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नहीं कराया बीमा, अब दैवीय आपदा के मुआवजे की आस

Sat, 08 Oct 2022 11:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Oct 2022 11:30 PM IST
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farmers dont take insurence need help from administration
इटावा। चार दिन हुई बारिश जिले के किसानों के लिए आफत बन गई। धान, बाजरा और उड़द की फसल को बड़ा नुकसान हुआ है। जिले के 2.85 लाख किसानों में सिर्फ 12,315 ने ही फसल बीमा कराया है। ऐसे में ज्यादातर किसान अब दैवी आपदा के तहत मुआवजे का मुंह ताक रहे हैं। प्रशासन ने इसका सर्वे शुरू कर दिया है।
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जिले में खरीफ के लगभग ढाई लाख किसान हैं। उन्होंने इस बार करीब 42 हजार हेक्टेयर में धान और 43 हजार हेक्टेयर में बाजरे की फसल की थी। 400 हेक्टेयर में उड़द की फसल है। 21 और 22 सितंबर को हुई बारिश में ही साढ़े आठ हजार हेक्टेयर बाजरा और 200 हेक्टेयर उड़द की फसल को नुकसान हुआ था।
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अब चार दिन में हुई बारिश से धान की करीब साढ़े छह हजार और बाजरे की 4300 हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है। उड़द की भी 100 हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है। फसल बीमा न कराने वाले किसानों को प्रशासन से राहत मिलने का इंतजार है। जल्द ही तहसील वार नुकसान का आकलन करके शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। वहीं कृषि विभाग भी सर्वे कराने में जुटा है।
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एसडीएम देवेंद्र कुमार पांडे ने बताया कि सर्वे कराया जा रहा है। इसके आधार पर मुआवजा देना सुनिश्चित किया जाएगा।
इस तरह मिल सकेगा फसल बीमा वाले किसानों को लाभ
फसल बीमा कंपनी के प्रबंधक प्रशांत कुमार ने बताया कि जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है और उन्होंने 24 घंटे के अंतराल में सूचना दे दी है। उन्हें पूरे नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा। बाद में सूचना देने वाले किसानों का भी सर्वे कराया जा रहा है। नुकसान के आंकलन के आधार पर मुआवजा राशि दी जाएगी।
दैवी आपदा के तहत इस तरह मिलता है मुआवजा
प्रशासन की ओर से सर्वे कराया जा रहा है। जिन तहसील क्षेत्रों में 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान मिलेगा, वहां के किसानों को दैवी आपदा का लाभ दिया जाएगा। नियमानुसार कृषि फसलों, पौधों वाली फसलों और वार्षिक फसलों पर असिंचित इलाके में बोए गए क्षेत्रफल तक 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाता है। वहीं सिंचित क्षेत्र में 13,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, बोए हुए क्षेत्रफल तक सीमित परंतु सहायता राशि एक हजार रुपये प्रति हेक्टेयर से कम नहीं दी जाएगी। उधर, सभी प्रकार की बहुवर्षीय फसलों 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाता है लेकिन दो हजार रुपये से कम सहायता राशि नहीं रहेगी।
बारिश होने से हो गए बर्बाद
कुड़रिया गांव के किसान पवन तिवारी ने बताया कि उन्होंने 30 बीघा धान और 12 बीघा में बाजरे की फसल बोई थी। बारिश होने से सारी फसल चौपट हो गई। बीमा नहीं कराया है। अब दैवी आपदा के तहत मुुआवजा मिलने की आस में हैं।

किसान राम मनोहर ने बताया कि उन्होंने 15 बीघा में धान की फसल की थी। चार दिन की बारिश में पूरी फसल बर्बाद हो गई। बीमा न कराने की वजह से मुआवजा नहीं मिल पाएगा। प्रशासन को दैवी आपदा घोषित करके सभी को मुआवजा देना चाहिए।
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