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आर्थिक स्वार्थ की भावना से बढ़ा वायुमंडल परिवर्तन

Tue, 16 Feb 2016 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा Updated Tue, 16 Feb 2016 12:40 AM IST
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Extended economic selfishness atmospheric changes
बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय इटावा में जैव विविधता एवं वैकल्पिक ऊर्जा पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का सोमवार को समापन हो गया।  समापन सत्र का शुभारंभ नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ के अध्यक्ष निदेशक डॉ. सीएस नौटियाल ने किया।
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 इस मौके पर उन्होंने कहा कि हम अपने आर्थिक स्वार्थ में काम करते हैं। वायु मंडल में वर्तमान में हो रहा परिवर्तन इसी का नतीजा हैं। उन्होंने कहा कि भारत की 60 प्रतिशत आबादी कृषि पर अधारित है, जबकि 40 प्रतिशत आबादी को आधा पेट  भोजन प्राप्त होता है।
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इसीलिए आज जैव विविधता एवं वैकल्पिक ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण दिवस पर विचार करना आवश्यक है। डॉ. नौटियाल ने कहा कि जिस देश की जनता के अंदर देश प्रेम की भावना होती है, वह देश अधिक संपंन हैं।  विकसित एवं अविकसित देशों की सम्पन्नता का अंतर मौसम परिवर्तन की वजह से भी है।
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इसीलिए हमें मौसम परिवर्तन के कारणों पर विचार करते हुए देश प्रेम की भावना से कार्य करना चाहिए। उन्होंने बुंदेलखंड में मूल्य संवर्द्धन कृषि करने का सुझाव दिया। एसएसआई लखनऊ के सीनियर साइंटिस्ट एवं विशेष आमंत्रित अतिथि डॉ. सीएल वर्मा ने वर्तमान में धरती को बचाने का संदेश दिया।


एनपीएल नई दिल्ली के रिटायर्ड साइंटिस्ट डॉ. एसएन सिंह ने मानव जीवन की सुरक्षा के लिए  वायुमंडल के संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया। नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव प्रो. राम किशोर ने  कहा कि हमें जल, भोजन एवं ऊर्जा शक्ति में आत्म निर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए।




जब तक हम आत्म निर्भर नहीं है तब तक हम पूर्ण विकास करने में सफल नहीं होंगे। डॉ. महेंद्र सिंह  ने जैवविविधता एवं वैकल्पिक ऊर्जा को सह सहयोगी बताया। महाविद्यालय के अधिष्ठाता एवं सेमिनार के अध्यक्ष प्रो. जेपी यादव ने जैव विविधता एवं वैकल्पिक ऊर्जा तथा उपशीर्षकों बायोफ्यूल, वैकल्पिक ऊर्जा तकनीकी, वेस्ट टू इनर्जी, वाटर मैनेजमेंट प्रक्टिसिस एवं एग्रो बायो-डाइवर्सिटी पर शोध पत्र प्रस्तुत किया।
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