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बाढ़ प्रभावित गांवों में जनरेटर व मोमबत्तियां पहुंचीं, हुई रोशनी

Sat, 14 Aug 2021 06:23 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 14 Aug 2021 06:23 PM IST
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generators and candel sent to flood hit areas
इटावा। चकरनगर और बढ़पुरा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को अंधेरे और श्मशान घाट में गुजर-बसर करने का मुद्दा अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया, तो प्रशासनिक अफसर और जनप्रतिनिधि हरकत में आ गए हैं। शनिवार को अफसरों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कई गांवों में जनरेटर की व्यवस्था करा दी। साथ ही श्मशान घाट पर रह रहे परिवार को तहसील परिसर की खाली पड़े आवास में शिफ्ट कर दिया गया।
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यमुना व चंबल का जलस्तर बढ़ने से चकरनगर और बढ़पुरा क्षेत्र के कई गांव जलमग्न हो गए थे। लोगों के घर पानी में डूब गए थे। पुलिया और सड़कें पानी में बह गईं। बाढ़ के चलते गांवों की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी। पानी की भी व्यवस्था नहीं हो रही थी। अमर उजाला टीम ने बाढ़ प्रभावित बढ़पुरा और चकरनगर क्षेत्रों में
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जाकर लोगों को दुश्वारियों को देखा था। सरकारी मदद न मिलने से पॉलिथीन डालकर परिवार के साथ रह रहे थे। इन खबरों को अमर उजाला ने छह अगस्त 2021 प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद बिजली का मुद्दा
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भाजपा विधायक सरिता भदौरिया ने इटावा में मुख्यमंत्री की बैठक में उठाया था। मुख्यमंत्री के आदेश पर शुक्रवार को चकरनगर व बढ़पुरा के बाढ़ प्रभावित कई गांवों में जनरेटर की व्यवस्था प्रशासन ने की। मोमबत्तियां व सोलर लाइटें भी लोगों को दी गई हैं। चकरनगर में खुद प्लास्टिक की पन्नी डालकर रह रहे भूखे प्यासे लोगों को प्रशासन ने खाना-पानी मुहैया कराया।
चकरनगर के बाढ़ प्रभावित डिभोगी गांव में घर में समस्याएं होने की वजह से श्मशान घाट पर रहे रहे ज्ञान सिंह निषाद का मामला भी अमर उजाला ने 13 अगस्त के अंक में प्रकाशित किया। इसके बाद सांसद डा.रमाशंकर कठेरिया, राज्य सफाई आयोग के सदस्य कमल वाल्मीकि प्रशासनिक अफसरों के साथ शुक्रवार को ज्ञान सिंह व उनके परिवार का हाल जानने के लिए श्मशान घाट पहुंचे थे। सांसद व आयोग के सदस्य के नाराजगी जताने के बाद प्रशासन ने शुक्रवार देर रात ज्ञान सिंह को परिवार समेत श्मशान घाट से तहसील परिसर में बने एक खाली मकान में शिफ्ट कर दिया। साथ ही उसके खाने-पीने की भी व्यवस्था की है।
बाढ़ प्रभावित भरेह गांव में बिजली न होने का मुद्दा अमर उजाला ने उठाया। एसडीएम ने गांवों में जनरेटर व मोमबत्तियों की व्यवस्था कर दी है। इससे ग्रामीणों के लिए रोशनी व पानी की व्यवस्था हो गई। ग्रामीणों की समस्याओं का मामला प्रकाशित करने के लिए अमर उजाला को साधुवाद। - राघवेंद्र प्रताप सिंह, ग्राम प्रधान भरेह, चकरनगर
जनरेटर आने से काफी घरों को रोशनी व पानी की समस्या खत्म हो गई है। एसडीएम ने सरकारी तौर पर जनरेटर से लाइट की वैकल्पिक व्यवस्था की है। अमर उजाला में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप होने का समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने यह व्यवस्था की है। इसके लिए अमर उजाला का शुक्रिया। मनीष दीक्षित, निवासी हरौली गांव चकरनगर

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अमर उजाला के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी व स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को प्रकाशित करने का असर ही है कि प्रशासन ने जनरेटर, राहत सामग्री व दवाएं मुहैया कराई। इससे अब जिंदगी पटरी में आने लगी है। - विमला निषाद, निवासी डिभौली गांव, चकरनगर
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