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तीन मंजिला मकान की छत पर बनाया बगीचा
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लवेदी। जमीन में विशालकाय बाग, बगीचे तो बहुत स्थानों पर देखें होंगे, लेकिन मकान की छत का बगीचा कम ही स्थानों पर देखा होगा। जमीन नहीं है तो क्या हुआ पर्यावरण का प्रेम पूरा करने के लिए छत ही काफी है।
जहां मिट्टी को डलवाकर घास लगवाकर बगीचा बना दिया। ऐसा ही कुछ किया लखना कस्बे के मान खां मोहाल निवासी व्यापारी इंद्र कुमार जैन उर्फ लऊआ दद्दा ने। इंद्र कुमार ने अपने तीन मंजिले मकान की छत को बाग के रूप में तब्दील कर रखा है।
उस पर आयुर्वेदिक पौधों के अलावा सब्जी व फल फूल की भी खेती करते हैं। छत पर सीमेंट का गमला बनाकर उसमें फल व फूल को उगाकर उन्होंने एक मिसाल कायम की है। आसपास के लोग भी इस बगीचे को देखने के लिए पहुंचते हैं।
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इस काम में इंद्र कुमार जैन के पत्नी सुमन जैन व बेटा अंशुल जैन भी साथ देते हैं। इंद्र कुमार ने बताया कि बचपन से ही उन्हें पेड़-पौधों से काफी लगाव रहा है। प्लास्टिक की बोतलों में तरह-तरह के पौधे लगाते रहते थे।
पर्यावरण के प्रति दिन-प्रतिदिन उनका प्रेम बढ़ता चला गया। मकानों व सड़क या अन्य निर्माण कार्यों के लिए अंधाधुंध पेड़ों की कटाई शुरू हुई, तो वे चिंतित हो गए। जमीन कम पड़ने लगी तो उन्होंने अपने तीन मंजिले मकान की छत को ही बगीचा बना दिया।
तुलसी, अश्वगंधा, लेमन ग्रास भी उगा रहे
इंद्र कुमार पिछले कई सालों छत पर फल, फूल व सब्जी की खेती कर रहे हैं। उन्होंने सीमेंट के गमले बनवाए और प्लास्टिक के ड्रम को काटकर उसमें मिट्टी डाली। उसमें फल-फूल के पेड़ लगाए।
दीवार के किनारे क्यारियां बनाकर उसमें तुलसी, अश्वगंधा, लेमन ग्रास, कालसर्प, हल्दी, पपीता, गुच्छ के पौधों को लगाया। पौधों की देखभाल के लिए वे प्रतिदिन दो से तीन घंटे का समय देते हैं।
पौधों में पानी देने के साथ ही दवा का छिड़काव करते हैं। बताया कि इसके दो फायदे हैं, एक तो पर्यावरण संरक्षित रहेगा और फल-फूल व सब्जियां भी मिलेंगी।
छत पर बना पार्क है आकर्षण का केंद्र
पर्यावरण प्रेमी इंद्र कुमार ने फल और फूल के पौधों के साथ छत पर ही एक आधुनिक पार्क भी बना रखा है। इसमें फव्वारा और झूला आकर्षण का केंद्र हैं। जो भी उनका यह उद्यान देखने आता है वह झूले पर बैठकर और फव्वारे के पानी से अठखेलियां करने से नहीं रोक पाता।
वह बताते हैं कि जब कभी वह रोजमर्रा की जिंदगी से ऊब जाते हैं, तो इसी उद्यान में बैठकर प्रकृति और पर्यावरण का आनंद लेकर टेंशन मुक्त हो जाते हैं। कोरोना लॉकडाउन के दौरान परिवार व आस पड़ोसियों के साथ यहां बैठकर समय बिताया गया।
अलग ही मजा देती घर की हरी सब्जियां
इंद्र कुमार कहते हैं कि यदि आप चाहें तो अपने कम से कम चार सदस्यीय परिवार के लिए गमले व दीवार की क्यारी में ही सब्जी उगा सकते हैं। वह तो इस समय गोभी फूल व मैथी, पालक, मूली, टमाटर जैसी सब्जियां उगा रहे हैं।
बताते हैं कि घर के पुराने डिब्बे में मिट्टी भरकर धनिया उतनी ही उगा ही सकते हैं, जितना हमारे प्लेट के लिए चाहिए। इसके अलावा नींबू को भी गमले में पैदा किया जा सकता है। इस समय मिर्च उगी हुई हैं।
घर में आसानी से उगाई जा सकती सब्जी
जैन कहते हैं कि थर्मोकोल के डिब्बों में कोई भी सब्जी आराम से उगाई जा सकती है। करेला हो या फिर पपीता या फिर भिंडी या गोभी, हर कुछ हम छत या बालकनी में उगा सकते हैं। कहा कि बस ध्यान यही रखना है कि उस जगह तक धूप पहुंचती हो।
