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कोहरा व गलन से भोर में ठहर गया यातायात
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चकरनगर(इटावा)। शनिवार सुबह पांच बजे अचानक कोहरा होने व गलन भरी ठंड से यातायात ठहर सा गया। दो दिन से हो रही बूंदाबांदी व पछुआ हवाओं से सर्दी के कहर से आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो उठा। सुबह 10 बजे के बाद जब सूर्य देवता निकले तो लोगों ने राहत की सांस ली।
हाड़कंपाऊ सर्दी से इंसान ही नहीं पशु, पक्षी भी बेहाल हैं और आवारा पशु तो खुले में रात गुजारने को मजबूर हैं। कहावत के अनुसार पूस माह में सर्दी अपने पूरे यौवन पर है। निरंतर लुढ़कते पारा से चलते प्रात: काल सैर सपाटा व फर्राटा करने वाले वाहनों की संख्या मार्गों पर कम मिली। कोहरा में दृश्यता 50 मीटर ही रही गई। हालांकि दिन चढ़ने पर लोग रोजमर्रा के कामों को निकले और सर्दी से बचाव के लिए ज्यादातर लोग घरों में आग जलाकर या बिजली चलित यंत्रों के सहारे गर्माहट लेते दिखे।
खेतों में गेहूं की फसल को ठंड से बचने की जद्दोजहद कर कड़ाके की ठंड में किसान ठिठुरते हुए पानी लगा रहे हैं। वहीं सर्दी भरी रातों में फसलों की रखवाली करने वाले किसान तो आवारा जानवरों को खदेड़ने लिए सारी रात बर्फीली व ओस भरी फसलों के बीच आग के सहारे गुजारने को मजबूर हैं। जहां आदमी सर्दी से कारण घरों में दुबक कर बैठ रहा है वहीं किसान खेतों पर बने मचान पर ठिठुरते अपनी रात गुजार रहे हैं।
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हाड़कंपाऊ सर्दी से इंसान ही नहीं पशु, पक्षी भी बेहाल हैं और आवारा पशु तो खुले में रात गुजारने को मजबूर हैं। कहावत के अनुसार पूस माह में सर्दी अपने पूरे यौवन पर है। निरंतर लुढ़कते पारा से चलते प्रात: काल सैर सपाटा व फर्राटा करने वाले वाहनों की संख्या मार्गों पर कम मिली। कोहरा में दृश्यता 50 मीटर ही रही गई। हालांकि दिन चढ़ने पर लोग रोजमर्रा के कामों को निकले और सर्दी से बचाव के लिए ज्यादातर लोग घरों में आग जलाकर या बिजली चलित यंत्रों के सहारे गर्माहट लेते दिखे।
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खेतों में गेहूं की फसल को ठंड से बचने की जद्दोजहद कर कड़ाके की ठंड में किसान ठिठुरते हुए पानी लगा रहे हैं। वहीं सर्दी भरी रातों में फसलों की रखवाली करने वाले किसान तो आवारा जानवरों को खदेड़ने लिए सारी रात बर्फीली व ओस भरी फसलों के बीच आग के सहारे गुजारने को मजबूर हैं। जहां आदमी सर्दी से कारण घरों में दुबक कर बैठ रहा है वहीं किसान खेतों पर बने मचान पर ठिठुरते अपनी रात गुजार रहे हैं।
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