट्रासाउंड हो पाता हो। एक मात्र रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पारितोष शुक्ला की कभी वीआईपी ड्यूटी तो कभी पोस्टमार्टम ड्यूटी लगा दी जाती है। ऐसे में यहां हर रोज आने वाले 50-60 मरीजों को आए दिन भटकना पड़ता है।
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शनिवार को डॉ. पारितोष की कोर्ट में गवाही की वजह से अल्ट्रासाउंड की सेवाएं प्रभावित रही थीं। मरीजों को सोमवार को अल्ट्रासाउंड कराने की बात कहकर लौटा दिया गया था। सोमवार को भी सुबह पहुंचे मरीजों को अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटकता मिला। सीएमएस डॉ. एमएम आर्या ने बताया डॉ. पारितोष शुक्ला ने रविवार की रात इमरजेंसी विभाग में ड्यूटी की थी, ऐसे में वह सुबह नहीं आ सके। महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर महिलाओं की लाइन लगी थी। यहां पर रेडियोलॉजिस्ट की बजाए सोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रभात कुमार गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करते हैं। रोजाना 45 से 50 अल्ट्रासाउंड होते हैं।
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