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कारगिल युद्ध में दुश्मनों को धूल चटाई, अब बदमाशों से ले रहे मोर्चा
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पुलिस की वर्दी में मान सिंह
- फोटो : ETAWAH
निवाड़ीकला। कारगिल युद्ध में दुश्मनों को धूल चटाने वाले सेना के जवान मानसिंह अब पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर रहकर बदमाशों से मोर्चा लेने के साथ ही समाज सेवा कर रहे हैं। वह बतौर सिपाही बकेवर थाने की अहेरीपुर पुलिस चौकी में तैनात हैं।
सिपाही मान सिंह सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं। वर्ष 1998 में 20 साल की उम्र में उन्होंने भारतीय सेना में बतौर सिपाही पदभार संभाला था। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद कारगिल का युद्ध छिड़ गया था।
उस दौरान उनकी 6 पैरा एयरबोन बटालियन को द्रास सेक्टर की मास्को वैली में तैनात किया गया था। वर्ष 2002 में उन्हें 10 सदस्यों की टीम में चुना गया और टीम को भारतीय और अमेरिका की संयुक्त प्रशिक्षण में एक महीने के लिए अमेरिका भेजा गया।
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वर्ष 2007 में इनका चयन भारत रूस संयुक्त प्रशिक्षण के लिए हुआ और रूस भेजे गए। शांति सेना के रूप में वर्ष 2015 में 6 माह के लिए दक्षिण अफ्रीका में रहे।
वर्ष 2018 में सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। वर्ष 2019 में उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण की। अब पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर तैनात रहकर वह समाज को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जम्मू कश्मीर के कई आपरेशन में थे शामिल
मानसिंह बताते है कि उन दिनों जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों का बोलबाला हुआ करता था। सेना लगातार नए-नए नामों से सर्च अभियान चलाती थी। उन्होंने ओपी रक्षक और ओपी पराक्रम आपरेशन में हिस्सा लिया। संसद पर हमले के दौरान उनकी बटालियन ओपी पराक्रम को दिल्ली भेजने के लिए तैयार कर दिया गया था।
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सिपाही मान सिंह सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं। वर्ष 1998 में 20 साल की उम्र में उन्होंने भारतीय सेना में बतौर सिपाही पदभार संभाला था। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद कारगिल का युद्ध छिड़ गया था।
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उस दौरान उनकी 6 पैरा एयरबोन बटालियन को द्रास सेक्टर की मास्को वैली में तैनात किया गया था। वर्ष 2002 में उन्हें 10 सदस्यों की टीम में चुना गया और टीम को भारतीय और अमेरिका की संयुक्त प्रशिक्षण में एक महीने के लिए अमेरिका भेजा गया।
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वर्ष 2007 में इनका चयन भारत रूस संयुक्त प्रशिक्षण के लिए हुआ और रूस भेजे गए। शांति सेना के रूप में वर्ष 2015 में 6 माह के लिए दक्षिण अफ्रीका में रहे।
वर्ष 2018 में सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। वर्ष 2019 में उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण की। अब पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर तैनात रहकर वह समाज को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जम्मू कश्मीर के कई आपरेशन में थे शामिल
मानसिंह बताते है कि उन दिनों जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों का बोलबाला हुआ करता था। सेना लगातार नए-नए नामों से सर्च अभियान चलाती थी। उन्होंने ओपी रक्षक और ओपी पराक्रम आपरेशन में हिस्सा लिया। संसद पर हमले के दौरान उनकी बटालियन ओपी पराक्रम को दिल्ली भेजने के लिए तैयार कर दिया गया था।