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झाड़ी वाले शिवजी करते हैं भक्तों की मनोकामना पूरी
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फोटो संख्या 02 - झाड़ियों के बीच में विराजमान शिवलिंग
- फोटो : ETAWAH
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निवाड़ीकला। सावन माह में भगवान शिव की पूजा अर्चना का महत्व अन्य दिनों की अपेक्षा बढ़ जाता है। ऐसे में क्षेत्र के सभी मंदिरों में शिव भक्तों का तांता लगा है। क्षेत्र में एक ऐसा शिवमंदिर है, जो झाड़ियों के बीच में स्थापित है। इसकी प्रसिद्धि आसपास के कई जनपदों तक है।
महेवा से दो किमी की दूरी में स्थित ग्राम आनेपुर के अंतिम छोर पर एक प्राचीन मंदिर स्थापित है। गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग पं.राधेश्याम दुबे बताते है कि अंग्रेजों के जमाने के जमींदार गुरु नारायण चौबे का यहां बाग था। इसमें पानी के लिए एक कुआं खुदवाया जा रहा था। इस दौरान 30 हाथ की गहराई पर भगवान शिव की पिंडी लोगों को दिखाई दी। दिलचस्प बात ये थी कि यह पिंडी अरगाह के साथ में थी। लोगों ने मंदिर बनवाने की कई बार कोशिश की गई। हर बार असफल हुए और अंत शिवजी अपने मूल स्थान झाड़ियों में ही स्थापित बने रहे। कुछ वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने शिवलिंग के आसपास की झाड़ियों को छोड़कर अन्य झाड़ियों को हटा दिया था। अब शिवलिंग के आसपास दो तीन झाड़ी ही बची हैं।
जानकारों की माने तो यह झाड़ी हीसिया नामक पेड़ की है। जो घने जंगलों में पाया जाता है। मंदिर के महंत बाबा गिरजेश्वर गिरी महाराज ने बताया कि झाड़ी वाले शिव मंदिर पर आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। यह सैकड़ों वर्ष पुराना मंदिर है। एक बार गांव के युवकों ने शिवलिंग को उखाड़ने की कोशिश की थी लेकिन वह चोटिल होकर वही गिर गए।
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दूसरे जनपदों से आते है भक्त ..
झाड़ी वाले महादेव मंदिर में प्रत्येक सोमवार को औरैया, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, भिंड के लोग भी पूजा अर्चना करने आते हैं। सावन में यहां भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
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महेवा से दो किमी की दूरी में स्थित ग्राम आनेपुर के अंतिम छोर पर एक प्राचीन मंदिर स्थापित है। गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग पं.राधेश्याम दुबे बताते है कि अंग्रेजों के जमाने के जमींदार गुरु नारायण चौबे का यहां बाग था। इसमें पानी के लिए एक कुआं खुदवाया जा रहा था। इस दौरान 30 हाथ की गहराई पर भगवान शिव की पिंडी लोगों को दिखाई दी। दिलचस्प बात ये थी कि यह पिंडी अरगाह के साथ में थी। लोगों ने मंदिर बनवाने की कई बार कोशिश की गई। हर बार असफल हुए और अंत शिवजी अपने मूल स्थान झाड़ियों में ही स्थापित बने रहे। कुछ वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने शिवलिंग के आसपास की झाड़ियों को छोड़कर अन्य झाड़ियों को हटा दिया था। अब शिवलिंग के आसपास दो तीन झाड़ी ही बची हैं।
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जानकारों की माने तो यह झाड़ी हीसिया नामक पेड़ की है। जो घने जंगलों में पाया जाता है। मंदिर के महंत बाबा गिरजेश्वर गिरी महाराज ने बताया कि झाड़ी वाले शिव मंदिर पर आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। यह सैकड़ों वर्ष पुराना मंदिर है। एक बार गांव के युवकों ने शिवलिंग को उखाड़ने की कोशिश की थी लेकिन वह चोटिल होकर वही गिर गए।
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दूसरे जनपदों से आते है भक्त ..
झाड़ी वाले महादेव मंदिर में प्रत्येक सोमवार को औरैया, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, भिंड के लोग भी पूजा अर्चना करने आते हैं। सावन में यहां भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है।