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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को पलीता लगाने में जुटे अधिकारी
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फोटो संख्या 13: मत्स्य कार्यालय में खाली पड़ी सहायक निदेशक की कुर्सी
- फोटो : ETAWAH
इटावा। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को धरातल पर पहुंचाने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर हैं। वही अधिकारी पलीता लगाने में लगे हुए हैं। सूत्रों से अनुसार सहायक निदेशक मत्स्य पदभार ग्रहण करने के बाद से नदारद हैं।
इस कारण प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना व राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में बजट आवंटन होने के बावजूद भी धरातल पर नहीं उतर पा रही हैै। विभाग के आलाधिकारी ही योजना को पलीता लगाने में लगे हैं।
कार्यालय सहायक निदेशक मत्स्य कर्मचारियों ने जून माह से वेतन न मिलने के कारण उप निदेशक मत्स्य को पत्र लिखकर अपनी व्यथा बताई है लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई अभी तक नहीं हुई।
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प्रदेश सरकार ने मछुआ समुदाय के लिए नया शासनादेश 2019 लागू किया है, इसके तहत एक सितंबर से नदियों के पट्टे आवंटित कर मछुआ समुदाय को रोजगार उपलब्ध कराने का जिम्मा विभाग पर है। जिसमें 18 दिन शेष हैं।
सहायक निदेशक मत्स्य के न होने के कारण पूरे जनपद में किसी भी तहसील में अभी तक किसी प्रकार की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। जनपद की छह तहसीलों में प्रवाहित नदियों के पट्टे से शासन को प्रति वर्ष डेढ़ से दो करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति होती है, लेकिन विभागीय अफसरों की लापरवाही के चलते इसकी हानि होने का अंदेशा है।
जानकारों के मानें, तो इस वर्ष बारिश अच्छी होने के कारण नदियों में बड़ी मात्रा में मछली की उपलब्धता है। एक सितंबर तक नदियों के पट्टा आवंटन की प्रक्रिया पूरी किए जाने से राजस्व में अच्छी खासी बढ़ोतरी होगी।
यमुना नदी को छोड़कर जनपद की सभी नदियां बरसाती हैं। बरसात के बाद पानी निकल जाने पर उनका पट्टा आवंटन किया जाना संभव नहीं है। इस समय नदियों में बड़ी मात्रा में बरसाती पानी उपलब्ध है।
सहायक निदेशक मत्स्य एनके अग्रवाल सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके स्थान पर सोनभद्र से विजय पाल को इटावा भेजा जा रहा है। जल्द ही वह चार्ज गृहण कर लेंगे। - डा.नुरुल हक, उपनिदेशक मत्स्य कानपुर
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इस कारण प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना व राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में बजट आवंटन होने के बावजूद भी धरातल पर नहीं उतर पा रही हैै। विभाग के आलाधिकारी ही योजना को पलीता लगाने में लगे हैं।
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कार्यालय सहायक निदेशक मत्स्य कर्मचारियों ने जून माह से वेतन न मिलने के कारण उप निदेशक मत्स्य को पत्र लिखकर अपनी व्यथा बताई है लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई अभी तक नहीं हुई।
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प्रदेश सरकार ने मछुआ समुदाय के लिए नया शासनादेश 2019 लागू किया है, इसके तहत एक सितंबर से नदियों के पट्टे आवंटित कर मछुआ समुदाय को रोजगार उपलब्ध कराने का जिम्मा विभाग पर है। जिसमें 18 दिन शेष हैं।
सहायक निदेशक मत्स्य के न होने के कारण पूरे जनपद में किसी भी तहसील में अभी तक किसी प्रकार की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। जनपद की छह तहसीलों में प्रवाहित नदियों के पट्टे से शासन को प्रति वर्ष डेढ़ से दो करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति होती है, लेकिन विभागीय अफसरों की लापरवाही के चलते इसकी हानि होने का अंदेशा है।
जानकारों के मानें, तो इस वर्ष बारिश अच्छी होने के कारण नदियों में बड़ी मात्रा में मछली की उपलब्धता है। एक सितंबर तक नदियों के पट्टा आवंटन की प्रक्रिया पूरी किए जाने से राजस्व में अच्छी खासी बढ़ोतरी होगी।
यमुना नदी को छोड़कर जनपद की सभी नदियां बरसाती हैं। बरसात के बाद पानी निकल जाने पर उनका पट्टा आवंटन किया जाना संभव नहीं है। इस समय नदियों में बड़ी मात्रा में बरसाती पानी उपलब्ध है।
सहायक निदेशक मत्स्य एनके अग्रवाल सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके स्थान पर सोनभद्र से विजय पाल को इटावा भेजा जा रहा है। जल्द ही वह चार्ज गृहण कर लेंगे। - डा.नुरुल हक, उपनिदेशक मत्स्य कानपुर