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Etawah News: फुट ओवरब्रिज की सीढ़ियां बंद, 800 मीटर की सजा भुगत रहे यात्री
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इटावा। तीन माह पहले इटावा जंक्शन के मुख्य फुट ओवरब्रिज (एफओबी) की सीढ़ियाें की स्लैब चिटकने पर उन्हें हटा दिया गया था। हालांकि, मरम्मत का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इस लापरवाही के कारण यह रास्ता पिछले तीन माह से पूरी तरह बंद है। ट्रेन पकड़ने आने वाले यात्रियों को लगभग 800 मीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।
बुजुर्गों, महिलाओं और भारी सामान लेकर चलने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति मुसीबत बन गई है। पुरानी और जर्जर हो चुकी स्लैब को पूरी तरह हटाने के बाद नीचे का ढांचा खुला पड़ा है। मरम्मत शुरू न होने से यात्रियों को प्लेटफॉर्म नंबर दो, तीन, चार और पांच पर जाने के लिए करीब 800 मीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इस अतिरिक्त दूरी के कारण कई यात्रियों की ट्रेन भी छूट जाती है। महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांगों को अन्य प्लेटफॉर्म पर पहुंचने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। यात्रियों की कई शिकायतों के बाद भी अफसरों ने सुध नहीं ली। इसका खामियाजा यात्रियों को लगातार उठाना पड़ रहा है। स्टेशन पर आने वाले लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
सेकेंड इंट्री के लिए एस्केलेटर भी नहीं
इटावा जंक्शन के सेकंड एंट्री (उत्तरी छोर) पर यात्रियों की सहूलियत के लिए स्वीकृत की गई स्वचालित सीढ़ियां (एस्केलेटर) अभी तक नहीं लग सकी हैं। बजट और फाइलों के फेर में यह योजना अधर में लटकी हुई है। मुख्य प्रवेश द्वार की सीढ़ियां बंद होने के बाद अब सेकंड एंट्री पर यात्रियों का दबाव बढ़ गया है, लेकिन वहां एस्केलेटर न होने से बुजुर्गों, बीमारों और गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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फोटो 20: रामप्रकाश
इटावा जंक्शन पर मिले यात्री राम प्रकाश (55) ने बताया कि उसे कानपुर जाना था। मुख्य सीढ़ियां बंद होने की वजह से पूरे स्टेशन का चक्कर काटना पड़ा। मेरी टांगों में दर्द रहता है, इतनी दूर पैदल चलना किसी सजा से कम नहीं था।
फोटो 21: विमला देवी
परिवार के साथ यात्रा कर रहीं विमला देवी ने कहा कि हाथों में भारी सूटकेस और साथ में बच्चे थे। अचानक पता चला कि रास्ता बंद है। दूसरे छोर से घूमकर जाने में हमारी ट्रेन छूटते-छूटते बची। रेलवे को इसे तुरंत ठीक कराना चाहिए।
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बुजुर्गों, महिलाओं और भारी सामान लेकर चलने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति मुसीबत बन गई है। पुरानी और जर्जर हो चुकी स्लैब को पूरी तरह हटाने के बाद नीचे का ढांचा खुला पड़ा है। मरम्मत शुरू न होने से यात्रियों को प्लेटफॉर्म नंबर दो, तीन, चार और पांच पर जाने के लिए करीब 800 मीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इस अतिरिक्त दूरी के कारण कई यात्रियों की ट्रेन भी छूट जाती है। महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांगों को अन्य प्लेटफॉर्म पर पहुंचने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। यात्रियों की कई शिकायतों के बाद भी अफसरों ने सुध नहीं ली। इसका खामियाजा यात्रियों को लगातार उठाना पड़ रहा है। स्टेशन पर आने वाले लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
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सेकेंड इंट्री के लिए एस्केलेटर भी नहीं
इटावा जंक्शन के सेकंड एंट्री (उत्तरी छोर) पर यात्रियों की सहूलियत के लिए स्वीकृत की गई स्वचालित सीढ़ियां (एस्केलेटर) अभी तक नहीं लग सकी हैं। बजट और फाइलों के फेर में यह योजना अधर में लटकी हुई है। मुख्य प्रवेश द्वार की सीढ़ियां बंद होने के बाद अब सेकंड एंट्री पर यात्रियों का दबाव बढ़ गया है, लेकिन वहां एस्केलेटर न होने से बुजुर्गों, बीमारों और गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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फोटो 20: रामप्रकाश
इटावा जंक्शन पर मिले यात्री राम प्रकाश (55) ने बताया कि उसे कानपुर जाना था। मुख्य सीढ़ियां बंद होने की वजह से पूरे स्टेशन का चक्कर काटना पड़ा। मेरी टांगों में दर्द रहता है, इतनी दूर पैदल चलना किसी सजा से कम नहीं था।
फोटो 21: विमला देवी
परिवार के साथ यात्रा कर रहीं विमला देवी ने कहा कि हाथों में भारी सूटकेस और साथ में बच्चे थे। अचानक पता चला कि रास्ता बंद है। दूसरे छोर से घूमकर जाने में हमारी ट्रेन छूटते-छूटते बची। रेलवे को इसे तुरंत ठीक कराना चाहिए।