{"_id":"6ade4e30e9d1ce9a260cc5e5","slug":"girl-dies-due-to-viral-fever-etawah-news-c-216-1-etw1005-152077-2026-10-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etawah News: वायरल बुखार की चपेट में आने से बालिका की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etawah News: वायरल बुखार की चपेट में आने से बालिका की मौत
Mon, 26 Oct 2026 12:15 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Mon, 26 Oct 2026 12:15 AM IST
विज्ञापन
बसरेहर। क्षेत्र के चकवा बुजुर्ग गांव में वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ गया है। इसकी चपेट में आने से 11 वर्षीय किशोरी की इलाज के दौरान मौत हो गई। इससे गांव में बीमार लोगों में भय व्याप्त है। सूचना पर स्वास्थ्य टीम ने गांव में शिविर लगाकर लोगों की जांच की। साथ ही मरीजों को दवाओं का वितरण किया।
चकवा बुजुर्ग निवासी ब्रजेश कुमार की पुत्री दिव्या (11) को 19 अक्तूबर को बुखार आया था। परिजन उसे क्षेत्र के निजी अस्पताल में ले गए। यहां हुई जांच में उसे डेंगू पॉजिटिव बताकर उसका उपचार शुरू किया। इसके बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने दवाओं में स्टेरॉयड की अत्यधिक मात्रा दे दी, जिससे उसकी हालत और गंभीर हो गई।
23 अक्तूबर की सुबह जब उसकी हालत अधिक खराब हो गई तो डॉक्टरों ने उसे सैफई आयुर्विज्ञान विवि ले जाने की सलाह दी। परिजन गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इससे परिजन में कोहराम मच गया। परिजन ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले निजी अस्पतालों व पैथोलॉजी पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
विज्ञापन
रविवार को हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने चकवा बुजुर्ग गांव में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। बसरेहर के सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास सचान ने बताया कि गांव में कैंप लगाकर करीब 70 मरीजों की जांच की और दवाइयां वितरित कीं। शुरुआती जांच में सभी मरीज सामान्य वायरल फीवर से पीड़ित मिले हैं, डेंगू का एक भी मामला पुष्ट नहीं हुआ है।
मृत बच्ची के मामले में यह बात सामने आई है कि झोलाछाप और गलत उपचार के चक्कर में समय पर सही इलाज न मिलने से उसकी हालत बिगड़ गई थी। उन्होंने लोगों से अपील है कि वह झोलाछाप के चक्कर में न पड़ें, सीधे सरकारी अस्पताल आएं और अपनी सही जांच कराकर उचित इलाज करवाएं।
विज्ञापन
चकवा बुजुर्ग निवासी ब्रजेश कुमार की पुत्री दिव्या (11) को 19 अक्तूबर को बुखार आया था। परिजन उसे क्षेत्र के निजी अस्पताल में ले गए। यहां हुई जांच में उसे डेंगू पॉजिटिव बताकर उसका उपचार शुरू किया। इसके बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने दवाओं में स्टेरॉयड की अत्यधिक मात्रा दे दी, जिससे उसकी हालत और गंभीर हो गई।
विज्ञापन
23 अक्तूबर की सुबह जब उसकी हालत अधिक खराब हो गई तो डॉक्टरों ने उसे सैफई आयुर्विज्ञान विवि ले जाने की सलाह दी। परिजन गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इससे परिजन में कोहराम मच गया। परिजन ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले निजी अस्पतालों व पैथोलॉजी पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
विज्ञापन
रविवार को हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने चकवा बुजुर्ग गांव में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। बसरेहर के सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास सचान ने बताया कि गांव में कैंप लगाकर करीब 70 मरीजों की जांच की और दवाइयां वितरित कीं। शुरुआती जांच में सभी मरीज सामान्य वायरल फीवर से पीड़ित मिले हैं, डेंगू का एक भी मामला पुष्ट नहीं हुआ है।
मृत बच्ची के मामले में यह बात सामने आई है कि झोलाछाप और गलत उपचार के चक्कर में समय पर सही इलाज न मिलने से उसकी हालत बिगड़ गई थी। उन्होंने लोगों से अपील है कि वह झोलाछाप के चक्कर में न पड़ें, सीधे सरकारी अस्पताल आएं और अपनी सही जांच कराकर उचित इलाज करवाएं।