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नेत्रदान का संकल्प लेकर दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें
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फोटो संख्या 03- नेत्रदान पखवाड़ा के अंतर्गत कार्यशाला को संबोधित करते आईबैंक इंचार्ज डा ब्रजेश सि
- फोटो : ETAWAH
सैफई। उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के नेत्र रोग विभाग में 36वां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा चल रहा है। मंगलवार को पखवाड़े के 14वें दिन एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसका विषय नेत्रदान का संकल्प करें रहा। कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डा.रमाकांत यादव ने किया।
कुलपति ने कहा कि सभी लोग नेत्रदान के लिए आगे आएं। इसके साथ ही नेत्रदान का संकल्प लेने के साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। मृत्यु के बाद भी किसी की आंखों को रोशनी दी जा सकती है। यह बहुत बड़ी मानव सेवा है।
कार्यक्रम संयोजक प्रो.रवि रंजन ने बताया कि नेत्रदान और कार्निया प्रत्यारोपण के वर्तमान आंकडे़ बताते हैं कि देश में स्थित बेहद चिंताजनक है। देश में 25 लाख लोग दृष्टिहीनता के शिकार हैं।
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नेत्र रोग विभाग के फैकेल्टी एवं आई बैंक इंचार्ज डा. बृजेश सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के नेत्र रोग विभाग में कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से नेत्रदान के लिए पंजीकरण करा सकता है।
व्यक्ति के देहांत के छह घंटे के अंदर संबंधित आई बैंक को सूचना देना जरूरी होता है। उसकी आंख को निकालने के लिए टीम जाती है। इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक डॉ.आदेश कुमार, कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा, डॉ.एसपी सिंह, डॉ.पीके जैन, डॉ.सुनील कुमार, सहसंयोजक डॉ.रीना शर्मा, डॉ. मीनू बब्बर आदि रहीं।
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कुलपति ने कहा कि सभी लोग नेत्रदान के लिए आगे आएं। इसके साथ ही नेत्रदान का संकल्प लेने के साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। मृत्यु के बाद भी किसी की आंखों को रोशनी दी जा सकती है। यह बहुत बड़ी मानव सेवा है।
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कार्यक्रम संयोजक प्रो.रवि रंजन ने बताया कि नेत्रदान और कार्निया प्रत्यारोपण के वर्तमान आंकडे़ बताते हैं कि देश में स्थित बेहद चिंताजनक है। देश में 25 लाख लोग दृष्टिहीनता के शिकार हैं।
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नेत्र रोग विभाग के फैकेल्टी एवं आई बैंक इंचार्ज डा. बृजेश सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के नेत्र रोग विभाग में कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से नेत्रदान के लिए पंजीकरण करा सकता है।
व्यक्ति के देहांत के छह घंटे के अंदर संबंधित आई बैंक को सूचना देना जरूरी होता है। उसकी आंख को निकालने के लिए टीम जाती है। इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक डॉ.आदेश कुमार, कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा, डॉ.एसपी सिंह, डॉ.पीके जैन, डॉ.सुनील कुमार, सहसंयोजक डॉ.रीना शर्मा, डॉ. मीनू बब्बर आदि रहीं।