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वस्त्र उद्योग लगाने की कोशिशें बेकार

Thu, 11 Feb 2021 11:11 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Feb 2021 11:11 PM IST
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etawah news
फोटो संख्या 36 पावर लूम से आगे नहीं बढ़ सका इटावा का वस्त्र उद्योग - फोटो : ETAWHA
इटावा। प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिकट वन प्लान (ओडीओपी) योजना पूरे तीन साल प्लान में बनी रही। न कहीं वस्त्र उत्पादन की इकाई लगी और न ही कोई नए संसाधन जुटाए जा सके। अधिकारियों की बैठकों और विभिन्न योजनाओं में ऋण उपलब्ध कराने के अलावा कोई प्रगति नहीं दिखी। वस्त्र उद्योग को मजबूत बनाने के लिए कॉमन फेसिलिटी सेंटर बनाने की कोशिशें भी बेकार गई। आखिर कॉमन सर्विस सेंटर की जिम्मेदारी विभाग ने बुनकरों की समितियों के ऊपर ही डाल दी। फलस्वरूप उद्यम को प्रोत्साहित करने का कोई खाका ही तैयार नहीं हो सका। ऊपर से सूत की कीमतों में 20 से 25 फीसदी की वृद्धि ने पूरे व्यवसाय की ही कमर तोड़ कर दी। सूत की महंगाई बुनकरों की तबाही बन रही है।
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कॉमन फेसिलिटी सेंटर का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में
ओडीओपी में सबसे पहले कॉमन फेसिलिटी सेंटर (सीएफसी) बनाने की योजना तैयार हुई। इसमें एक निश्चित स्थान पर ही बुनकरों को वस्त्र उत्पाद निर्माण और विपणन, तकनीकी, लाइसेंस आदि की व्यवस्था की जानी थी। आरंभ में उद्योग विभाग ने इसके लिए औद्योगिक अस्थान सराय एसर में जगह निश्चित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा। औद्योगिक अस्थान में जगह कम होने के कारण शासन ने सीएफसी के इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया।
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10 हजार परिवार जुड़े हैं वस्त्र कुटीर उद्योग से
जिले में वस्त्र उत्पाद हैंडलूम और पावरलूम की व्यक्तिगत इकाइयां एवं सहकारी समितियां हथकरघा वस्त्र निर्माण एवं छपाई के कार्य में काफी समय से कार्यरत है। जिले में छोटी-बड़ी कुल 222 व्यक्तिगत सहकारी समितियां कार्यरत हैं। जिसमें करीब 2500 करघा और 7000 पावरलूम संचालित हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10 हजार परिवारों का भरण-पोषण होता है।
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बेडशीट की डिमांड विदेश में
इटावा। इटावा में गमछा, लुंगी, तौलिया, चादर और बेडशीट का निर्माण किया जाता है। यहां बना गमछा और बेडशीट दूसरे राज्यों यहां तक विदेशों में भी पसंद किया जाता है। इटावा से बनी बेडशीट सबसे ज्यादा जापान में एक्सपोर्ट होती है।
भुखमरी की ओर बढ़ रहे बुनकर
वस्त्र उद्योग से जुड़े फारुख अंसारी का कहना है कि बुनकरों को ओडीओपी से कोई लाभ नहीं मिल सका है। तीन साल से सिर्फ हवाई दावे किए जा रहे हैं। वस्त्र उद्योग से जुड़ा कोई कारखाना लगता तो व्यापार भी बढ़ता और जरूरतमंदों को रोजगार भी मिलता। परंतु इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। ऊपर से सूत के दामों में महंगाई ने पूरा बिजनेस ही चौपट कर दिया है। तैयार माल इतना महंगा है कि बाजार में खरीदार ही नहीं मिल रहे। बुनकर कंगाली और भुखमरी की हालत में पहुंच रहा है।
सरकार रियायतों की करे घोषणा
वस्त्र उत्पादों के एक्सपोर्ट से जुड़े शाहिबे आलम अंसारी ने कहा सूत के बढ़े दामों में तत्काल कमी की जरूरत है। सरकार को वस्त्र उद्योग के लिए रियायत पैकेज घोषित करना चाहिए। तभी यह व्यवसाय बचा रह सकता है। अन्यथा वस्त्र उद्योग पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। सूत के दामों में वृद्धि से एक्सपोर्ट पूरी तरह से बंद है। तैयार माल को बाजार नहीं मिला तो बुनकर तबाह हो जाएंगे।

सभी प्रयास किए गए: उपायुक्त उद्योग
उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार ने बताया कि शासन की ओडीओपी योजना में बेरोजगारों को ऋण दिलाया जाएगा। वस्त्र उत्पाद को प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रयास किए गए। ऋण वितरण में लक्ष्य की 75 फीसदी उपलब्धि हासिल हो चुुकी है। सीएफसी में किसी भी समिति ने प्रस्ताव ही नहीं दिया। वे अब भी तैयार हैं यदि कोई 20 सदस्यों की समिति बनाकर सीएफसी के लिए आवेदन करता है तो उद्यम स्थापित करने में पूरी सहायता की जाएगी।
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