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उरेंग गांव की गोशालाओं में गोवंश की मौत, कुत्ते ने नोंचा शव
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बकेवर। महेवा ब्लाक की गोशालाएं अव्यवस्थाओं से जूझ रही हैं। कई गोशालाओं में गोवंश भूख व प्यास से दम तोड़ रहे हैं। एक गोशाला के बाहर तो गोवंश के शव को कुत्ते नोंचते रहे।
अव्यवस्थाओं का आलम ये है कि गोशाला में नियुक्त कोई भी कर्मचारी वहां ड्यूटी पर मुस्तैद नजर नहीं आता है, अफसर जब गोशाला का निरीक्षण करने जाते हैं तो उन्हें कोई खामी नहीं दिखाई देती है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंशों को सुरक्षित रखने के लिए सभी जिलों में गोशालाओं का निर्माण कराया है। ताकि छुट्टा गोवंशों को गोशाला में रखकर उनके लिए चारे-पानी की व्यवस्था हो सके।
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इस काम में सरकार का करोड़ों रुपये खर्च हो रहा है, लेकिन गोशालाओं की स्थिति नहीं सुधर रही है। जिले की अधिकांश गोशालाओं में भी अव्यवस्थाओं के चलते गोवंश भूख व प्यास से मर रहे हैं।
ऐसा ही हाल ग्राम पंचायत उरेंग में बनी गोशाला का है। यहां गोवंश भूख-प्यास से चलते मर रहे हैं, लेकिन ग्राम पंचायत अधिकारी अनजान बने हैं। बेजुबान गोवंशों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
शनिवार को गोशाला के बाहर एक गोवंश का शव पड़ा था, जिसे कुत्ते नोंच कर रहे थे। इससे जाहिर है कि अफसर गोवंशों के प्रति कितने गंभीर हैं।
गोशाला में गोवंशों के लिए पर्याप्त भूसा की व्यवस्था भी नहीं है। कई गोवंश बीमार हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारी भी गोशालाओं में गोवंशों को नियमित रूप स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए नहीं जाते हैं।
इसी तरह हर्राजपुर गांव की गोशाला में करीब 15 गोवंश हैं। यहां भी पानी व हरे चारे की व्यवस्था नहीं है। भरईपुर की गोशाला में करीब 60 गोवंश है। इस गोशाला के मुख्य गेट पर ताला लगा था।
लुधियानी की गोशाला में मुख्य गेट पर मोम की चादर लगा दी गई है। ताकि, कोई भी व्यक्ति बाहर से अंदर बंद गोवंशो की स्थिति को न देख सके।
ग्राम पंचायत में स्थित गोशाला का संचालन एक ट्रस्ट को सौंपा गया है। गोशाला में कभी-कभार भूसा और चारे की समस्या हो जाती है। पिछले चार महीने से भूसा व चारे के लिए फंड नहीं मिला है। फिलहाल पर्याप्त मात्रा में गोशाला में चारा पानी की व्यवस्था है। फिर भी मामले को वह खुद देखेंगे। - सुधीर कुमार यादव, सचिव जिला पंचायत उरेंग
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अव्यवस्थाओं का आलम ये है कि गोशाला में नियुक्त कोई भी कर्मचारी वहां ड्यूटी पर मुस्तैद नजर नहीं आता है, अफसर जब गोशाला का निरीक्षण करने जाते हैं तो उन्हें कोई खामी नहीं दिखाई देती है।
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प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंशों को सुरक्षित रखने के लिए सभी जिलों में गोशालाओं का निर्माण कराया है। ताकि छुट्टा गोवंशों को गोशाला में रखकर उनके लिए चारे-पानी की व्यवस्था हो सके।
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इस काम में सरकार का करोड़ों रुपये खर्च हो रहा है, लेकिन गोशालाओं की स्थिति नहीं सुधर रही है। जिले की अधिकांश गोशालाओं में भी अव्यवस्थाओं के चलते गोवंश भूख व प्यास से मर रहे हैं।
ऐसा ही हाल ग्राम पंचायत उरेंग में बनी गोशाला का है। यहां गोवंश भूख-प्यास से चलते मर रहे हैं, लेकिन ग्राम पंचायत अधिकारी अनजान बने हैं। बेजुबान गोवंशों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
शनिवार को गोशाला के बाहर एक गोवंश का शव पड़ा था, जिसे कुत्ते नोंच कर रहे थे। इससे जाहिर है कि अफसर गोवंशों के प्रति कितने गंभीर हैं।
गोशाला में गोवंशों के लिए पर्याप्त भूसा की व्यवस्था भी नहीं है। कई गोवंश बीमार हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारी भी गोशालाओं में गोवंशों को नियमित रूप स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए नहीं जाते हैं।
इसी तरह हर्राजपुर गांव की गोशाला में करीब 15 गोवंश हैं। यहां भी पानी व हरे चारे की व्यवस्था नहीं है। भरईपुर की गोशाला में करीब 60 गोवंश है। इस गोशाला के मुख्य गेट पर ताला लगा था।
लुधियानी की गोशाला में मुख्य गेट पर मोम की चादर लगा दी गई है। ताकि, कोई भी व्यक्ति बाहर से अंदर बंद गोवंशो की स्थिति को न देख सके।
ग्राम पंचायत में स्थित गोशाला का संचालन एक ट्रस्ट को सौंपा गया है। गोशाला में कभी-कभार भूसा और चारे की समस्या हो जाती है। पिछले चार महीने से भूसा व चारे के लिए फंड नहीं मिला है। फिलहाल पर्याप्त मात्रा में गोशाला में चारा पानी की व्यवस्था है। फिर भी मामले को वह खुद देखेंगे। - सुधीर कुमार यादव, सचिव जिला पंचायत उरेंग