उनका कहना है कि इस तरह की खेती में लागत कुछ भी नहीं है। बताया कि 20 रुपये तक में एक थर्मोकोल के बड़े डिब्बे में मिट्टी डालकर कोई भी सब्जी का पौधा लगा सकते हैं। बस साल में एक बार गमले की मिट्टी बदल दी जाए।
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जहां मिट्टी को डलवाकर घास लगवाकर बगीचा बना दिया। ऐसा ही कुछ किया लखना कस्बे के मान खां मोहाल निवासी व्यापारी इंद्र कुमार जैन उर्फ लऊआ दद्दा ने। इंद्र कुमार ने अपने तीन मंजिले मकान की छत को बाग के रूप में तब्दील कर रखा है।
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उस पर आयुर्वेदिक पौधों के अलावा सब्जी व फल फूल की भी खेती करते हैं। छत पर सीमेंट का गमला बनाकर उसमें फल व फूल को उगाकर उन्होंने एक मिसाल कायम की है। आसपास के लोग भी इस बगीचे को देखने के लिए पहुंचते हैं।
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इस काम में इंद्र कुमार जैन के पत्नी सुमन जैन व बेटा अंशुल जैन भी साथ देते हैं। इंद्र कुमार ने बताया कि बचपन से ही उन्हें पेड़-पौधों से काफी लगाव रहा है। प्लास्टिक की बोतलों में तरह-तरह के पौधे लगाते रहते थे।
पर्यावरण के प्रति दिन-प्रतिदिन उनका प्रेम बढ़ता चला गया। मकानों व सड़क या अन्य निर्माण कार्यों के लिए अंधाधुंध पेड़ों की कटाई शुरू हुई, तो वे चिंतित हो गए। जमीन कम पड़ने लगी तो उन्होंने अपने तीन मंजिले मकान की छत को ही बगीचा बना दिया।
तुलसी, अश्वगंधा, लेमन ग्रास भी उगा रहे
इंद्र कुमार पिछले कई सालों छत पर फल, फूल व सब्जी की खेती कर रहे हैं। उन्होंने सीमेंट के गमले बनवाए और प्लास्टिक के ड्रम को काटकर उसमें मिट्टी डाली। उसमें फल-फूल के पेड़ लगाए।
दीवार के किनारे क्यारियां बनाकर उसमें तुलसी, अश्वगंधा, लेमन ग्रास, कालसर्प, हल्दी, पपीता, गुच्छ के पौधों को लगाया। पौधों की देखभाल के लिए वे प्रतिदिन दो से तीन घंटे का समय देते हैं।
पौधों में पानी देने के साथ ही दवा का छिड़काव करते हैं। बताया कि इसके दो फायदे हैं, एक तो पर्यावरण संरक्षित रहेगा और फल-फूल व सब्जियां भी मिलेंगी।
छत पर बना पार्क है आकर्षण का केंद्र
पर्यावरण प्रेमी इंद्र कुमार ने फल और फूल के पौधों के साथ छत पर ही एक आधुनिक पार्क भी बना रखा है। इसमें फव्वारा और झूला आकर्षण का केंद्र हैं। जो भी उनका यह उद्यान देखने आता है वह झूले पर बैठकर और फव्वारे के पानी से अठखेलियां करने से नहीं रोक पाता।
वह बताते हैं कि जब कभी वह रोजमर्रा की जिंदगी से ऊब जाते हैं, तो इसी उद्यान में बैठकर प्रकृति और पर्यावरण का आनंद लेकर टेंशन मुक्त हो जाते हैं। कोरोना लॉकडाउन के दौरान परिवार व आस पड़ोसियों के साथ यहां बैठकर समय बिताया गया।
अलग ही मजा देती घर की हरी सब्जियां
इंद्र कुमार कहते हैं कि यदि आप चाहें तो अपने कम से कम चार सदस्यीय परिवार के लिए गमले व दीवार की क्यारी में ही सब्जी उगा सकते हैं। वह तो इस समय गोभी फूल व मैथी, पालक, मूली, टमाटर जैसी सब्जियां उगा रहे हैं।
बताते हैं कि घर के पुराने डिब्बे में मिट्टी भरकर धनिया उतनी ही उगा ही सकते हैं, जितना हमारे प्लेट के लिए चाहिए। इसके अलावा नींबू को भी गमले में पैदा किया जा सकता है। इस समय मिर्च उगी हुई हैं।
घर में आसानी से उगाई जा सकती सब्जी
जैन कहते हैं कि थर्मोकोल के डिब्बों में कोई भी सब्जी आराम से उगाई जा सकती है। करेला हो या फिर पपीता या फिर भिंडी या गोभी, हर कुछ हम छत या बालकनी में उगा सकते हैं। कहा कि बस ध्यान यही रखना है कि उस जगह तक धूप पहुंचती हो।
उनका कहना है कि इस तरह की खेती में लागत कुछ भी नहीं है। बताया कि 20 रुपये तक में एक थर्मोकोल के बड़े डिब्बे में मिट्टी डालकर कोई भी सब्जी का पौधा लगा सकते हैं। बस साल में एक बार गमले की मिट्टी बदल दी जाए।