{"_id":"611676a28ebc3ee054698967","slug":"guideline-finalised-for-board-examination-center-etawah-news-knp6459741123","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानक पर खरे न उतरने वाले विद्यालय नहीं बन सकेंगे परीक्षा केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानक पर खरे न उतरने वाले विद्यालय नहीं बन सकेंगे परीक्षा केंद्र
विज्ञापन
इटावा। माध्यमिक शिक्षा परिषद की 2022 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्र बनाए जाने वाले विद्यालयों का भौतिक सत्यापन जिला स्तरीय समिति के माध्यम से कराया जाएगा। भौतिक सत्यापन के लिए शासन ने 29 बिंदुओं के मानक तय किए हैं।
निर्धारित बिंदुओं में विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं, सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता आदि को प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसके अलावा जिन विद्यालयों में कोविड प्रोटोकॉल के तहत परीक्षार्थियों को बैठाने के लिए पर्याप्त कक्षों की उपलब्धता नहीं होगी, उन्हें केंद्र नहीं बनाया जाएगा। परीक्षा केंद्रों से विद्यालय की दूरी मानक के अनुसार ही हो, इसके लिए प्रधानाचार्यों जरूरी निर्देश दिए गए हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद से अब परीक्षा केंद्रों का निर्धारण आनलाइन होता है। पहले विद्यालयों को 29 बिंदुओं की रिपोर्ट परिषद की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद डीआईओएस और जिलाधिकारी से नामित अधिकारी इनका भौतिक सत्यापन करेंगे। भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट फिर से परिषद की साइट पर अपलोड होगी। इसके बाद ही परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया जाएगा। आधू अधूरी सुविधाओं वाले विद्यालयों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जा सकता।
विज्ञापन
इटावा। विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के साथ विभाग ने 29 बिंदु तय किए है। विद्यालयों में शिक्षण कक्षों की संख्या, स्ट्रॉंगरूम में अलमारियों की संख्या, चहारदीवारी, अग्निशमन यंत्र और वैधता प्रमाणपत्र, मुख्य सड़क से स्कूल की दूरी, गेट पर सीसीटीवी कैमरा, सीसीटीवी में डीवीआर सुरक्षित रखने की समय सीमा, पानी, बिजली की उपलब्धता, कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार पर्याप्त कक्षों की संख्या आदि प्रमुख हैं।
कोविड प्रोटोकॉल के अनुुसार एक परीक्षार्थी को बैठने के लिए 36 वर्गफीट स्थान तय किया गया है। मानक पर खरे न उतरने वाले विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने के प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाएगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजू राणा ने बताया कि प्रधानाचार्यों को 29 बिंदुओं को समाहित करते हुए रिपोर्ट माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद जिला स्तरीय समिति में संबंधित एसडीएम और जिला स्तरीय शिक्षा अधिकारियों से भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। यह देखने में आया है प्रधानाचार्य जियो टैगिंग विद्यालय से न करके अन्यत्र स्थानों से कर देते हैं। इससे परीक्षा केंद्र से विद्यालय की दूरी स्पष्ट नहीं हो पाती। इस बार प्रधानाचार्य विद्यालय परिसर से ही जियो टैगिंग करें। यह कार्य हर हाल में 20 अगस्त तक पूरा करना होगा।
विज्ञापन
निर्धारित बिंदुओं में विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं, सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता आदि को प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसके अलावा जिन विद्यालयों में कोविड प्रोटोकॉल के तहत परीक्षार्थियों को बैठाने के लिए पर्याप्त कक्षों की उपलब्धता नहीं होगी, उन्हें केंद्र नहीं बनाया जाएगा। परीक्षा केंद्रों से विद्यालय की दूरी मानक के अनुसार ही हो, इसके लिए प्रधानाचार्यों जरूरी निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
माध्यमिक शिक्षा परिषद से अब परीक्षा केंद्रों का निर्धारण आनलाइन होता है। पहले विद्यालयों को 29 बिंदुओं की रिपोर्ट परिषद की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद डीआईओएस और जिलाधिकारी से नामित अधिकारी इनका भौतिक सत्यापन करेंगे। भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट फिर से परिषद की साइट पर अपलोड होगी। इसके बाद ही परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया जाएगा। आधू अधूरी सुविधाओं वाले विद्यालयों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जा सकता।
विज्ञापन
इटावा। विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के साथ विभाग ने 29 बिंदु तय किए है। विद्यालयों में शिक्षण कक्षों की संख्या, स्ट्रॉंगरूम में अलमारियों की संख्या, चहारदीवारी, अग्निशमन यंत्र और वैधता प्रमाणपत्र, मुख्य सड़क से स्कूल की दूरी, गेट पर सीसीटीवी कैमरा, सीसीटीवी में डीवीआर सुरक्षित रखने की समय सीमा, पानी, बिजली की उपलब्धता, कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार पर्याप्त कक्षों की संख्या आदि प्रमुख हैं।
कोविड प्रोटोकॉल के अनुुसार एक परीक्षार्थी को बैठने के लिए 36 वर्गफीट स्थान तय किया गया है। मानक पर खरे न उतरने वाले विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने के प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाएगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजू राणा ने बताया कि प्रधानाचार्यों को 29 बिंदुओं को समाहित करते हुए रिपोर्ट माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद जिला स्तरीय समिति में संबंधित एसडीएम और जिला स्तरीय शिक्षा अधिकारियों से भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। यह देखने में आया है प्रधानाचार्य जियो टैगिंग विद्यालय से न करके अन्यत्र स्थानों से कर देते हैं। इससे परीक्षा केंद्र से विद्यालय की दूरी स्पष्ट नहीं हो पाती। इस बार प्रधानाचार्य विद्यालय परिसर से ही जियो टैगिंग करें। यह कार्य हर हाल में 20 अगस्त तक पूरा करना होगा।