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252 गांवों में बाढ़ की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Tue, 26 Jul 2016 11:52 PM IST
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- फोटो : pti
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बरसात के दिनों में बाढ़ के खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने इंतजाम शुरू कर दिए हैं। बाढ़ की आशंका में नदियों के किनारे बसे 252 गांव चिन्हित किए गए हैं। बाढ़ की स्थिति में राहत पहुंचाने के लिए 31 चौकियां व 15 पशु सेवा केंद्र बनाए गए हैं। नावों से लेकर राहत की अन्य सामग्री को बाढ़ चौकियों पर इकट्ठा किया जा रहा है।
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जिले में यमुना नदी के उफान से सबसे ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आते हैं।
हथिनी कुंड जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद से यमुना का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में बाढ़ की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। यमुना के अलावा चंबल, क्वारी, अन्हैया, सिरसा और सेंगर नदी से भी कई गांव बाढ़ की चपेट में आते हैं। जिले में पुरहा नदी भी बहती है। प्रशासनिक आंकलन में इस नदी से बाढ़ की आशंका नहीं जताई गई है।
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प्रशासन ने बाढ़ आने के बाद पानी उतरने वाले गांवों को बाढ़ प्रभावित माना है। निचले स्तर पर बसे गांवों में बाढ़ का पानी आने पर भरा रह जाता है। इन गांवों को जल प्लावित श्रेणी में रखा गया है। जिले में जल प्लावित 91 और बाढ़ प्रभावित 161 गांव चिन्हित किए गए हैं। इस तरह कुल 252 गांवों में बाढ़ की सूरत में बचाव एवं राहत की जरूरत रहेगी।
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इन गांवों में है बाढ़ की आशंका
इटावा तहसील में 51, भरथना में 12, सैफई में 17, जसवंतनगर में 44, चकरनगर में 36 व ताखा में एक गांव में बाढ़ की आशंका जताई गई है।
जल प्लावन की आशंका वाले गांव
इटावा तहसील में 40, भरथना में 12, सैफई में 24 व जसवंतनगर में 15 गांव जल प्लावित श्रेणी में रखे गए हैं।
बनाई गईं बाढ़ चौकियां
इटावा तहसील में आठ, भरथना में दो, सैफई में चार, जसवंतनगर में पांच , चकरनगर में 11 व ताखा में एक बाढ़ चौकी बनाई गई है।
बाढ़ चौकियों पर रहेगा यह सामान
केरोसिन, माचिस, भुना हुआ चना, नमक, लालटेन, गुड़, बांस, टार्च, लाइफ बेल्ट, लाल दवा, सत्तू, फर्स्ट एड बॉक्स व पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था।