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श्रवण बाधित प्रमाणपत्र बनवाने को भटक रहे दिव्यांग
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इटावा। जिला अस्पताल में एक अदद संविदा कर्मचारी की नियुक्ति न होने से 181 दिव्यांग श्रवण बाधित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कभी सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय तो कभी हैलट कानपुर के चक्कर लगा रहे हैं। कर्मचारी न होने से आडियोमीटर मशीन कक्ष में धूल फांक रही है।
ऐसा लगता है कि अस्पताल प्रशासन को इन दिव्यांगों पर जरा भी रहम नहीं आता। दिव्यांगोें की कानों की जांच के लिए जिला अस्पताल प्रशासन बहरा बना हुआ है। जिला अस्पताल में आडियोमीटरी कक्ष भी है आडियोमीटरी मशीन भी है। परंतु टेक्निीशियन न होने के वजह से एक साल से आडियोमीटरी कक्ष में लगी मशीन धूल फांक रही है। मूक बधिरों को इसके बाद भी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटकना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में नाक , कान व गला चिकित्सक के कक्ष के बगल में स्थित आडियोमीटरी कक्ष है। पूर्ण रूप से साउंड प्रूफ कक्ष में मशीन भी लगी है। उसे चलाने वाले टेक्नीशियन के न होने से मशीन ताले में बंद हैं। इसका खामियाजा मूक बधिर लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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कहने को सैफई स्थित मिनी पीजीआई में आडियोमीटरी मशीन और टेक्नीशियन दोनों हैं। ऐसे में लोग अपने बहरेपन की जांच कराने जाते हैं। जांच रिपोर्ट जब कान विशेषज्ञ देखते हैं तो समझ में न आने पर संबंधित व्यक्ति को जांच कराने के लिए हैलट कानपुर जाने की सलाह दे देते हैं।
जिला अस्पताल के नाक, कान और गला चिकित्सक डॉ. जेपी चौधरी का कहना है कि जिला अस्पताल में करीब एक साल से आडियोमीटरी मशीन लगी हुई है। टेक्नीशियन न होने की वजह से यह बंद पड़ी है। टेक्नीशियन उपलब्ध कराने के लिए सीएमओ तथा शासन स्तर पर हर माह पत्र लिखा जा रहा है। बताया रोजाना ही चार-पांच मरीज आते हैं। जिला अस्पताल में जांच न होने पर कुछ लोग सैफई चले जाते हैं। जांच कराने के बाद मरीज जो रिपोर्ट लेकर आते हैं वह आधी अधूरी होने की वजह से समझ में न आती हैं। इस पर मरीजों को हैलट कानपुर जाकर जाने की सलाह देते हैं।
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ऐसा लगता है कि अस्पताल प्रशासन को इन दिव्यांगों पर जरा भी रहम नहीं आता। दिव्यांगोें की कानों की जांच के लिए जिला अस्पताल प्रशासन बहरा बना हुआ है। जिला अस्पताल में आडियोमीटरी कक्ष भी है आडियोमीटरी मशीन भी है। परंतु टेक्निीशियन न होने के वजह से एक साल से आडियोमीटरी कक्ष में लगी मशीन धूल फांक रही है। मूक बधिरों को इसके बाद भी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटकना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में नाक , कान व गला चिकित्सक के कक्ष के बगल में स्थित आडियोमीटरी कक्ष है। पूर्ण रूप से साउंड प्रूफ कक्ष में मशीन भी लगी है। उसे चलाने वाले टेक्नीशियन के न होने से मशीन ताले में बंद हैं। इसका खामियाजा मूक बधिर लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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कहने को सैफई स्थित मिनी पीजीआई में आडियोमीटरी मशीन और टेक्नीशियन दोनों हैं। ऐसे में लोग अपने बहरेपन की जांच कराने जाते हैं। जांच रिपोर्ट जब कान विशेषज्ञ देखते हैं तो समझ में न आने पर संबंधित व्यक्ति को जांच कराने के लिए हैलट कानपुर जाने की सलाह दे देते हैं।
जिला अस्पताल के नाक, कान और गला चिकित्सक डॉ. जेपी चौधरी का कहना है कि जिला अस्पताल में करीब एक साल से आडियोमीटरी मशीन लगी हुई है। टेक्नीशियन न होने की वजह से यह बंद पड़ी है। टेक्नीशियन उपलब्ध कराने के लिए सीएमओ तथा शासन स्तर पर हर माह पत्र लिखा जा रहा है। बताया रोजाना ही चार-पांच मरीज आते हैं। जिला अस्पताल में जांच न होने पर कुछ लोग सैफई चले जाते हैं। जांच कराने के बाद मरीज जो रिपोर्ट लेकर आते हैं वह आधी अधूरी होने की वजह से समझ में न आती हैं। इस पर मरीजों को हैलट कानपुर जाकर जाने की सलाह देते हैं।