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Etawah News: 10 साल में 24 नमूने, 11 लाख जुर्माना फिर भी नहीं थमा मौत का कारोबार
Thu, 24 Sep 2026 11:48 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Thu, 24 Sep 2026 11:48 PM IST
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फोटो 19::गोदाम में रखे मिले थे खाली टीम। आर्काइव
इटावा। खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोपों से घिरी रामलीला रोड स्थित बीआर ऑयल्स पर अब केंद्रीय लाइसेंस को लेकर भी कार्रवाई की तैयारी है। पिछले 10 वर्षों में इनकी दो फर्मों के 24 नमूने लिए जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश मानकों पर खरे नहीं उतरे। फर्म और उससे जुड़ी दूसरी फर्म पर अब तक करीब 11 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है। जुलाई में कारोबार पर रोक लगने के बाद गलत जानकारी देकर नया केंद्रीय खाद्य लाइसेंस लेने का आरोप है। खाद्य विभाग ने लाइसेंस निरस्त कराने के लिए 16 सितंबर को केंद्रीय टीम को रिपोर्ट भेजी है।
मामला छह मई को लिए गए राइस ब्रान ऑयल के नमूने से और गंभीर हो गया। जांच के दौरान टीम को नमूना लेने से रोकने का प्रयास किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दोबारा पहुंची टीम ने करीब 2500 लीटर तेल सीज कर नमूना प्रयोगशाला भेजा था। चार माह बाद आई रिपोर्ट में तेल की एसिड वैल्यू निर्धारित मानक 0.5 के मुकाबले 3.7 मिलीग्राम प्रति किलो के मुकाबले छह गुना से अधिक मिली। तेल में रैंसिडिटी यानी ऑक्सीकरण के कारण बासीपन और बदबू की भी पुष्टि हुई थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी राघवेंद्र वर्मा ने संचालक के खिलाफ एसीजीएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया है।
लाइसेंस में भी मिलीं कई खामियां
निरीक्षण में पैकर श्रेणी का लाइसेंस होने के बावजूद प्रतिष्ठान में पैकिंग मशीन और प्रयोगशाला नहीं मिली। स्टॉक का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं था। अलग-अलग ब्रांड के खाली टिन जरूर मिले। इन कमियों के चलते मई में लाइसेंस आंशिक रूप से निलंबित किया गया। सुधार न होने पर जुलाई में लाइसेंस निलंबित कर कारोबार पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद फर्म की ओर से केंद्रीय लाइसेंस लेकर कारोबार किया जा रहा था।
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कार्रवाई छिपाकर लिया नया लाइसेंस
सहायक आयुक्त खाद्य राजेश द्विवेदी के अनुसार केंद्रीय खाद्य लाइसेंस के लिए एफएसएसएआई पोर्टल पर आवेदक को यह जानकारी देनी होती है कि उसके खिलाफ पहले कोई कार्रवाई या नमूना लेने की स्थिति नहीं रही है। विभाग का आरोप है कि बीआर ऑयल्स ने पूर्व की कार्रवाई और नमूनों की जानकारी छिपाकर गलत तथ्यों के आधार पर नया केंद्रीय लाइसेंस हासिल किया। जिसके निलंबन के लिए विभाग की ओर से लगातार विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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मामला छह मई को लिए गए राइस ब्रान ऑयल के नमूने से और गंभीर हो गया। जांच के दौरान टीम को नमूना लेने से रोकने का प्रयास किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दोबारा पहुंची टीम ने करीब 2500 लीटर तेल सीज कर नमूना प्रयोगशाला भेजा था। चार माह बाद आई रिपोर्ट में तेल की एसिड वैल्यू निर्धारित मानक 0.5 के मुकाबले 3.7 मिलीग्राम प्रति किलो के मुकाबले छह गुना से अधिक मिली। तेल में रैंसिडिटी यानी ऑक्सीकरण के कारण बासीपन और बदबू की भी पुष्टि हुई थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी राघवेंद्र वर्मा ने संचालक के खिलाफ एसीजीएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया है।
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लाइसेंस में भी मिलीं कई खामियां
निरीक्षण में पैकर श्रेणी का लाइसेंस होने के बावजूद प्रतिष्ठान में पैकिंग मशीन और प्रयोगशाला नहीं मिली। स्टॉक का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं था। अलग-अलग ब्रांड के खाली टिन जरूर मिले। इन कमियों के चलते मई में लाइसेंस आंशिक रूप से निलंबित किया गया। सुधार न होने पर जुलाई में लाइसेंस निलंबित कर कारोबार पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद फर्म की ओर से केंद्रीय लाइसेंस लेकर कारोबार किया जा रहा था।
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कार्रवाई छिपाकर लिया नया लाइसेंस
सहायक आयुक्त खाद्य राजेश द्विवेदी के अनुसार केंद्रीय खाद्य लाइसेंस के लिए एफएसएसएआई पोर्टल पर आवेदक को यह जानकारी देनी होती है कि उसके खिलाफ पहले कोई कार्रवाई या नमूना लेने की स्थिति नहीं रही है। विभाग का आरोप है कि बीआर ऑयल्स ने पूर्व की कार्रवाई और नमूनों की जानकारी छिपाकर गलत तथ्यों के आधार पर नया केंद्रीय लाइसेंस हासिल किया। जिसके निलंबन के लिए विभाग की ओर से लगातार विधिक कार्रवाई की जा रही है।