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प्रीमियम खूब लिया, क्षतिपूर्ति धेला नहीं दिया

Wed, 08 Apr 2015 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Wed, 08 Apr 2015 12:15 AM IST
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Farmer are not getting the claim of insurance

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई गेहूं, आलू व सरसों की फसल का तात्कालिक आकलन होने के बाद भी जिले के किसानों को बीमा क्लेम नहीं मिला है। बर्बाद किसान एक-एक पैसे को मोहताज हैं और फसल बीमा के तौर पर लाखों रुपये प्रीमियम लेने वाली एचडीएफसी एरगो कंपनी मुसीबत के वक्त कहीं नजर नहीं आ रही।

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कंपनी का कोई अधिकारी किसानों का दुख दर्द सुनने को मौजूद नहीं है। किसान अपने हक से वंचित हैं। जिले में रिजर्व बैंक के उस प्रावधान की घोर उपेक्षा हो रही है, जिसमें राज्य सरकार के अनुमानित आकलन के आधार पर तत्काल बीमा क्लेम दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
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जिले में रबी की फसल का कुल आच्छादन एरिया करीब 1 लाख 10 हजार हेक्टेयर रहा है। इसमें से करीब 99 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई गई। सरकारी आकलन के मुताबिक कुल 15,078 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 50 प्रतिशत से अधिक गेहूं की फसल बर्बाद हुई बताई गई है।
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यह आकलन खेत में खड़ी फसल को देखकर गाटा दर गाटा किया गया है। इसी के आधार पर शासन ने 14 करोड़ 50 लाख 22 हजार रुपये जिले को मुहैया कराए हैं। शेष करीब 85 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में 25 से 50 प्रतिशत तक गेहूं को नुकसान पहुंचा है।

इसी तरह आलू करीब साढ़े 17 हजार हेक्टेयर में बोया गया। गत फरवरी और मार्च के महीने में हुई बेमौसम बारिश की मार आलू किसानों पर भी पड़ी। तमाम आलू खुदने के बाद खेतों में सड़ गया, लेकिन सरकारी आकलन में आलू को 50 प्रतिशत से अधिक की क्षति नहीं दर्शाई गई।

जिले में रबी फसल के लिए गेहूं, आलू और सरसों/राई फसल बीमा के लिए सूचित हैं। लिहाजा केसीसी धारक कुल 7249 किसानों ने फसल बीमा कराया। प्रीमियम के तौर पर एचडीएफसी एरगो बीमा कंपनी को 58,95,926.74 रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन किसानों को अभी तक तात्कालिक बीमा क्लेम नसीब नहीं हुआ है।

जबकि कृषि, राजस्व और खुद बीमा कंपनी ने मिलकर फसल नुकसान का आकलन कर लिया है। फसल बीमा के जिले में नोडल अधिकारी/ उप कृषि निदेशक एसके सिंह के अनुसार नुकसान के आकलन से बीमा कंपनी को अवगत कराया जा चुका है।

वहीं राज्य सरकार जिले के किसानों को जिस 50 प्रतिशत से अधिक के नुकसान के आधार पर आर्थिक मदद मुहैया करा रही है। उसके अनुसार इटावा तहसील क्षेत्र में 65, भरथना के 92, सैफई के 60, जसवंतनगर के 100 और ताखा के 64 गांव इस नुकसान में शामिल हैं।

इन्हीं में फसल बीमा कराने वाले किसान भी हैं। नियमानुसार इन किसानों को इसी आकलन के अनुसार गेहूं, आलू व सरसों/राई के बीमा धन के सापेक्ष 50 प्रतिशत से अधिक का बीमा क्लेम तत्काल उपलब्ध कराना चाहिए, लेकिन अभी तक किसानों को एक धेला तक नहीं मिला है।


तत्काल इतनी क्षतिपूर्ति तो मिले
जिले में गेहूं के लिए 42,865 रुपये प्रति हेक्टेयर क्षतिपूर्ति निर्धारित है। न्यूनतम 50 प्रतिशत को ही आधार मानें तो किसान को तत्काल 21,432 रुपये बतौर क्लेम मिल जाने चाहिए।


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